मोहम्मद शमी का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास, बीसीसीआई पर उठे सवाल
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तेरह साल के सफर का अंत, 229 विकेट और कई यादगार प्रदर्शन। शमी के फैसले ने भारतीय क्रिकेट में चयन नीति और खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
नौशाद अख्तर, नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में शामिल मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। छह नवंबर 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। इसके साथ ही उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया। हालांकि, शमी के इस फैसले ने जितनी चर्चा उनके शानदार क्रिकेट सफर को लेकर पैदा की है, उससे कहीं अधिक बहस भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की चयन नीति और टीम में उनकी वापसी को लेकर शुरू हो गई है।
36 साल की उम्र में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने वाले शमी ने लगभग 13 साल तक भारतीय टीम के लिए इस प्रारूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने छह नवंबर 2013 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट पदार्पण किया था। दिलचस्प बात यह है कि 13 साल बाद उसी तारीख को उन्होंने इस प्रारूप से विदाई का ऐलान किया। उनके इस सफर में कई यादगार मुकाबले, शानदार गेंदबाजी, चोट से वापसी और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान शामिल रहे।
हालांकि, शमी का संन्यास केवल एक खिलाड़ी के क्रिकेट से विदा लेने की खबर नहीं है। यह भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के चयन, उनकी फिटनेस और वरिष्ठ क्रिकेटरों के साथ बोर्ड के व्यवहार को लेकर उठ रहे सवालों से भी जुड़ गया है।
India veteran Mohammed Shami calls time on his career in Test cricket. Read more ⬇️ https://t.co/iZaePQt3jU
— ICC (@ICC) November 6, 2026
भावुक संदेश के साथ टेस्ट क्रिकेट को कहा अलविदा
मोहम्मद शमी ने इंस्टाग्राम पर अपने संन्यास की जानकारी देते हुए भारतीय टेस्ट जर्सी से जुड़े अनुभव साझा किए। उनका संदेश उन भावनाओं को सामने लाता है, जो एक खिलाड़ी के लिए देश की सफेद जर्सी पहनने के साथ जुड़ी होती हैं।
उन्होंने लिखा कि जब पहली बार भारत की टेस्ट जर्सी पहनी थी, तब उनके मन में केवल एक सपना था। वह सपना था अपने देश के लिए कुछ कर दिखाने का। इसके बाद हर विकेट, हर संघर्ष, हर चोट और हर वापसी ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया।
शमी ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट उनके लिए महज एक प्रारूप नहीं, बल्कि जिंदगी का बेहद खास हिस्सा रहा है। उन्होंने भारी मन और अनगिनत खूबसूरत यादों के साथ इस प्रारूप से संन्यास लेने का फैसला किया है।
अपने संदेश में उन्होंने टीम के साथियों, कोच, परिवार और उन करोड़ों भारतीयों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने अच्छे और मुश्किल दोनों समय में उन पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने बीसीसीआई और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के प्रति भी आभार जताया।
उनके संदेश की सबसे भावुक पंक्ति थी कि मैदान पर उनकी आखिरी टेस्ट गेंद भले ही फेंकी जा चुकी हो, लेकिन भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेगा।
Safed jersey se vida le raha hoon, lekin usse judi yaadon se kabhi nahi… 🇮🇳❤️ Jab pehli baar Bharat ki Test jersey pehni thi, tab sirf ek sapna tha — apne desh ke liye kuch kar dikhane ka.. Uske baad har wicket, har sangharsh, har chot aur har comeback ne mujhe kuch na kuch sikhaya. Test cricket mere liye sirf ek format nahi, meri zindagi ka ek behad khaas hissa raha hai. Aaj bhaari dil aur anginat khoobsurat yaadon ke saath main Test cricket se retirement lene ka faisla kar raha hoon. Is safar mein mera saath dene wale har teammate, coach, family aur un karodon Bharatiyon ka dil se shukriya, jinhone achhe aur mushkil dono waqt mein mujh par bharosa banaye rakha.. BCCI aur Cricket Association of Bengal (CAB) ka bhi dil se shukriya, jinhone mere talent par bharosa kiya, mujhe aage badhne ke mauke diye aur mere cricket ke safar mein ek aham bhoomika nibhayi. Aapka saath aur vishwas mere liye hamesha khaas rahega. Maidan par meri aakhri Test ball bhale hi fenki ja chuki ho, lekin Bharat ke liye khelne ka garv hamesha mere dil mein zinda rahega. Shukriya, Test Cricket. ❤️ Aapka Shami 🇮🇳 #Mdshami11 #Mdshami #TestCricket #Retirement
— 𝕸𝖔𝖍𝖆𝖒𝖒𝖆𝖉 𝖘𝖍𝖆𝖒𝖎 (@MdShami11) November 6, 2026
64 टेस्ट, 229 विकेट और शानदार रिकॉर्ड
मोहम्मद शमी का टेस्ट करियर आंकड़ों के लिहाज से भी काफी प्रभावशाली रहा। उन्होंने भारत के लिए 64 टेस्ट मैच खेले और 229 विकेट हासिल किए। उनका गेंदबाजी औसत 27.71 रहा। उन्होंने छह बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया। एक टेस्ट पारी में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 56 रन देकर छह विकेट रहा।
शमी की सबसे बड़ी विशेषता गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने और पिच से सीम मूवमेंट हासिल करने की क्षमता रही। नई गेंद के साथ उनकी गेंदबाजी जितनी प्रभावी थी, पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने में भी वह उतने ही माहिर थे।
विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए विशेष रूप से उपयोगी रहा। उन्होंने भारत से बाहर 41 टेस्ट मैचों में 145 विकेट लिए। इन मुकाबलों में उनका औसत 30.33 रहा।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनके प्रदर्शन को आज भी याद किया जाता है। 2018 के जोहानिसबर्ग टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 28 रन देकर पांच विकेट हासिल किए थे। उनकी इस गेंदबाजी ने भारत को मुश्किल परिस्थितियों में महत्वपूर्ण जीत दिलाने में मदद की।
इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के अगले दौरे पर सेंचुरियन में खेले गए पहले टेस्ट में भी उन्होंने आठ विकेट हासिल किए। इन प्रदर्शनों ने साबित किया कि शमी केवल भारतीय पिचों के गेंदबाज नहीं थे। तेज और उछाल वाली विदेशी पिचों पर भी वह बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते थे।
उनका आखिरी टेस्ट मुकाबला जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल था। इसके बाद चोटों और फिटनेस संबंधी समस्याओं के कारण उनकी टेस्ट टीम में वापसी नहीं हो सकी।
It was inevitable after what BCCI did with him – Srikkanth slams BCCI & Indian management after retirement of Mohammed Shami from Tests🤯 Kris Srikkanth said :🗣️ "This was bound to happen. The way Mohammed Shami was treated by BCCI, it was definitely on the cards. He has painfully announced his retirement from Test cricket. He has done so much for the country, but somehow never got that chance to play for India again. It’s been such a shame. He has been doing everything, playing domestic cricket, picking wickets regularly, and still no place for him. This is surely a forced retirement. It’s been such a shame, shame on BCCI & Indian management for treating your champion players like this. It is painful".
— Akshat (@Cricketmythos) November 6, 2026
क्या शमी के साथ हुआ अन्याय?
शमी के संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या उन्हें टेस्ट टीम में वापसी का पर्याप्त अवसर मिला? सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रशंसकों का एक बड़ा वर्ग उनके फैसले को सामान्य संन्यास के रूप में देखने के बजाय टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की भूमिका से जोड़ रहा है।
कुछ प्रशंसकों का मानना है कि जिस गेंदबाज ने भारत के लिए इतने महत्वपूर्ण मुकाबलों में प्रदर्शन किया, उसे टीम में वापसी का उचित अवसर मिलना चाहिए था। खासकर तब, जब वह घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी से लगातार सक्रिय रहने की कोशिश कर रहे थे।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर कृष्णमाचारी श्रीकांत ने भी शमी के संन्यास के बाद बीसीसीआई और भारतीय टीम प्रबंधन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह शमी के साथ व्यवहार किया गया, उससे उनका संन्यास लेना अप्रत्याशित नहीं था।
श्रीकांत के अनुसार, शमी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है। वह घरेलू क्रिकेट खेलते रहे और विकेट भी लेते रहे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें भारतीय टीम में वापसी का मौका नहीं मिला। उन्होंने इस स्थिति को निराशाजनक बताया।
उनकी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस और तेज हो गई कि क्या भारतीय क्रिकेट में वरिष्ठ खिलाड़ियों के योगदान को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है।
हालांकि, शमी के संन्यास के पीछे बीसीसीआई की ओर से किसी दबाव या मजबूरी का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे जबरन लिया गया फैसला कहना फिलहाल उचित नहीं होगा। लेकिन उनकी टेस्ट टीम में वापसी को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
Throwback to the moment when Mohammed Shami rocked and Ravi Shastri was left shocked 🥶😉 Can you name one bowler in India’s current Test squad who is better than retired Mohammed Shami? https://t.co/P6pMAYfiE3
— cricketplusmeme🧡🚩 (@cricketplusmeme) November 6, 2026
विराट कोहली के दौर में शमी की अहम भूमिका
मोहम्मद शमी का टेस्ट करियर भारतीय क्रिकेट के उस दौर से जुड़ा रहा, जब टीम ने विदेशी मैदानों पर अपनी पहचान मजबूत की। खासकर विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को नई ताकत मिली।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, शमी के 229 टेस्ट विकेटों में से 168 विकेट विराट कोहली के नेतृत्व वाले दौर में आए। यह आंकड़ा उस समय भारतीय टीम में उनकी अहमियत को समझने के लिए काफी है।
शमी की गेंदबाजी में गति के साथ नियंत्रण भी था। उनका रनअप सहज था और गेंद छोड़ने के बाद सीम की स्थिति बल्लेबाजों के लिए परेशानी पैदा करती थी। कई बार बल्लेबाज गेंद की दिशा का अंदाजा नहीं लगा पाते थे।
उनकी गेंदबाजी का एक खास पहलू यह भी था कि वह लंबे स्पेल में लगातार एक जैसी गति और लय बनाए रख सकते थे। टेस्ट क्रिकेट में यह क्षमता किसी भी तेज गेंदबाज के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
229 Test wickets. 168 of them came under Virat Kohli. Mohammed Shami was a huge part of one of India’s finest eras in Test cricket. That beautiful, effortless action, the seam position, the late movement and the reverse swing. He made it all look so natural. Only last month, he was answering his fitness critics with the ball in hand. Some things, it seems, never need an explanation. You’ll be missed in whites, @MdShami11. Here’s hoping we get to see you in India blue once again.
— Akshay Ramesh (@iamnotakshayr) November 6, 2026
चोटों से संघर्ष और शानदार वापसी
शमी का क्रिकेट सफर हमेशा आसान नहीं रहा। उन्हें अपने करियर में कई बार चोटों का सामना करना पड़ा। घुटने और टखने की समस्याओं ने उनके खेल को प्रभावित किया। इसके बावजूद उन्होंने हर बार वापसी की कोशिश की।
2015 विश्व कप में भी उन्होंने चोट के बावजूद भारत के लिए गेंदबाजी की थी। उस टूर्नामेंट में उन्होंने 17 विकेट हासिल किए और भारत के सबसे प्रभावी गेंदबाजों में शामिल रहे।
2023 के वनडे विश्व कप में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। शुरुआती मुकाबलों में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी। लेकिन हार्दिक पांड्या की चोट के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया।
इसके बाद शमी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने केवल सात मुकाबलों में 24 विकेट हासिल किए। वह टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाज बने। न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 57 रन देकर सात विकेट लेना उनके वनडे करियर के सबसे यादगार प्रदर्शनों में शामिल हो गया।
इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मुकाबलों में शमी की उपयोगिता कितनी अधिक है।
He arrived in Test cricket on a 6️⃣ November, he bade farewell to it on another 6️⃣ November. In between: 64 Tests, 2️⃣2️⃣9️⃣ wickets, 27.71 average, 6 fifers, and many memories 💥 Happy retirement, Mohammed Shami! #MohammedShami #IndianCricket #TestCricket #FastBowling https://t.co/b8Agl3Msx2
— Cricketangon (@cricketangon) November 6, 2026
आईपीएल में भी रहा उतार चढ़ाव
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भी मोहम्मद शमी ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ आईपीएल करियर की शुरुआत की थी। बाद में दिल्ली, पंजाब किंग्स, गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद और लखनऊ सुपर जायंट्स जैसी टीमों का हिस्सा बने।
पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। 2019, 2020 और 2021 के आईपीएल सत्र में उन्होंने क्रमशः 19, 20 और 19 विकेट हासिल किए।
2022 में गुजरात टाइटंस से जुड़ने के बाद उनका प्रदर्शन और बेहतर हुआ। टीम के पहले ही सत्र में उन्होंने 20 विकेट लेकर खिताब जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2023 का आईपीएल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी शानदार रहा। उन्होंने 17 मैचों में 28 विकेट हासिल किए और पर्पल कैप अपने नाम की। यह उनके आईपीएल करियर का सबसे सफल सत्र रहा।
हालांकि, चोट के कारण 2024 के आईपीएल में वह नहीं खेल सके। 2025 में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद 2026 में वह लखनऊ सुपर जायंट्स से जुड़ गए।
टेस्ट क्रिकेट के बाद आगे क्या?
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मोहम्मद शमी वनडे और टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए खेलते रहेंगे? उनके संन्यास संदेश में केवल टेस्ट क्रिकेट से विदाई की बात कही गई है। इसलिए इसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास नहीं माना जाना चाहिए।
शमी के सामने अभी सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित करने का अवसर हो सकता है। हालांकि, उनकी फिटनेस, चयनकर्ताओं की प्राथमिकताएं और टीम की जरूरतें इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मोहम्मद शमी का टेस्ट करियर अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है। 64 मैचों में 229 विकेट, विदेशी मैदानों पर शानदार प्रदर्शन और विश्व कप में यादगार गेंदबाजी उनकी उपलब्धियों को लंबे समय तक जीवित रखेगी।
उनकी विदाई के साथ भारतीय टेस्ट क्रिकेट ने एक ऐसे तेज गेंदबाज को खो दिया है, जिसने अपनी मेहनत, कौशल और संघर्ष से अलग पहचान बनाई। लेकिन उनके संन्यास के साथ उठे सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है कि भारतीय क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों को टीम में वापसी का कितना अवसर मिलता है और चयन प्रक्रिया में उनके पुराने योगदान का कितना महत्व है।
महत्वपूर्ण सवाल और जवाब
1. मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास कब लिया?
मोहम्मद शमी ने 6 नवंबर 2026 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की।
2. मोहम्मद शमी ने कितने टेस्ट मैच खेले?
उन्होंने भारत के लिए 64 टेस्ट मैच खेले और 229 विकेट हासिल किए।
3. मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कब किया था?
उन्होंने 6 नवंबर 2013 को वेस्टइंडीज के खिलाफ ईडन गार्डन्स में टेस्ट पदार्पण किया था।
4. टेस्ट क्रिकेट में मोहम्मद शमी का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन क्या है?
उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन एक पारी में 56 रन देकर छह विकेट है।
5. क्या मोहम्मद शमी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लिया है?
नहीं। उपलब्ध घोषणा के अनुसार उन्होंने केवल टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया है।

