News

एएमयू शोधकर्ता रमीज राजा ने कोलंबिया में ट्रांसजेंडर वित्तीय समावेशन पर शोध किया पत्र प्रस्तुत

नई दिल्ली:

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के एक होनहार रिसर्चर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। एएमयू के अर्थशास्त्र विभाग (Department of Economics) के सीनियर रिसर्च फेलो रमीज राजा ने कोलंबिया के कैली शहर में आयोजित एक बड़े ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। उन्होंने वहां ट्रांसजेंडर समुदाय के वित्तीय समावेशन (Transgender Financial Inclusion) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण रिसर्च पेपर पेश किया है।

यह प्रस्तुति इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर फेमिनिस्ट इकोनॉमिक्स (IAFFE) के 34वें वार्षिक सम्मेलन में हुई। इस सम्मेलन का आयोजन कोलंबिया की यूनिवर्सिडैड आईसीईएसआई (Universidad ICESI) में किया गया था। सबसे खास बात यह है कि इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए रमीज राजा को IAFFE की तरफ से पूरा प्रायोजन (Fully Sponsored) मिला था।

दिल्ली-एनसीआर के ट्रांसजेंडर समुदाय पर केंद्रित है शोध

रमीज राजा एएमयू में प्रोफेसर मोहम्मद आज़म खान के मार्गदर्शन में अपनी डॉक्टरेट रिसर्च पूरी कर रहे हैं। उनके शोध का मुख्य विषय “वित्तीय समावेशन और ट्रांसजेंडर समुदाय: दिल्ली-एनसीआर का एक केस स्टडी” है। कोलंबिया में उन्होंने जो पेपर पढ़ा, उसका शीर्षक था — “बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का विस्तार: दिल्ली-एनसीआर, भारत में ट्रांसजेंडर समावेशन के निर्धारक और चुनौतियां।”

यह रिसर्च सीधे तौर पर जमीनी हकीकत को बयां करती है। साल 2014 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय को कानूनी पहचान दी थी। इसके बावजूद आज भी यह समुदाय मुख्यधारा की बैंकिंग सेवाओं से काफी दूर है। रमीज की रिसर्च यही बताती है कि सिर्फ कागजों पर कानूनी मान्यता मिल जाना ही काफी नहीं है। जब तक उन्हें आर्थिक रूप से अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्चा समावेशन अधूरा है।

बैंकिंग सिस्टम और ट्रांसजेंडर समुदाय के बीच की दीवारें

कोलंबिया में अपनी बात रखते हुए रमीज राजा ने जोर देकर कहा कि अगर किसी भी समाज को आगे बढ़ना है, तो उसके हर वर्ग को आर्थिक आजादी मिलनी चाहिए। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए बैंकिंग सेवाएं सिर्फ पैसे के लेन-देन का साधन नहीं हैं। यह उनकी गरिमा, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ा मसला है।

इस शोध के दौरान दिल्ली-एनसीआर में कई बड़े बदलाव और चुनौतियां सामने आईं। रमीज ने बैंकिंग सेवाओं के रास्ते में आने वाली मुख्य रुकावटों को रेखांकित किया:

  • दस्तावेजों की समस्या: पहचान पत्र और बैंक खाते के लिए जरूरी कागजात बनवाने में आज भी ट्रांसजेंडर समुदाय को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
  • सामाजिक भेदभाव: बैंक शाखाओं और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाला भेदभाव उन्हें औपचारिक बैंकिंग से दूर रखता है।
  • वित्तीय साक्षरता की कमी: बैंकिंग प्रॉडक्ट्स, लोन योजनाओं और डिजिटल बैंकिंग के बारे में सही जानकारी न होना भी एक बड़ा कारण है।
  • आजीविका के सीमित साधन: रोजगार के बेहतर मौके न मिलने की वजह से उनकी आय नियमित नहीं हो पाती, जिससे वे बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा नहीं बन पाते।

वैश्विक मंच पर मिली सराहना

सम्मेलन में मौजूद दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं ने एएमयू के इस रिसर्च पेपर को खूब सराहा। इस दौरान फेमिनिस्ट इकोनॉमिक्स, सोशल जस्टिस और फाइनेंशियल इनक्लूजन जैसे गंभीर विषयों पर लंबी चर्चा हुई। यह प्रस्तुति वैश्विक स्तर पर यह दिखाने में सफल रही कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) समावेशी विकास और सामाजिक समानता से जुड़े मुद्दों पर कितना गंभीर और प्रामाणिक काम कर रही है।

अपनी इस सफलता पर रमीज राजा बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बेहद गर्व की बात है। इस मंच के जरिए उन्हें हाशिए पर मौजूद समुदायों की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को दुनिया के सामने रखने का एक बेहतरीन मौका मिला।

यह रिसर्च आने वाले समय में नीति निर्माताओं (Policy Makers) के लिए एक अहम गाइड साबित हो सकती है। जब तक बैंकिंग और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का दायरा हर नागरिक तक नहीं फैलता, तब तक किसी भी देश का आर्थिक विकास समावेशी नहीं कहला सकता। भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह अध्ययन एक नई राह दिखाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *