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Babri Masjid Case Faisla ‘मुसलमान एवं लोकतंत्र के साथ मजाक’

बाबरी मस्जिद विध्वंस पूर्व नियोजित व जघन्य अपराध था। न्यायालय आज विश्वसनीय नहीं है। मुस्लिम समुदाय एवं भारतीय लोकतंत्र के साथ एक और अन्याय। न्यायपालिका पर शर्म आती है।’ अयोध्या की बाबरी मस्जिद विध्वंस पर 28 वर्षों बाद आए फैसले पर यह एक नाराज़ व्यक्ति की प्रतिक्रिया है। सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद ढहाने के तमाम आरोपियों लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती आदि को बरी करने पर ऐसी प्रतिक्रियाओं से सोशल मीडिया का सभी प्लेटफॉर्म भरा पड़ा है। कोर्ट के इस निर्णय का कोई खुलकर तो कोई ढके-छिपे शब्दों में आलोचना कर रहा है। ऐसे लोगों में देश के कई चर्चित चेहरे भी हैं।
  बाबरी मस्जिद ढहाने के  सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया गया। इन आरोपियों में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह आदि शामिल हैं। इस मामले में कुल 49 लोग आरोपी थे, जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है। बाबरी मस्जिद ढहाने को लेकर 351 लोगों की गवाही हुई, पर कोर्ट ने तमाम आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उनके खिलाफ पेश किए गए सबूत में दम नहीं। सीबीआई सबूत जुटाने में विफल रही।

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 बता दें कि अध्योया की बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर 1992 को बीजेपी एवं हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ढहा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के बाद अब उस जगह राम मंदिर बनाई जा रही है। मस्जिद गिराए जाने के बाद तबकी बीजेपी शासित यूपी, एमपी एवं राजस्थान की राज्य सरकारें बर्खास्त कर दी गई थीं। सीबीआई अदालत ने  फैसला सुनाते हुए माना कि मस्जिद पूर्व नियोजित तरीके से नहीं गिराई गई। मौके पर मौजूद नेताओं ने कारसेवकों से संयमित व्यवहार बरतने की अपील की थे। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि सीबीआई की विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को कपोलकल्पित करार दिया। फैसला आने के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, लालकृष्ण आडवाणी के घर उनसे मिलने पहुंचे। आडवाणी अदालत की कार्रवाई में ऑनलाइन मौजूद थे। सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को मुरली मनोहर जोशी ने ऐतिहासिक बताया। अदालत के फैसले की मुखालफत करने वालों से इतर जोशी ने कहा कि इससे देश की न्याय व्यवस्था में भरोसा और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी तरह खारिज हुई हैं जिसके बारे में वो पहले भी कहा करते थे। फैसले पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष की तरफ से जो दलील पेश की गई उसमें मेरिट नहीं थी। साक्ष्य भी दोष पूर्ण थे। इस आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। अदालत ने माना की श्रद्धालुओं को कारसेवक मानना सही नहीं। सबसे बड़ी बात यह कि जिन लोगों ने ढाँचा तोड़ा उनमें और आरोपियों के बीच किसी तरह की सीधा संबंध स्थापित नहीं हो सका। फैसला देते हुए जज एस के यादव ने कहा कि बाबरी विध्वंस केस पूर्व नियोजित नहीं था। सिर्फ फोटो दिखाना साक्ष्य नहीं। अभियोजन पक्ष की दलीलें कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं। जज ने कहा कि सीबीआई की तरफ से जांच को जिन बिंदुओं पर केंद्रित किया गया वो अपने आप में दोष पूर्ण था। अदालत ने  आडवाणी, जोशी समेत छह आरोपियों को अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट दी हुई थी। वे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालती कार्यवाही में शामिल हुए।
2500 पन्नों की चार्जशीट में कुल 351 गवाह थे। बाबरी मस्जिद पर हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोगोई सेवानिवृत्त हो गए थे। आज वह बीजेपी के राज्यसभा सदस्य हैं। इसी तरह बाबरी मस्जिद विध्वंस पर फैसला सुनाने के बाद सीबीआई के स्पेशल कोर्ट के जज भी सेवानिवृत्त हो गए।

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संपादक