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ईरान अमेरिका तनाव के बीच तेहरान जाएंगे आसिम मुनीर

नई दिल्ली

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीति एक बार फिर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचने वाले हैं। उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका ईरान पर नए और बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने बताया है कि आसिम मुनीर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए तेहरान आ रहे हैं। पाकिस्तान के दो सरकारी सूत्रों ने भी उनकी यात्रा की पुष्टि की है। रॉयटर्स के अनुसार, यात्रा में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच संवाद कायम कराने की कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ वाशिंगटन ने तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी कर ली है। अमेरिका की ओर से घोषित नए प्रतिबंधों को लेकर ईरान ने कड़ा विरोध जताया है।

आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?

आसिम मुनीर की ईरान यात्रा को केवल पाकिस्तान और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा है। इसका सीधा संबंध पश्चिम एशिया में चल रही बड़ी कूटनीतिक हलचल से है।

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव के बाद जून में एक समझौता हुआ था। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अब इस समझौते का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि यह समझौता ईरान को ऐसी स्थिति से बाहर निकालने का रास्ता है जिसे वह न युद्ध और न शांति की स्थिति मानते हैं।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों ने इस समझौते को गरिमा, समझदारी और राष्ट्रीय हित के लिहाज से सबसे बेहतर विकल्प माना। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसे आत्मसमर्पण माना जाए।

यही पृष्ठभूमि आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा को अहम बनाती है।

अमेरिका के नए प्रतिबंधों से बढ़ा दबाव

अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को मिलने वाले आर्थिक स्रोतों को रोकना और तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय नीतियों को लेकर समझौते की दिशा में आगे बढ़ाना है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान की घोषणा की है। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका नए प्रतिबंधों के जरिए ईरान की तेल बिक्री, वित्तीय लेनदेन, जहाजों के पंजीकरण और उन कंपनियों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है जिन्हें तेहरान की अर्थव्यवस्था से जुड़ा माना जाता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी है कि ईरान को आर्थिक मदद या व्यापारिक रास्ता उपलब्ध कराने पर उन्हें परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

इससे पाकिस्तान की स्थिति भी संवेदनशील हो गई है। इस्लामाबाद एक तरफ अमेरिका के साथ अपने संबंध बनाए रखना चाहता है। दूसरी तरफ ईरान उसका पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से सुरक्षा और व्यापारिक संबंध हैं।

ईरान ने अमेरिका के दबाव को खारिज किया

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ईरान आर्थिक दबाव से डरने वाला नहीं है। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंध पहले भी लगाए गए हैं और इस तरह के दबाव से ईरान की नीति नहीं बदलेगी।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का रुख हालांकि बातचीत के पक्ष में दिखाई देता है। उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया है।

पेजेश्कियान के मुताबिक ईरान के सामने महंगाई, बेरोजगारी और लोगों की आजीविका से जुड़ी गंभीर चुनौतियां हैं। उनका कहना है कि देश में आर्थिक अनिश्चितता कम करना जरूरी है ताकि निवेश और आर्थिक गतिविधियां आगे बढ़ सकें।

यही वजह है कि ईरान में एक तरफ अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख दिखाई देता है तो दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता भी पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा मुद्दा

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे इस जलमार्ग पर बड़ा रणनीतिक प्रभाव देती है। हालिया तनाव के दौरान तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर दूसरे देश अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होते हैं तो उन्हें भी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी चिंता बढ़ी है।

रॉयटर्स के अनुसार, होर्मुज से तेल की आवाजाही लगभग ठप होने की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

इसलिए आसिम मुनीर की यात्रा में समुद्री सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका

पाकिस्तान पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिश करता रहा है। इस्लामाबाद का भौगोलिक और राजनीतिक महत्व दोनों देशों के साथ संवाद बनाए रखने में मदद करता है।

ईरान पाकिस्तान का पड़ोसी है। दोनों देशों की लंबी सीमा है। अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया की सुरक्षा परिस्थितियां भी दोनों देशों को एक दूसरे के करीब लाती हैं।

दूसरी तरफ पाकिस्तान के अमेरिका के साथ लंबे समय से सुरक्षा और रणनीतिक संबंध रहे हैं। इसलिए इस्लामाबाद के लिए दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।

आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा इसी संतुलन की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है।

किन मुद्दों पर हो सकती है बातचीत?

रिपोर्टों के अनुसार, आसिम मुनीर की ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत में कई मुद्दे उठ सकते हैं।

इनमें ईरान अमेरिका तनाव, प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंध, इस्लामाबाद समझौता, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य प्रमुख हैं।

इसके अलावा पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हालिया समझौते के बाद पश्चिम एशिया की बदलती राजनीतिक स्थिति पर भी बातचीत हो सकती है।

यमन में हूती संकट भी क्षेत्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।

पाकिस्तान के लिए यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ईरान के साथ संबंध खराब किए बिना अमेरिका के साथ अपने कूटनीतिक समीकरण बनाए रखना चाहता है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर कितना दबाव है?

ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। तेल निर्यात उसकी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रतिबंधों ने बैंकिंग, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है।

हालिया तनाव ने आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ाया है।

पेजेश्कियान ने महंगाई और बेरोजगारी को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य ईरानी जनता की आजीविका की रक्षा करना है।

यही कारण है कि तेहरान के लिए आर्थिक दबाव कम करना एक बड़ा मुद्दा है। लेकिन ईरानी नेतृत्व यह भी साफ कर रहा है कि आर्थिक राहत के बदले वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेगा।

क्या अमेरिका और ईरान फिर बातचीत की मेज पर आएंगे?

यह फिलहाल सबसे बड़ा सवाल है।

जून में हुए इस्लामाबाद समझौते ने संघर्ष को रोकने और आगे बातचीत का रास्ता बनाने की कोशिश की थी। लेकिन समझौते के बाद भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।

आईआरएनए के अनुसार, पेजेश्कियान ने कहा कि मौजूदा स्थिति को लंबे समय तक जारी नहीं रखा जा सकता। उनका तर्क है कि आर्थिक गतिविधियों के लिए देश से जोखिम और अनिश्चितता कम करना जरूरी है।

दूसरी तरफ अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी प्रतिबंधों को विफल होने वाला कदम बताया है।

ऐसे माहौल में पाकिस्तान की मध्यस्थता महत्वपूर्ण हो सकती है।

तेहरान यात्रा का अगला असर क्या होगा?

आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा से तत्काल किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। लेकिन यह यात्रा संवाद का एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर है।

अगर पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखने में सफल होता है तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और ईरान अपनी रणनीतिक स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता।

होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा अब एक दूसरे से जुड़े मुद्दे बन चुके हैं।

ऐसे में आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा केवल एक सैन्य अधिकारी की विदेश यात्रा नहीं है। यह पाकिस्तान की उस कूटनीतिक कोशिश का हिस्सा है जिसमें वह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को बातचीत की दिशा में ले जाना चाहता है।

AEO के लिए प्रमुख सवाल और जवाब

आसिम मुनीर ईरान क्यों जा रहे हैं?
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के प्रयासों के तहत तेहरान जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की पाकिस्तान की कोशिश भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद क्यों बढ़ रहा है?
दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य तनाव से जुड़े कई मुद्दों पर मतभेद हैं।

मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका से समझौते का बचाव क्यों किया?
पेजेश्कियान के अनुसार, समझौता ईरान को न युद्ध और न शांति वाली स्थिति से बाहर निकालने का रास्ता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित और गरिमा के अनुरूप बताया है।

अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंध क्यों लगा रहा है?
वाशिंगटन का उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसकी अर्थव्यवस्था तथा तेल कारोबार से जुड़े स्रोतों को सीमित करना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी बड़े व्यवधान का असर तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

पाकिस्तान की भूमिका क्या है?
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए संवाद और मध्यस्थता का रास्ता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

क्या आसिम मुनीर की यात्रा से ईरान अमेरिका तनाव खत्म हो जाएगा?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। यात्रा से बातचीत का रास्ता मजबूत हो सकता है, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं।