सऊदी अरब में खजूर की खेती: विरासत बचाने की अनूठी कोशिश
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो
सऊदी अरब में खजूर केवल एक फल नहीं है। यह वहां की संस्कृति, खानपान, मेहमाननवाजी और पारिवारिक परंपराओं का अहम हिस्सा है। रमजान हो या रोजमर्रा की जिंदगी, सऊदी परिवारों की मेज पर खजूर की मौजूदगी आम बात है। मेहमानों के सामने सऊदी कॉफी के साथ खजूर परोसना वहां की पुरानी परंपरा है। यही वजह है कि खजूर की खेती को केवल कृषि व्यवसाय के रूप में नहीं देखा जाता। इसके साथ पीढ़ियों का अनुभव, पारिवारिक यादें और सांस्कृतिक पहचान भी जुड़ी हुई है।
सऊदी अरब के जेद्दा से सामने आई एक दिलचस्प रिपोर्ट बताती है कि देश के विभिन्न खजूर उत्पादक इलाकों में फसल कटाई का मौसम किसानों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। इस दौरान खेतों में गतिविधियां बढ़ जाती हैं। किसान खजूर के पकने पर नजर रखते हैं। सही समय पर फल तोड़ने से लेकर उनकी छंटाई, भंडारण और बाजार तक पहुंचाने का काम शुरू होता है।
आधुनिक तकनीक ने खजूर उत्पादन और कारोबार के तरीके बदल दिए हैं। सिंचाई, पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच और विपणन में नए साधनों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके बावजूद किसानों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाली खजूर तैयार करने का असली हुनर आज भी पारिवारिक अनुभव और पीढ़ियों से मिले ज्ञान पर निर्भर है।

पांच पीढ़ियों से जारी है खजूर की खेती
मदीना क्षेत्र में खजूर की खेती से जुड़े फहद अल रद्दादी इस परंपरा को अपनी पारिवारिक पहचान मानते हैं। वह नकवत अल नाना फार्म्स कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उनका कहना है कि खजूर सऊदी नागरिकों की पहचान का हिस्सा है। खासकर मदीना में इसका सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है।
फहद बताते हैं कि उनका परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से खजूर की खेती कर रहा है। बचपन में वह गर्मियों की छुट्टियों में अपने दादा और पिता के साथ खेतों में जाया करते थे। वहां खजूर तोड़ने, पेड़ों की सफाई करने, सूखी पत्तियां हटाने और अगले मौसम के लिए बाग तैयार करने जैसे काम सीखते थे।
उनके लिए यह केवल खेती का काम नहीं था। यह परिवार के बुजुर्गों के साथ समय बिताने और उनसे पारंपरिक ज्ञान हासिल करने का माध्यम भी था।
फहद के मुताबिक, फसल कटाई के बाद खेत की देखभाल बेहद जरूरी होती है। यदि किसान इस काम में जल्दबाजी करते हैं या जरूरी प्रक्रियाओं को छोड़ देते हैं तो अगले साल उत्पादन और खजूर की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
खजूर की खेती सालभर की जिम्मेदारी
आमतौर पर लोग खजूर की खेती को फल पकने और फसल तोड़ने तक सीमित समझते हैं। लेकिन वास्तव में यह पूरे साल चलने वाली प्रक्रिया है। फसल कटने के बाद ही अगले मौसम की तैयारी शुरू हो जाती है।
किसान खजूर के पेड़ों की सिंचाई करते हैं। उनकी छंटाई की जाती है और जैविक खाद का इस्तेमाल होता है। इसके बाद फूल आने का समय आता है। यह खेती का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।
इस दौरान किसानों को फूलों के गुच्छों की विशेष देखभाल करनी पड़ती है। उन्हें सही समय पर खोलना और परागण की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है। मौसम और पानी की उपलब्धता पर भी लगातार नजर रखनी पड़ती है। थोड़ी सी लापरवाही उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
परागण के बाद खजूर के गुच्छों में फलों की संख्या और उनकी बढ़त को नियंत्रित करने का काम होता है। इस पारंपरिक प्रक्रिया को सरबाना कहा जाता है। इसमें छोटे और कमजोर फलों को हटा दिया जाता है, ताकि बाकी खजूर को पर्याप्त जगह और पोषण मिल सके।
फहद अल रद्दादी बताते हैं कि यदि किसान बड़े आकार और बेहतर गुणवत्ता वाली खजूर चाहते हैं तो उन्हें शुरुआत में ही छोटे फलों को अलग करना पड़ता है। वहीं, अधिक मात्रा में उत्पादन करने के लिए गुच्छों में अधिक फल छोड़े जा सकते हैं।

हर खजूर को तोड़ने का तरीका अलग
खजूर की खेती में अनुभव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि सभी किस्मों को एक ही तरीके से नहीं तोड़ा जा सकता। कुछ किस्मों को पूरे गुच्छे के रूप में काटा जाता है, जबकि कुछ को एक एक करके तोड़ा जाता है।
कुछ खजूर पूरी तरह पकने के बाद ही बाजार में भेजी जाती हैं। वहीं कुछ किस्मों को पहले तोड़ लिया जाता है और बाद में उन्हें पकने के लिए रखा जाता है।
मर्वान अल मरवानी अजवाटेक कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उनका कहना है कि वह बचपन से ही खेती के माहौल में पले बढ़े हैं। खजूर की कटाई उनके लिए कोई नया काम नहीं है। उन्होंने यह पेशा अपने पिता और दादा से सीखा है।
उनके अनुसार, प्रत्येक खजूर का पेड़ अपनी बनावट, ऊंचाई और आकार में अलग होता है। इसलिए हर पेड़ पर काम करने की तकनीक भी अलग रखनी पड़ती है।
खजूर की कटाई के बाद उनकी गुणवत्ता के अनुसार छंटाई की जाती है। अच्छी खजूर को अलग रखा जाता है। कम गुणवत्ता वाले फलों की अलग श्रेणी बनाई जाती है। कुछ खजूर पशुओं के चारे के लिए भी इस्तेमाल होती हैं।
फहद अल रद्दादी हाथ से खजूर तोड़ने को अधिक पसंद करते हैं। उनका मानना है कि इससे फल की गुणवत्ता का तुरंत पता चल जाता है।

खजूर के साथ जुड़ी है सऊदी मेहमाननवाजी
सऊदी अरब में खजूर का महत्व खेतों और बाजारों तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा है। परिवारों में अलग अलग किस्मों की खजूर एक दूसरे को उपहार में देने की परंपरा है।
सऊदी कॉफी के साथ खजूर परोसना मेहमानों के सम्मान का प्रतीक माना जाता है। घर आने वाले मेहमानों को खजूर और कॉफी देना वहां की पारंपरिक मेहमाननवाजी का हिस्सा है।
फहद को आज भी अपने बचपन के वे दिन याद हैं, जब वह खजूर के पेड़ों पर चढ़कर फल तोड़ते थे। फिर उन शाखाओं को अपने पिता को देते थे। उनके पिता उन्हें उनके दादा तक पहुंचाते थे। इसके बाद दादा खजूर की गुणवत्ता जांचते और उनकी छंटाई करते थे।
फहद के अनुसार, यह केवल गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया नहीं थी। इसके पीछे परिवार के सदस्यों के बीच जुड़ाव और साथ काम करने की भावना थी।
खजूर के पेड़ों पर चढ़ना भी आसान काम नहीं है। गर्मियों में तेज धूप और ऊंचे पेड़ों पर काम करना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद पीढ़ियों से इस पेशे से जुड़े लोगों के लिए यह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
आधुनिक तकनीक से बदला खजूर का कारोबार
सऊदी अरब में खजूर की खेती अब पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रही। पिछले कुछ वर्षों में कृषि सुविधाओं और बाजार व्यवस्था में निवेश बढ़ा है।
किसानों के लिए छायादार स्थान और रेफ्रिजरेटेड भंडारण सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे फसल कटाई के बाद खजूर को सुरक्षित रखने और बाजार में बेचने में मदद मिली है।
मदीना और अल अहसा जैसे प्रमुख खजूर उत्पादक क्षेत्रों में केंद्रीकृत खजूर बाजारों ने किसानों और खरीदारों के बीच संपर्क को मजबूत किया है। इन बाजारों में नीलामी के माध्यम से भी खजूर की बिक्री होती है।
इसके अलावा सऊदी अरब में आयोजित होने वाले खजूर महोत्सव किसानों को अपनी उपज प्रदर्शित करने और नए खरीदारों तक पहुंचने का अवसर देते हैं।
फहद अल रद्दादी के मुताबिक, सोशल मीडिया ने भी खजूर के कारोबार को नया रास्ता दिया है। अब किसान और उत्पादक सीधे बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुंच सकते हैं। सिंचाई, छंटाई, पैकेजिंग और भंडारण में तकनीकी सुधार से उत्पादन और वितरण की प्रक्रिया भी बेहतर हुई है।

युवाओं के लिए नए अंदाज में पेश की जा रही खजूर
खजूर की परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए कुछ कंपनियां नए प्रयोग कर रही हैं। अजवाटेक कंपनी के संस्थापक मर्वान अल मरवानी का कहना है कि उन्होंने खजूर को आधुनिक उत्पादों के रूप में पेश करने की कोशिश की है।
इसमें अजवा खजूर की आइसक्रीम जैसे नए उत्पाद शामिल हैं। ऐसे प्रयोगों का उद्देश्य युवाओं को खजूर के करीब लाना और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को नए स्वाद के साथ पेश करना है।
उनका मानना है कि यदि खजूर को केवल पारंपरिक तरीके से ही पेश किया जाता रहा तो नई पीढ़ी की दिलचस्पी सीमित हो सकती है। इसलिए आधुनिक खाद्य उत्पादों के साथ इसके इस्तेमाल के नए रास्ते तलाशना जरूरी है।
खजूर की 400 किस्मों पर विलुप्त होने का खतरा
सऊदी अरब की खजूर खेती के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पारंपरिक किस्मों का संरक्षण है। मर्वान अल मरवानी के अनुसार, सऊदी अरब में खजूर की लगभग 400 किस्में मौजूद हैं। लेकिन इनमें से कई किस्में धीरे धीरे गायब हो रही हैं।
उनका कहना है कि आम उपभोक्ता कुछ लोकप्रिय किस्मों को ही पहचानते हैं। परिवार भी सामान्य तौर पर अपनी पसंद की लगभग 10 किस्मों तक सीमित रहते हैं। इससे कम प्रचलित किस्मों की मांग घटती है और उनकी खेती भी प्रभावित होती है।
इस समस्या को देखते हुए सऊदी अरब के संस्कृति मंत्रालय की स्लो फूड आर्क ऑफ टेस्ट पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसका उद्देश्य दुर्लभ और पारंपरिक खाद्य किस्मों को विलुप्त होने से बचाना है।
इस पहल के तहत दुर्लभ खजूर की किस्मों का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। लोगों को उनके इतिहास, खेती और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
मर्वान अल मरवानी भी इस पहल के साथ काम कर चुके हैं। उनका मानना है कि केवल पेड़ों को बचाना पर्याप्त नहीं है। उन पेड़ों से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान और खेती का अनुभव भी अगली पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए।
सऊदी अरब के खजूर किसान मानते हैं कि हर साल होने वाली फसल कटाई केवल फल इकट्ठा करने का काम नहीं है। यह अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने का जरिया भी है। आधुनिक तकनीक और बदलते बाजार के बीच उनकी कोशिश है कि खजूर की खेती से जुड़ी पुरानी परंपराएं, दुर्लभ किस्में और पारिवारिक अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें।

