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एएमयू में आयुर्वेद दिवस : पारंपरिक चिकित्सा पर चर्चा

अलीगढ़।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में 11वां विश्व आयुर्वेद दिवस अकादमिक और शैक्षणिक गतिविधियों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद की पारंपरिक समझ, आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता और आयुर्वेद तथा यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के बीच अकादमिक संवाद की संभावनाओं पर चर्चा हुई। एक यूनानी चिकित्सा संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम का खास पहलू यही रहा कि इसमें अलग अलग पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को एक दूसरे को समझने और उनसे सीखने की जरूरत पर जोर दिया गया।

विश्व आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और आयुष मंत्रालय की पहल के अनुरूप आयोजित किया गया था। अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में हुए इस आयोजन में शिक्षकों, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल आयुर्वेद के बारे में जानकारी देना नहीं था। इसके जरिए पारंपरिक और समेकित चिकित्सा पद्धतियों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की जरूरत भी सामने रखी गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एएमयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज थे। उन्होंने भारत की विविध पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके बीच अकादमिक सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद, यूनानी और दूसरी चिकित्सा प्रणालियों के अध्ययन को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की बात कही। उनके अनुसार विद्यार्थियों और शिक्षकों को केवल अपनी चिकित्सा पद्धति तक सीमित रहने के बजाय दूसरी प्रणालियों की मूल अवधारणाओं को भी समझना चाहिए।

प्रोफेसर गुलरेज ने इस बात पर भी जोर दिया कि अलग अलग पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच संवाद से सीखने के नए रास्ते खुल सकते हैं। भारत में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा की अपनी अलग ऐतिहासिक और बौद्धिक परंपराएं रही हैं। दोनों प्रणालियों का अध्ययन लंबे समय से देश की चिकित्सा शिक्षा का हिस्सा रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालयों और चिकित्सा संस्थानों में इनके बीच बातचीत विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है।

कार्यक्रम में आमंत्रित व्याख्यान भी आयोजित किया गया। जीवन ज्योति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ के कायचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सौरभ नायक ने “Ayurveda: Timeless Wisdom, Unique Principles, and the Pathway to a Healthier Tomorrow” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों और वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से बात की।

प्रोफेसर सौरभ नायक ने आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं को समझाते हुए कहा कि इस चिकित्सा पद्धति की अपनी विशिष्ट विचारधारा और उपचार संबंधी दृष्टिकोण है। उन्होंने पारंपरिक और समेकित चिकित्सा के क्षेत्र में अकादमिक संवाद की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उनके व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहा कि अलग अलग चिकित्सा प्रणालियों के बीच बातचीत को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखकर अध्ययन और शोध के स्तर पर भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम का महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि यह एक यूनानी चिकित्सा संस्थान में हुआ। यहां आयुर्वेद से जुड़े विशेषज्ञ को आमंत्रित किया गया और विद्यार्थियों को आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं को सीधे समझने का अवसर मिला। इससे चिकित्सा शिक्षा में संवाद और पारस्परिक अध्ययन की जरूरत पर चर्चा का एक अलग वातावरण बना।

कार्यक्रम में फैकल्टी ऑफ यूनानी मेडिसिन की डीन प्रोफेसर सैयदा आमेना नाज ने अतिथियों और आमंत्रित वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रोफेसर सौरभ नायक के व्याख्यान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होते हैं क्योंकि उन्हें अपनी पढ़ाई के अलावा दूसरी चिकित्सा पद्धतियों के बारे में भी जानने का अवसर मिलता है।

अजमल खान तिब्बिया कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर बीडी खान ने भी कार्यक्रम को अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एक यूनानी चिकित्सा संस्थान में आयुर्वेद से जुड़े विशेषज्ञ को आमंत्रित करना अकादमिक खुलेपन की भावना को दर्शाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह का संवाद एकतरफा नहीं होना चाहिए। अलग अलग चिकित्सा प्रणालियों के बीच बातचीत समान और समावेशी आधार पर आगे बढ़नी चाहिए।

कार्यक्रम में केवल व्याख्यान ही नहीं हुआ। विद्यार्थियों के लिए निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं में छात्रों ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, स्वास्थ्य और वेलनेस से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। पोस्टर के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक समझ सामने रखी। निबंध प्रतियोगिता में उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा, स्वास्थ्य और बदलती जीवनशैली जैसे विषयों को अपने नजरिए से देखा।

प्रतियोगिताओं के बाद विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार भी दिए गए। इससे कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ी। सामान्य तौर पर किसी चिकित्सा दिवस का आयोजन केवल विशेषज्ञों के व्याख्यान तक सीमित रह सकता है। लेकिन यहां विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं के माध्यम से सीधे शामिल किया गया। इससे आयोजन का शैक्षणिक पक्ष और मजबूत हुआ।

कार्यक्रम के समन्वयक प्रोफेसर फारूक अहमद डार ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने आयोजन के अकादमिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्व आयुर्वेद दिवस जैसे अवसर विद्यार्थियों और शिक्षकों को पारंपरिक चिकित्सा के अलग अलग पहलुओं को समझने का अवसर देते हैं। उनके अनुसार चिकित्सा शिक्षा में संवाद की अपनी भूमिका है और इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों की समझ को व्यापक बना सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अबीहा अहमद खान ने किया। उन्होंने आयोजन के विभिन्न हिस्सों को क्रम से आगे बढ़ाया। अंत में डॉ. आतिया समद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।

विश्व आयुर्वेद दिवस हर साल आयुर्वेद और उसकी परंपरा पर चर्चा का अवसर देता है। भारत में आयुर्वेद को पारंपरिक चिकित्सा की महत्वपूर्ण प्रणालियों में गिना जाता है। इसके साथ ही यूनानी चिकित्सा की भी देश में लंबी परंपरा रही है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अजमल खान तिब्बिया कॉलेज यूनानी चिकित्सा शिक्षा और अध्ययन से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। ऐसे संस्थान में आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुर्वेद विशेषज्ञ का व्याख्यान आयोजित होना अकादमिक संवाद के लिहाज से उल्लेखनीय रहा।

इस आयोजन में किसी एक चिकित्सा पद्धति को दूसरी से ऊपर रखने के बजाय अलग अलग प्रणालियों के बीच समझ विकसित करने की बात सामने आई। यही पहल कार्यक्रम को सामान्य जागरूकता कार्यक्रम से अलग बनाती है। विद्यार्थियों के लिए यह समझना जरूरी है कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्था में कई अलग प्रणालियां विकसित हुई हैं। इनकी अपनी अवधारणाएं, उपचार पद्धतियां और अध्ययन परंपराएं हैं।

आज स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में समेकित दृष्टिकोण को लेकर चर्चा बढ़ी है। ऐसे में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा जैसे पारंपरिक सिस्टम के बीच अकादमिक बातचीत का महत्व भी बढ़ता है। शोध, शिक्षा और ज्ञान के आदान प्रदान के स्तर पर ऐसे संवाद भविष्य में नए अवसर पैदा कर सकते हैं। हालांकि किसी भी चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता और उपयोगिता को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन और प्रमाण आधारित शोध की अपनी अहम भूमिका रहती है।

अजमल खान तिब्बिया कॉलेज का यह कार्यक्रम इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। यहां विश्व आयुर्वेद दिवस को केवल एक औपचारिक अवसर के रूप में नहीं मनाया गया। व्याख्यान, विद्यार्थियों की प्रतियोगिताएं और अकादमिक चर्चा इसके प्रमुख हिस्से रहे। इससे छात्रों को पारंपरिक चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं पर सोचने और अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिला।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आयोजित 11वां विश्व आयुर्वेद दिवस इस बात की ओर भी संकेत करता है कि चिकित्सा शिक्षा में संवाद का दायरा व्यापक हो सकता है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा की अपनी अलग पहचान है। फिर भी शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य से जुड़े कुछ व्यापक विषयों पर इनके बीच बातचीत संभव है। विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान ऐसे संवाद के लिए एक स्वाभाविक मंच उपलब्ध करा सकते हैं।

कार्यक्रम में शामिल वक्ताओं ने इसी अकादमिक दृष्टिकोण को आगे रखा। प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच सहयोग की बात कही। प्रोफेसर सौरभ नायक ने आयुर्वेद के सिद्धांतों और आधुनिक स्वास्थ्य संदर्भ पर व्याख्यान दिया। प्रोफेसर सैयदा आमेना नाज और प्रोफेसर बीडी खान ने कार्यक्रम की सराहना की। वहीं विद्यार्थियों ने निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताओं के जरिए अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

इस तरह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में मनाया गया विश्व आयुर्वेद दिवस शिक्षा, संवाद और पारंपरिक चिकित्सा की समझ पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को आयुर्वेद के बारे में जानने का अवसर दिया और साथ ही यूनानी तथा आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच अकादमिक बातचीत की संभावनाओं को सामने रखा। आयोजन का संदेश यही रहा कि चिकित्सा शिक्षा में ज्ञान का विस्तार संवाद और अध्ययन के जरिए किया जा सकता है।

AEO के लिए प्रमुख सवाल और जवाब

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विश्व आयुर्वेद दिवस कब मनाया गया?
अजमल खान तिब्बिया कॉलेज, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 24 सितंबर को 11वां विश्व आयुर्वेद दिवस अकादमिक और शैक्षणिक गतिविधियों के साथ मनाया गया।

AMU के अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया?
कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद की प्रासंगिकता पर चर्चा करना और आयुर्वेद, यूनानी तथा अन्य पारंपरिक और समेकित चिकित्सा प्रणालियों के बीच अकादमिक संवाद को बढ़ावा देना था।

विश्व आयुर्वेद दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन थे?
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज थे।

विश्व आयुर्वेद दिवस पर किसने व्याख्यान दिया?
जीवन ज्योति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ के कायचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सौरभ नायक ने आयुर्वेद के सिद्धांतों और भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता पर व्याख्यान दिया।

AMU में विश्व आयुर्वेद दिवस पर विद्यार्थियों के लिए क्या हुआ?
विद्यार्थियों के लिए निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार भी दिए गए।

अजमल खान तिब्बिया कॉलेज किस चिकित्सा पद्धति से जुड़ा है?
अजमल खान तिब्बिया कॉलेज एएमयू के फैकल्टी ऑफ यूनानी मेडिसिन से जुड़ा संस्थान है और यूनानी चिकित्सा शिक्षा तथा अध्ययन के लिए जाना जाता है।

कार्यक्रम का समन्वय किसने किया?
कार्यक्रम के समन्वयक प्रोफेसर फारूक अहमद डार थे। डॉ. अबीहा अहमद खान ने कार्यक्रम का संचालन किया और डॉ. आतिया समद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।