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सरहद पर गोलीबारी: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, इस्लामाबाद/काबुल।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव भड़क उठा है। मंगलवार को दोनों देशों की सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी का आदान-प्रदान हुआ, जिससे सीमावर्ती इलाकों में दहशत फैल गई। फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, झड़प कुछ देर चली, लेकिन बाद में हालात “अस्थायी रूप से काबू” में आने की पुष्टि दोनों पक्षों ने की।

किसने पहले गोली चलाई?

अफगान प्रांत नंगरहार के सूचना निदेशक ज़बीहुल्लाह नूरानी ने दावा किया कि “पहले फायरिंग पाकिस्तान की ओर से हुई, जिसके जवाब में अफगान सीमा बलों ने कार्रवाई की।” उन्होंने कहा कि अफगान पक्ष में किसी जानी नुकसान की सूचना नहीं है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अफगान बलों ने “बिना उकसावे” गोलीबारी की, जिसका पाकिस्तानी सेना ने “प्रभावी जवाब” दिया। पिशावर से एक सुरक्षा अधिकारी ने भी कहा कि पाकिस्तान की ओर कोई हताहत नहीं हुआ।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही कई जगहों पर बाधित है।


हालिया हवाई हमले और बढ़ता विवाद

तनाव की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान द्वारा हाल में अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तीका प्रांतों में की गई हवाई कार्रवाई शामिल है। पाकिस्तान का दावा है कि यह ऑपरेशन “खुफिया सूचनाओं” के आधार पर उन आतंकी ठिकानों के खिलाफ था, जहां से पाकिस्तानी तालिबान (टीटीपी) और उसके सहयोगी समूह गतिविधियां चला रहे थे।

इस संदर्भ में पाकिस्तान ने कहा कि उसने सीमा क्षेत्र में सात आतंकी शिविरों और ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें 80 से अधिक उग्रवादियों के मारे जाने का दावा किया गया है।

हालांकि, अफगान पक्ष ने आरोप लगाया कि इन हमलों में “महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों नागरिक” मारे गए। नंगरहार के बेहसूद इलाके में एएफपी के एक पत्रकार ने मलबे के बीच स्थानीय लोगों को बुलडोज़र से खोजबीन करते देखा। एक अफगान सुरक्षा सूत्र के मुताबिक, एक घर पर हमले में 17 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 बच्चे शामिल थे।


पाकिस्तान का पक्ष: ‘खुफिया आधारित सटीक कार्रवाई’

पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि हालिया आत्मघाती हमलों—जिनमें इस्लामाबाद, बाजौर और बनूं की घटनाएं शामिल हैं—के पीछे “अफगान सरजमीं पर मौजूद नेतृत्व और हैंडलर्स” का हाथ है।

बनूं में हुए एक आत्मघाती हमले में पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल और एक जवान की मौत हुई। सेना के मीडिया विंग आईएसपीआर के अनुसार, एक अन्य ऑपरेशन में पांच उग्रवादियों को मार गिराया गया।

पाकिस्तान ने दोहराया कि उसने बार-बार अफगान तालिबान प्रशासन से कहा कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए न होने दे, लेकिन “कोई ठोस और सत्यापन योग्य कार्रवाई” नहीं की गई।


अफगान प्रतिक्रिया: ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

अफगान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया पर कहा कि पाकिस्तान ने नंगरहार और पक्तीका में हमले कर “अफगान संप्रभुता का उल्लंघन” किया है। अफगान रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी कि वह इन हमलों का “मुनासिब और नपा-तुला जवाब” देगा।

अफगान पक्ष का कहना है कि नागरिक हताहतों की संख्या पाकिस्तान के दावों से कहीं अधिक है। यह आरोप-प्रत्यारोप दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा कर रहा है।


राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी का सख्त संदेश

पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari ने कहा है कि “सरहद पार आतंकवाद के खिलाफ अब सहनशीलता की सीमा खत्म हो चुकी है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के कदम अपने नागरिकों की रक्षा के मूल अधिकार पर आधारित हैं और कई चेतावनियों के बाद उठाए गए हैं।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि विभिन्न आतंकी समूह—जिनमें टीटीपी, आईएसआईएल-खुरासान, अल-कायदा और अन्य शामिल हैं—अफगानिस्तान में सक्रिय हैं, जो पड़ोसी देशों के लिए गंभीर खतरा हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी याद दिलाया कि दोहा समझौते के तहत अफगान तालिबान ने वादा किया था कि अफगान भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होगा।


बंद सीमाएं और बिगड़ते रिश्ते

पिछले कुछ महीनों में सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। अक्टूबर में हुई खूनी मुठभेड़ों के बाद कई जमीनी मार्ग अब भी बंद पड़े हैं, जिससे व्यापार और आवागमन प्रभावित हुआ है।

पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान अपनी भूमि पर सक्रिय समूहों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि तालिबान प्रशासन इन आरोपों से इनकार करता है।

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बढ़ती उग्रवादी गतिविधियों ने पाकिस्तान की चिंता और बढ़ा दी है। सुरक्षा बलों और सरकारी अधिकारियों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।


क्षेत्रीय स्थिरता पर असर

विश्लेषकों का मानना है कि यह ताजा तनाव केवल द्विपक्षीय संबंधों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की स्थिरता पर असर डाल सकता है। दोनों देश परमाणु क्षमता वाले क्षेत्र में स्थित हैं और उनके बीच किसी भी बड़े टकराव का व्यापक भू-राजनीतिक प्रभाव हो सकता है।

हालात ऐसे मोड़ पर हैं जहां कूटनीति की भूमिका निर्णायक हो सकती है। दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से शांति और स्थिरता की बात की है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं।


आगे का रास्ता

पाकिस्तान ने कहा है कि वह क्षेत्र में शांति और सहयोग चाहता है, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अफगानिस्तान ने भी संकेत दिया है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा।

अब सवाल यह है कि क्या दोनों देश संवाद के जरिए समाधान खोजेंगे, या सीमा पर बार-बार की झड़पें बड़े संघर्ष की भूमिका बनेंगी।

फिलहाल, सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और दोनों देशों के नागरिक अनिश्चितता की स्थिति में हैं। सरहद पर गूंजती गोलियों की आवाजें केवल सैन्य टकराव का संकेत नहीं, बल्कि एक जटिल राजनीतिक और सुरक्षा संकट की प्रतीक बन चुकी हैं।