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एएमयू न्यूज़ डायरी : 36 घंटों में सम्मान, शोध, सेवा और नेतृत्व की मिसाल बनी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,अलीगढ़ ( उत्तर प्रदेश)

देश की चुनिंदा केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) एक बार फिर अपनी शैक्षणिक, प्रशासनिक और सामाजिक उपलब्धियों के कारण सुर्खियों में है। बीते 24 से 36 घंटों के भीतर एएमयू से ऐसी कई सकारात्मक और प्रेरक खबरें सामने आई हैं, जो यह साबित करती हैं कि यह संस्थान न सिर्फ ज्ञान का केंद्र है, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा और नवाचार का भी मजबूत स्तंभ है। किसी को राष्ट्रीय सम्मान मिला, कहीं शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रदर्शन हुआ, तो कहीं समाज-सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता की मिसाल कायम की गई।

एएमयू के पूर्व छात्र डॉ. मोहम्मद हसीब मुगल को राष्ट्रपति पुलिस पदक

एएमयू के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र डॉ. मोहम्मद हसीब मुगल, आईपीएस (2009 बैच) को गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया। वर्तमान में वे डीआईजी, ट्रैफिक, जम्मू ज़ोन के पद पर कार्यरत हैं। भद्रवाह (डोडा, जम्मू-कश्मीर) निवासी डॉ. मुगल एएमयू से बीएससी (ऑनर्स) और एमएससी में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। आतंक-प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में उनकी सेवा, नेतृत्व और साहसिक भूमिका को देशभर में सराहा गया है।
एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून ने कहा कि यह सम्मान एएमयू की उस परंपरा को दर्शाता है, जो राष्ट्रसेवा के लिए प्रतिबद्ध नेतृत्व तैयार करती रही है।

डिजिटल शिक्षा में एएमयू की मजबूत मौजूदगी

एएमयू के शिक्षकों ने झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित राष्ट्रीय ई-कंटेंट विकास कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता और संसाधन व्यक्ति भाग लेकर डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
कंप्यूटर साइंस विभाग के डॉ. आसिफ इरशाद खान ने एनईपी-2020, डिजिटल इंडिया, स्वयम-मूक्स और गुणवत्ता मानकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. अरशद इकबाल ने मूडल और ग्नोमियो जैसे प्लेटफॉर्म पर ई-लर्निंग के व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र संचालित किए।

सर्वाइकल कैंसर जागरूकता में एएमयू की सराहनीय पहल

एएमयू के यूनानी चिकित्सा संकाय के निस्वान वा क़बालत विभाग ने सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के तहत जांच, परामर्श और निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन कर महिला स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती दी। वीआईए, वीआईएलआई, पैप स्मीयर और एचपीवी डीएनए टेस्ट जैसे वैज्ञानिक तरीकों से सैकड़ों महिलाओं की जांच की गई।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर निबंध प्रतियोगिता

जेएन मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने ‘वंदे मातरम्: राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित कर छात्रों में देशभक्ति और बौद्धिक चेतना को प्रोत्साहित किया। प्रतियोगिता में डॉ. शिफा खान प्रथम और डॉ. सैयद अबू नोमैर द्वितीय स्थान पर रहे।

प्रो. रक्शंदा फ़ारूक़ फ़ज़ली बनीं विभागाध्यक्ष

पश्चिम एशिया एवं उत्तर अफ्रीकी अध्ययन विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका प्रो. रक्शंदा फ़ज़ली को विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया। अंतरराष्ट्रीय शोध, प्रवासन अध्ययन और जीआईएस में उनके योगदान ने एएमयू को वैश्विक अकादमिक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई है।

कुल मिलाकर, एएमयू की ये उपलब्धियां न सिर्फ विश्वविद्यालय के गौरव को बढ़ाती हैं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि सकारात्मक सोच, समर्पण और ज्ञान से संस्थान समाज और राष्ट्र दोनों को दिशा दे सकता है।