सीआईओ साइंस ओलंपियाड : 30 हजार छात्रों की भागीदारी, संख्या 50 हजार पहुंचने की उम्मीद
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नई दिल्ली।
चिल्ड्रन इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन (सीआईओ) की ओर से पहली बार आयोजित राष्ट्रीय स्तर के साइंस ओलंपियाड में अब तक 30 हजार से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया है। देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित इस विज्ञान प्रतियोगिता में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में अलग अलग समुदायों के बच्चों की भागीदारी भी देखने को मिली। आयोजकों को उम्मीद है कि बाकी राज्यों में परीक्षा पूरी होने के बाद प्रतिभागियों की कुल संख्या 50 हजार तक पहुंच सकती है।
सीआईओ की यह पहल स्कूली बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और उनकी शैक्षणिक प्रतिभा को सामने लाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके माध्यम से बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से सोचने, सवाल पूछने, चीजों का निरीक्षण करने और समस्याओं का विश्लेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि विज्ञान की शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बच्चों को अपने आसपास की दुनिया, प्रकृति और पर्यावरण को समझने का अवसर भी मिलना चाहिए।

पहली बार कई राज्यों में आयोजित हुआ साइंस ओलंपियाड
चिल्ड्रन इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन का साइंस ओलंपियाड इस बार पहली बार विभिन्न राज्यों में आयोजित किया गया। प्रतियोगिता में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य अलग अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को अपनी वैज्ञानिक समझ और ज्ञान का आकलन करने का अवसर देना है।
स्कूल स्तर पर विज्ञान की पढ़ाई अक्सर पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सिमट जाती है। ऐसे में विज्ञान ओलंपियाड जैसी प्रतियोगिताएं बच्चों को विषय को नए नजरिए से समझने में मदद कर सकती हैं। इससे विद्यार्थियों को अपनी तैयारी परखने, अपनी कमजोरियों को पहचानने और आगे बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।
इस प्रतियोगिता में विभिन्न समुदायों के विद्यार्थियों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। इससे बच्चों को साझा शैक्षणिक मंच मिला, जहां उनकी पहचान से अधिक उनकी मेहनत, ज्ञान और प्रतिभा को महत्व दिया गया।
कक्षा के अनुसार तैयार किए गए प्रश्नपत्र
सीआईओ साइंस ओलंपियाड में विद्यार्थियों की कक्षा और शैक्षणिक स्तर को ध्यान में रखकर प्रश्नपत्र तैयार किए गए। सातवीं और आठवीं कक्षा के प्रश्नपत्र राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी के विज्ञान पाठ्यक्रम पर आधारित थे। वहीं, छठी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण विज्ञान को आधार बनाया गया।
प्रश्नपत्र तैयार करते समय बच्चों की उम्र और उनकी पढ़ाई के स्तर को ध्यान में रखने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के ज्ञान के साथ उनकी समझ और सोचने की क्षमता का आकलन करना था।
परीक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए। बहुभाषी व्यवस्था से अलग अलग राज्यों के विद्यार्थियों को अपनी समझ के अनुसार परीक्षा देने का अवसर मिला। इससे भाषा की कठिनाई कम करने और प्रतियोगिता में अधिक बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
भारत जैसे बहुभाषी देश में शिक्षा से जुड़ी प्रतियोगिताओं के लिए यह व्यवस्था खास महत्व रखती है। कई बार विद्यार्थी किसी विषय को अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन भाषा की परेशानी के कारण परीक्षा में अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पाते। क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा की सुविधा ऐसे विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
परीक्षा केंद्रों का दौरा कर अधिकारियों ने बढ़ाया बच्चों का हौसला
साइंस ओलंपियाड के आयोजन और परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद तथा चिल्ड्रन इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन के कई अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों में परीक्षा केंद्रों का दौरा किया। इन दौरों का उद्देश्य परीक्षा के संचालन का जायजा लेना और विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाना था।
दौरा करने वालों में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष और बाल विभाग के पर्यवेक्षक एस. अमीनुल हसन के अलावा विभिन्न सर्कल के नेता, सीआईओ के पदाधिकारी और अन्य जिम्मेदार लोग शामिल थे। अधिकारियों ने दिल्ली, बेंगलुरु, नांदेड़, गुजरात, पंजाब और आंध्र प्रदेश के परीक्षा केंद्रों का दौरा किया।
परीक्षा केंद्रों पर अधिकारियों की मौजूदगी से आयोजन से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन मिला। इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रमों में परीक्षा की व्यवस्था, विद्यार्थियों के लिए अनुकूल माहौल और विभिन्न स्तरों पर समन्वय महत्वपूर्ण होता है। कई राज्यों में एक साथ प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए स्थानीय टीमों, केंद्रों और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल भी जरूरी है।
एस. अमीनुल हसन ने आयोजकों को दी बधाई
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष एस. अमीनुल हसन ने साइंस ओलंपियाड के आयोजन को सफल बनाने के लिए संयोजक आयशा अल्वी और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं है। इसके पीछे विभिन्न राज्य इकाइयों और टीम के सदस्यों की सामूहिक मेहनत है।
उनके अनुसार, अलग अलग क्षेत्रों में इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए योजना, समन्वय और लगातार प्रयास की जरूरत होती है। आयोजन से जुड़े लोगों ने बच्चों तक पहुंचने और उन्हें प्रतियोगिता में शामिल करने के लिए काम किया।
इस पहल को स्थानीय मीडिया, टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया पर भी जगह मिली। इससे प्रतियोगिता के बारे में अधिक लोगों को जानकारी मिली और बच्चों की विज्ञान संबंधी गतिविधियों पर ध्यान गया।
अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका मानना है कि ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों में विज्ञान के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने के साथ उनकी शैक्षणिक क्षमता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को मजबूत कर सकती हैं। विद्यार्थियों को अपनी कक्षा से आगे सीखने और नए विषयों को समझने की प्रेरणा भी मिल सकती है।

छह राज्यों में परीक्षा होना अभी बाकी
सीआईओ साइंस ओलंपियाड के आयोजन से जुड़े सैयद तनवीर अहमद ने इस कार्यक्रम में सहयोग देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. खान मुबश्शिरा फिरदौस, केंद्रीय समिति के सदस्यों, राज्य सीआईओ सचिवों, मार्गदर्शकों और अन्य जिम्मेदार लोगों का धन्यवाद किया।
डॉ. खान मुबश्शिरा फिरदौस को राष्ट्रीय सहायक सचिव, डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक्स के रूप में उल्लेखित किया गया। आयोजकों ने प्रतियोगिता के संचालन में विभिन्न स्तरों पर सहयोग देने वाले सभी लोगों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
सैयद तनवीर अहमद के अनुसार, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में साइंस ओलंपियाड की परीक्षाएं अभी आयोजित होना बाकी हैं। इन राज्यों में परीक्षा पूरी होने के बाद प्रतिभागियों की कुल संख्या 50 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है।
यदि यह अनुमान पूरा होता है, तो प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों की संख्या शुरुआती चरण के 30 हजार से काफी बढ़ जाएगी। इससे विभिन्न राज्यों में स्कूली बच्चों के बीच विज्ञान आधारित शैक्षणिक गतिविधियों की पहुंच का भी पता चलेगा।
हालांकि, अंतिम प्रतिभागी संख्या बाकी राज्यों में परीक्षा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल आयोजकों की प्राथमिकता शेष परीक्षा केंद्रों पर प्रतियोगिता का संचालन पूरा करना और अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक इस पहल को पहुंचाना है।
विज्ञान शिक्षा और पर्यावरण जागरूकता पर जोर
सीआईओ साइंस ओलंपियाड का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं है। इसके जरिए बच्चों को विज्ञान के व्यावहारिक महत्व से परिचित कराने पर भी जोर दिया गया है। प्रतियोगिता के उद्देश्यों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना, प्रकृति का निरीक्षण करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना शामिल है।
बच्चों के लिए प्रकृति को समझना विज्ञान सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी, हवा, मिट्टी, पौधों और आसपास के प्राकृतिक संसाधनों के बारे में सवाल पूछने से उनमें जिज्ञासा पैदा होती है। यही जिज्ञासा आगे चलकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद कर सकती है।
पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सही इस्तेमाल की समझ भी कम उम्र से विकसित करना जरूरी है। यदि विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन में पानी बचाने, स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने जैसे विषयों को समझते हैं, तो शिक्षा का प्रभाव कक्षा से बाहर भी दिखाई दे सकता है।
सीआईओ की राज्य इकाइयों ने स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस सहयोग से स्थानीय स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचने और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था करने में मदद मिली।
शैक्षणिक अवसर बढ़ाने की दिशा में पहल
चिल्ड्रन इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन का साइंस ओलंपियाड स्कूली शिक्षा में विज्ञान आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की एक पहल है। इसके जरिए विद्यार्थियों को अपनी क्षमता पहचानने, ज्ञान बढ़ाने और प्रतियोगी माहौल में सीखने का अवसर मिला है।
इस कार्यक्रम की आगे की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि विद्यार्थियों को प्रतियोगिता के बाद किस तरह सीखने के अतिरिक्त अवसर दिए जाते हैं। विज्ञान संबंधी कार्यशालाएं, प्रयोग आधारित गतिविधियां और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रम बच्चों की रुचि को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
फिलहाल, 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी इस आयोजन का अहम पहलू है। छह राज्यों में परीक्षाएं बाकी हैं और आयोजकों को कुल संख्या 50 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल किस तरह अधिक स्कूलों और विद्यार्थियों तक पहुंचती है और विज्ञान शिक्षा को लेकर बच्चों की रुचि बढ़ाने में कितनी प्रभावी साबित होती है।
सीआईओ साइंस ओलंपियाड ने विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों को एक साझा मंच देने की कोशिश की है। इसका व्यापक उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा पैदा करना है।
प्रश्न और उत्तर
1. सीआईओ साइंस ओलंपियाड 2026 में कितने छात्रों ने हिस्सा लिया?
अब तक 30 हजार से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया है। बाकी राज्यों में परीक्षा पूरी होने के बाद संख्या 50 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है।
2. सीआईओ साइंस ओलंपियाड किन कक्षाओं के लिए आयोजित किया गया?
यह प्रतियोगिता छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई।
3. किन राज्यों में साइंस ओलंपियाड की परीक्षा बाकी है?
आयोजकों के अनुसार, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में परीक्षाएं होना बाकी हैं।
4. साइंस ओलंपियाड आयोजित करने का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना, वैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

