न्यूयॉर्क के बाद न्यू जर्सी में भी भारतीय मूल का परचम: जुनैद क़ाज़ी बने डिप्टी मेयर
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में है। न्यूयॉर्क सिटी में जोहरान ममदानी के मेयर बनने के बाद अब न्यू जर्सी राज्य के मार्लबोरो टाउनशिप (Marlboro Township) से एक और भारतीय मूल के नेता जुनैद क़ाज़ी को डिप्टी मेयर नियुक्त किया गया है। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले जुनैद क़ाज़ी की यह उपलब्धि न केवल भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि स्थानीय अमेरिकी राजनीति में प्रवासी भारतीय किस तरह प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।

जुनैद क़ाज़ी पेशे से सिविल इंजीनियर और व्यवसायी हैं तथा अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने मार्लबोरो टाउनशिप काउंसिल में अपनी सक्रिय भूमिका और नेतृत्व क्षमता के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। वर्ष 2021 में वे टाउनशिप काउंसिल के लिए निर्वाचित हुए थे और इसी के साथ वे इस क्षेत्र की शासकीय व्यवस्था में शामिल होने वाले शुरुआती भारतीय अमेरिकियों में से एक बने। उनका चुना जाना स्थानीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत था, क्योंकि इससे पहले लगभग दो दशकों तक यहां एक ही पार्टी का वर्चस्व रहा था।

जनवरी 2022 में शपथ लेने के बाद जुनैद क़ाज़ी ने अपने सहयोगियों का भरोसा जीता और सर्वसम्मति से उन्हें काउंसिल प्रेसिडेंट चुना गया। यह उनके नेतृत्व, कार्यशैली और जिम्मेदार प्रशासन के प्रति सभी दलों के सम्मान को दर्शाता है। अब डिप्टी मेयर के रूप में उनकी नियुक्ति को मार्लबोरो टाउनशिप के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
डिप्टी मेयर बनने के बाद जुनैद क़ाज़ी ने कहा,
“मार्लबोरो जैसे खूबसूरत टाउनशिप की सेवा जारी रखने का अवसर मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं यहां के निवासियों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया और सेवा का मौका दिया।”
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्मे जुनैद क़ाज़ी ने सेंट फ्रांसिस हाई स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने कड़ी मेहनत के बल पर न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि अमेरिकी नागरिक भी बने। उनका जीवन प्रवासी भारतीयों के उस संघर्ष और सफलता की कहानी को दर्शाता है, जिसमें मेहनत, जिम्मेदारी और समाज को कुछ लौटाने की भावना प्रमुख होती है।
पेशेवर जीवन में जुनैद क़ाज़ी रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र से जुड़े एक सफल व्यवसायी हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास कार्यों और वित्तीय अनुशासन का उन्हें गहरा अनुभव है, जिसका लाभ वे स्थानीय प्रशासन में भी दे रहे हैं। विकास योजनाओं, नगर सेवाओं और दीर्घकालिक योजना निर्माण से जुड़े मुद्दों पर उनकी व्यावहारिक समझ को विशेष रूप से सराहा जाता है।
अमेरिका में स्थानीय राजनीति में आने से पहले भी जुनैद क़ाज़ी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2014 में वे इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस (I) के अध्यक्ष रह चुके हैं। भारत और भारतीय राजनीति से उनका यह जुड़ाव लंबे समय से रहा है, जो बाद में अमेरिका में भी उनके सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में दिखाई देता है।
डिप्टी मेयर क़ाज़ी ने मार्लबोरो के मेयर जोनाथन हॉर्निक की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि मेयर हॉर्निक के नेतृत्व और दूरदृष्टि से नगर सेवाएं मजबूत हुई हैं, टाउनशिप की AAA बॉन्ड रेटिंग बनी हुई है और मार्लबोरो न्यू जर्सी के प्रमुख समुदायों में अपनी प्रतिष्ठा बनाए हुए है।
उन्होंने अपने सहकर्मी काउंसिल सदस्यों—एंटोनेट डीनुज्जो, माइकल मिलमैन, माइक स्केलिया और इकलीन विर्दी—का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि आपसी एकता और टीमवर्क की वजह से ही यह प्रगति संभव हो पाई है।
जुनैद क़ाज़ी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका-भारत संबंधों और वैश्विक राजनीति को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक ओर अमेरिका की नीतियों, ईरान से तेल खरीद और टैरिफ जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय मूल के नेता अमेरिका की राजनीति में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रवासी भारतीय समुदाय न केवल सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

हालांकि कुछ राजनीतिक समर्थक और आलोचक इन उपलब्धियों को अपने-अपने नजरिये से देखते हैं, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि जुनैद क़ाज़ी की सफलता भारतीय मूल के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। डिप्टी मेयर के रूप में उन्होंने साफ कहा है कि यह पद उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है।
“ईश्वर की कृपा से मैं मार्लबोरो और उसके निवासियों के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करता रहूंगा,” उन्होंने कहा।
जुनैद क़ाज़ी की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सीमाएं चाहे जितनी भी दूर हों, मेहनत, नेतृत्व और सेवा भावना के बल पर वैश्विक मंच पर पहचान बनाई जा सकती है।

