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बीजेपी सरकार बनी तो लागू हो सकता है यूसीसी, संकल्प पत्र में विशेष जोर

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

जो लोग यह समझ रहे थे कि राम मंदिर, अनुच्छेद 370 हटाने, सीएए, तीन तलाक जैसे मुद्दों पूरे होने के बाद भारतीय जनता पार्टी का ‘मुस्लिम विरोधी’ एजेंडा खत्म हो चुका है, उन्हें यह जानकर मायूसी होगी कि आने वाले दिनों में समान नागरिकता कानून यानी यूसीसी लाल कर शरिया कानून को कमजोर किया जा सकता है.

भारतीय जनता पार्टी पिछले दो लोकसभा चुनावों में कामयाबी के बाद से राम मंदिर, सीएए, तीन तलाक, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसे अपने कोर एजेंडे को अमली जामा पहनाने में लगी है.

रविवार को बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए ‘ मोदी की गारंटी 2024’ के नाम से संकल्प पत्र जारी किया है, जिसमें पहले दस सालों की मोदी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र है. इसमें तीन तलाक, राम मंदिर, सीएए और अनुच्छेद 370 हटाने का भी विशेष तौर से उल्लेख किया गया है.

69 पेज के इस संकल्प पत्र में पेज नंबर 54 पर यूसीसी का विशेष तौर से उल्लेख किया गया है और इसमें अगली बार बीजेपी की सरकार बनने पर इसे लोगू करने के संकेत दिए गए हैं. हालांकि यूसीसी के नाम पर उत्तराखंड ने हाल में यह कानून बनाया है, जिसके बारे में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में सरकार आने के बाद इस कानून को निरस्त करने का वादा किया  है.

बीजेपी के कारे एजेंडे में जनसंख्या नियंत्रण और यूसीसी मुख्य तौर पर रहा है. पिछले दस सालों की सरकार में प्रधानमंत्री मोदी ने शादी के नियम में बदलाव लाकर जनसंख्या नियंत्रण की कोशिश की है. इसके इतर माना जा रहा है कि बीजेपी की तीसरी बार सरकार बनने पर यूसीसी के नाम पर शरिया कानून पर बड़ा हमला हो सकता है.

इसमें पर्सनल लाॅ बोर्ड के वजूद को भी खतरा पहुंच सकता है और मदरसा शिक्षा के स्वरूप में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. इसके अलावा गोद लेने, जायदाद में हिस्सेदारी आदि के शरिया कानून को भी निष्प्रभावी बनाने की कोशिश की जा सकती है. उत्तराखंड के यूसीसी कानून में भी इस पर्सनल लाॅ को खत्म कर दिया है. जाहिर है केंद्र का दायरा इस मामले में व्यापक होने वाला है.