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बांग्लादेश चुनाव 2026: सत्ता पर जमात का जोर, भारत की चिंताएं बढ़ीं

बांग्लादेश की राजनीतिक फिज़ा में एक नई हलचल देखने को मिली है, क्योंकि चुनाव से पहले 11 पार्टियों के बीच हुए सीट बंटवारे में भारत विरोधी जमात को कई महत्वपूर्ण सीटें मिली हैं। यह स्थिति न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति के लिए बल्कि भारत के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल में जमात को पीछे धकेल कर रखा गया था और उसे सत्ता में आने से रोका गया था। लेकिन अब यह संगठन अचानक सक्रिय होकर राजनीतिक मंच पर अपनी पैठ बना रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जमात सत्ता में आती है, तो भारत के लिए यह असंभव होगा कि वह जमात के साथ तालमेल बैठा सके। विशेष रूप से, भारत ने जाकिर नायक को आतंकी और भगोड़ा घोषित किया है, और अगर जमात सत्ता में आती है, तो उनकी आवाजाही और गतिविधियों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

गुरुवार (15 जनवरी) को राजधानी ढाका में डिप्लोमा इंजीनियर्स इंस्टीट्यूट में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे की घोषणा की। इस अवसर पर जमात के नायब अमीर सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर ने सीट समझौते की रूपरेखा साझा की।

गठबंधन के अनुसार सीटों का बंटवारा इस प्रकार हुआ:

  • बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी: 179 सीटें
  • नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी): 30 सीटें
  • बांग्लादेश खेलाफत मजलिस: 20 सीटें
  • खेलाफत मजलिस: 10 सीटें
  • लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी): 7 सीटें
  • अमर बांग्लादेश पार्टी (एबी पार्टी): 3 सीटें
  • बांग्लादेश निजम-ए-इस्लाम पार्टी: 2 सीटें
  • बांग्लादेश डेवलपमेंट पार्टी: 2 सीटें

इसके अतिरिक्त, जातीय गणतंत्र पार्टी (JAGPA) और बांग्लादेश खिलाफत आंदोलन के लिए सीटों का निर्धारण अभी बाकी है। इस्लामिक मूवमेंट ऑफ बांग्लादेश के लिए भी सीटों के बंटवारे का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कुल मिलाकर 50 सीटें अभी खाली हैं और उनका बंटवारा शेष पार्टियों के साथ अंतिम समझौते के बाद किया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत बांग्लादेश खेलाफत मजलिस के अमीर मौलाना मामुनुल हक के प्रारंभिक भाषण से हुई, जिसका संचालन सहायक महासचिव और 11 पार्टियों के समन्वयक हमिदुर रहमान आज़ाद ने किया। इस अवसर पर जमात के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान, नायब अमीर सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर, एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम, एलडीपी के ओली अहमद, खिलाफत मजलिस के महासचिव अहमद अब्दुल कादिर, एबी पार्टी अध्यक्ष मुजीबुर रहमान मंजू, और गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर ने अपने भाषण में जोर देकर कहा,
“यह चुनाव पिछले चुनावों जैसा नहीं है। यह हमारे अस्तित्व को बचाने का चुनाव है। यह जुलाई क्रांति को बचाने और फासीवाद के खिलाफ संघर्ष का चुनाव है। हमारा उद्देश्य एक ‘नए बांग्लादेश’ का निर्माण करना है, जो सुधारों और वांछित बदलावों का प्रतीक बने।”

उन्होंने आगे कहा,
“बांग्लादेश के चुनावी इतिहास में यह पहली बार है कि इतनी विभिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियां एक साथ आकर इतना बड़ा गठबंधन बना रही हैं। इस गठबंधन में शामिल हर सीट पर केवल एक ही उम्मीदवार होगा। हम ‘वन बॉक्स पॉलिसी’ के तहत आगे बढ़ेंगे और सभी पार्टियों ने इसमें सहमति दी है।”

सैयद अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ क्षेत्रों में अभी भी सीटों के बंटवारे में छोटी-मोटी असहमति है, लेकिन उन्हें जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा,
“शेष 47 सीटों के लिए हम अपने सहयोगियों के साथ आम सहमति के आधार पर निर्णय लेंगे। विशेष रूप से यदि इस्लामिक मूवमेंट बांग्लादेश हमारे साथ जुड़ा रहता है, तो उनके लिए सीटें आवंटित की जाएंगी।”

विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह गठबंधन बांग्लादेश में राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। जमात और उसके सहयोगी दलों की सक्रियता भारत के लिए चिंताजनक साबित हो सकती है, क्योंकि इनके सत्ता में आने की स्थिति में भारत विरोधी नीतियों और संभावित आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखना कठिन हो जाएगा।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह गठबंधन न केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा है, बल्कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के महत्वाकांक्षी प्रयास का संकेत भी देता है। आने वाले महीनों में बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश की आगामी चुनावी लड़ाई अब सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि विचारधाराओं, राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय रणनीतियों के लिए भी निर्णायक होगी।