News

एयर इंडिया हादसे में मानवता की मिसाल: अबूधाबी के डॉ. शमशीर वायलिल ने मृत डॉक्टरों के परिवारों को दी आर्थिक मदद

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

जब दुनिया ईरान-इज़रायल युद्ध की ख़बरों में उलझी हुई है, तब अबूधाबी से एक ख़ामोश लेकिन बेहद मानवीय कदम सामने आया है। एक मुसलमान डॉक्टर ने जाति, धर्म या राष्ट्र की सीमाओं से परे जाकर भारतीयों के लिए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो नफरत फैलाने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है।

अबूधाबी स्थित मशहूर बुर्जील होल्डिंग्स के संस्थापक और अरब के प्रतिष्ठित उद्योगपति डॉ. शमशीर वायलिल ने हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे में मारे गए मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही घायल हुए छात्रों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

धर्म नहीं, इंसानियत बनी प्राथमिकता

सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि डॉ. शमशीर ने यह सहायता किसी धार्मिक संस्था या मुस्लिम संगठन के ज़रिए नहीं, बल्कि बी.जे. मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के माध्यम से देने का निर्णय लिया है — उस एसोसिएशन में कोई मुसलमान सदस्य भी नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि डॉ. शमशीर के लिए मदद की प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ इंसानियत है।

क्या है हादसे की पृष्ठभूमि

इस महीने की शुरुआत में एयर इंडिया की अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट टेक-ऑफ के कुछ मिनट बाद ही तकनीकी खराबी के कारण गिर पड़ी थी। दुर्भाग्य से विमान शहर के बी.जे. मेडिकल कॉलेज की मेस बिल्डिंग पर गिरा, जिससे चार एमबीबीएस छात्रों और एक डॉक्टर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए।

एयर इंडिया ने अपने यात्रियों के परिजनों को मुआवज़ा देने की घोषणा की थी, लेकिन मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए कोई विशेष आर्थिक सहायता अब तक घोषित नहीं की गई थी।

कौन हैं डॉ. शमशीर वायलिल?

केरल में जन्मे डॉ. शमशीर पेशे से रेडियोलॉजिस्ट हैं और उन्होंने मध्य-पूर्व में शेख खलीफा मेडिकल सिटी, अबूधाबी से अपने करियर की शुरुआत की थी। वे वर्तमान में बुर्जील होल्डिंग्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं — एक ऐसा हेल्थकेयर समूह जो 16 अस्पतालों, 24 मेडिकल सेंटर्स और फार्मा कंपनियों का संचालन करता है।

फोर्ब्स के मुताबिक उनकी नेट वर्थ 6.22 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने शाहरुख़ खान को अपनी कंपनी का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। वे यूएई मेडिकल काउंसिल और शारजाह यूनिवर्सिटी के बोर्ड में भी शामिल हैं।

परोपकार की लंबी सूची

  • दिवंगत शेख जायद की स्मृति में 100 निःशुल्क हृदय शल्यचिकित्साएं।
  • स्तन कैंसर और श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य जांच अभियान।
  • 2017 में शेख हमदान बिन जायद पुरस्कार
  • प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार 2014
  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा दी गई मानद डॉक्टरेट
  • अर्नस्ट एंड यंग द्वारा ‘वर्ष का उद्यमी’ पुरस्कार।

डॉ. शमशीर के मुताबिक, “सच्ची सेवा वही है जो बिना किसी स्वार्थ और प्रचार के हो। जब लोग तकलीफ़ में हों, तब खड़े हो जाना ही असली इंसानियत है।”

सवाल यह भी…

जब एक विदेशी मूल का मुस्लिम डॉक्टर भारत के युवाओं के लिए इतना कर सकता है, तो फिर हमारे अपने सरकारी और कॉर्पोरेट तंत्र की चुप्पी क्यों? और क्या मीडिया का युद्ध की सनसनी में डूब जाना मानवीय कहानियों को गुम कर देना उचित है?

डॉ. शमशीर वायलिल की यह पहल इस बात का सबूत है कि जब राजनीति और धर्म चुप होते हैं, तब इंसानियत बोलती है — और उसका असर बहुत दूर तक होता है।