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गुजरात के शिया मौलाना हसनअली रजानी का विवादित बयान, ईरान पर निशाना साधते हुए मुहर्रम की कुर्बानी पर कही यह बात

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अहमदाबाद

गुजरात के शिया मौलाना हसनअली रजानी अपने एक नए बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। मौलाना रजानी को अमेरिका और इजरायल समर्थक माना जाता है। उनके विरोधियों का कहना है कि वह ईरान के प्रति नफरत में इस कदर डूबे हैं कि सुर्खियों में बने रहने के लिए किसी भी बात को किसी भी संदर्भ से जोड़ देते हैं। हालांकि जमीन पर उनके अनुयायियों की संख्या बहुत कम है, लेकिन उनके तीखे और उल्टे-सीधे बयानों के कारण वह अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं। इस बार उन्होंने मुहर्रम के पवित्र महीने और इमाम हुसैन की कुर्बानी को सीधे तौर पर ईरान की राजनीति से जोड़ दिया है, जिससे मुस्लिम समुदाय के भीतर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

मुहर्रम की कुर्बानी और ईरान की राजनीति पर हमला

मौलाना हसनअली रजानी ने मुहर्रम को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला बयान जारी किया है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने नमाज़ और रोज़े को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने अपने साथ-साथ अपने पूरे परिवार और रिश्तेदारों की कुर्बानी इस्लाम के सिद्धांतों की रक्षा के लिए दी थी। इसके बाद मौलाना ने सीधे ईरान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने ईरान की तरह पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ाने के लिए अपनी और अपने करीबियों की कुर्बानी नहीं दी थी।

मौलाना रजानी ने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि ईरान की मौजूदा जंग सिर्फ पेट्रोल और डीज़ल के दामों को बढ़ाने के स्वार्थ से प्रेरित है। उनका दावा है कि ईरान अपने राजनीतिक और आर्थिक फायदों के लिए न केवल इस्लाम का इस्तेमाल कर रहा है बल्कि पूरी दुनिया के मुसलमानों का नाम भी बदनाम कर रहा है। उन्होंने ईरान के समर्थकों पर पाखंडी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को इमाम हुसैन की महान कुर्बानी से जोड़ना सीधे तौर पर इस्लाम और आम मुसलमानों की बेइज्जती करने जैसा है।

ईरान समर्थकों पर साधा तीखा तंज

अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए मौलाना रजानी ने ईरान के अंतरराष्ट्रीय समर्थकों पर भी जमकर तंज कसा। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई देश आधी रात को फोन पर ईरान से यह वादा कर दे कि वह उन्हें दाल, आटा, सब्जी, आलू, बैंगन, आम या अमरूद जैसी बुनियादी चीजें मुफ्त या कम दामों में देगा, तो नजारा देखने लायक होगा। उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में पूरी दुनिया में ईरान का साथ देने वाले जितने भी शिया हैं, वे पूरी रात जागेंगे। वे उस मददगार देश के गुणगान में कसीदे पढ़ेंगे। इतना ही नहीं, वे अपनी रोजमर्रा की नमाज़ों और दुआओं में भी उस देश का नाम शामिल कर लेंगे। मौलाना का इशारा साफ था कि ईरान और उसके समर्थकों की निष्ठाएं केवल भौतिक और आर्थिक लाभों पर टिकी हैं।

मौलवियों के चरित्र पर उठाए गंभीर सवाल

बयान का सबसे ज्यादा विवादित और हैरान करने वाला हिस्सा वह था जिसमें मौलाना रजानी ने मुहर्रम के दौरान आने वाले मौलवियों के चरित्र पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने एक बेहद अजीब मांग सामने रख दी। मौलाना ने कहा कि मुहर्रम के पवित्र महीने में मजलिस पढ़ने आने वाले किसी भी मौलवी को रात के समय अपने खूबसूरत या हैंडसम बेटे के साथ सोने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी गैर-महरम लड़के यानी जिसके साथ खून का रिश्ता न हो, उसे भी रात में किसी मौलवी के पास अकेले नहीं भेजा जाना चाहिए।

अपनी इस अजीबोगरीब मांग के पीछे मौलाना रजानी ने अपने साथ घटी एक कथित पुरानी घटना का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल बैंगलोर में उनके साथ एक ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई थी। मुहर्रम के दस दिनों के कार्यक्रम के दौरान उन्हें इराक से आए एक विदेशी मौलवी के साथ एक ही कमरे में सोने के लिए मजबूर किया गया था। मौलाना ने खुलकर कहा कि वह विदेशी मौलवी दिखने में बेहद हैंडसम था। हालांकि, मौलाना रजानी ने खुद को साफ-सुथरे चरित्र का बताते हुए कहा कि उनका चरित्र बुरा नहीं था, इसलिए उनका उस इराकी मौलवी के साथ पूरे दस दिनों तक लगातार झगड़ा होता रहा।

जानवरों की सुरक्षा को लेकर अजीब मांग

इस कथित घटना का जिक्र करते हुए मौलाना रजानी ने भारत के सभी जिम्मेदार नागरिकों और शिया समुदाय के प्रबंधकों से एक बेहद अजीब अपील की है। उन्होंने कहा कि देश के जिम्मेदार लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी मौलवी के पास किसी इंसान की तो बात ही छोड़िए, बकरी, भैंस या गधे जैसे बेजुबान जानवरों को भी अकेला न छोड़ा जाए। मौलाना ने आशंका जताई कि बाहर से आने वाले ऐसे मौलवियों से इन जानवरों के साथ भी गलत काम या अप्राकृतिक कृत्य करने का बड़ा खतरा बना रहता है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में उनकी जमकर आलोचना हो रही है। लोग इसे शिया समुदाय के धर्मगुरुओं की छवि खराब करने की एक सोची-समझी कोशिश मान रहे हैं।

समुदाय के भीतर बढ़ता आक्रोश

मौलाना हसनअली रजानी के इस बयान के सामने आने के बाद गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में शिया समुदाय के लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौलाना रजानी अक्सर इस तरह के भड़काऊ बयान केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए देते हैं। उनके बयानों का हकीकत से या समुदाय की आम सोच से कोई लेना-देवा नहीं होता है। अहमदाबाद के कई स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है कि मुहर्रम जैसे पवित्र और गम के महीने में इस तरह की अभद्र बातें करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। फिलहाल इस मामले को लेकर शिया समाज के भीतर बहस छिड़ गई है और कई लोग मौलाना के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं।

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