पूर्व आईएएस अफजल अमानुल्लाह ने चुनाव आयोग पर खोला मोर्चा, बिहार में एक ही दिन मतदान कराने की जनता से अपील
अफजल अमानुल्लाह ने वीडियो संदेश में कहा—“सात-आठ चरणों में चुनाव कराना जनता को भ्रमित करना है; पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध हैं”
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, पटना
बिहार के पूर्व आईएएस अफजल अमानुल्लाह ने चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर होते हुए बिहार वासियों से अपील की है कि वे मिलकर राजनीतिक दलों और प्रशासन पर दबाव बनाएं ताकि आगामी विधानसभा चुनाव एक ही दिन में कराए जाएँ। अफजल अमानुल्लाह, जिन्होंने बिहार में गृहसचिव और कई जिलों के जिलाधिकारी के रूप में चार दशकों से अधिक सेवा की है, का मानना है कि वर्तमान में चुनाव आयोग बिहार के लोगों के साथ ग़लत संदेश दे रहा है और सुरक्षा बलों की कमी के बहाने सात-आठ चरणों में चुनाव कराना एक तरह से जनता को भ्रमित करने के समान है।
अफजल अमानुल्लाह ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट कहा, “एसआईआर के नाम पर चुनाव आयोग बिहार के लोगों को बेवकूख बना रहा है। पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद होने के बावजूद सात-आठ चरणों में चुनाव कराना अनुचित और अनावश्यक है। चुनाव एक ही दिन में कराना न केवल संभव है बल्कि यह लोकतंत्र और पारदर्शिता के हित में भी है।”
हालाँकि अभी बिहार में विधानसभा चुनाव की आधिकारिक तारीखें घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन अक्तूबर-नवंबर में चुनाव होने की संभावना है। ऐतिहासिक तौर पर, चुनाव आयोग ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था के बहाने बिहार में चुनाव सात-आठ चरणों में कराने की परंपरा निभाई है। इसके परिणामस्वरूप कुछ राजनीतिक दलों को चरणवार चुनाव प्रचार के दौरान लाभ प्राप्त करने के आरोप लगे हैं। अक्सर यह लाभ हिंदू-मुस्लिम मतभेदों को भड़काने और सामाजिक विभाजन का सहारा लेकर हासिल किया गया। अफजल अमानुल्लाह ने इस पृष्ठभूमि को उजागर करते हुए कहा कि “यह कोई नया खेल नहीं है। पिछले चुनावों में देखा गया कि राजनीतिक दल अपने प्रचार के लिए चरणवार चुनाव का लाभ उठाते हैं, जिससे मतदाता भ्रमित होते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है।”
अपने अनुभव के आधार पर अफजल अमानुल्लाह ने कहा कि उन्होंने बिहार में पंचायत चुनावों का आयोजन बिना केंद्रीय और अर्धसैनिक बल की मदद के सफलतापूर्वक किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि “अगर हमारी प्रशासनिक तैयारियाँ हैं और पुलिस बल पर्याप्त है, तो एक ही दिन मतदान कराना पूरी तरह संभव है। आज देश में कहीं भी चुनाव नहीं हो रहे हैं। अगर किसी अधिकारी को सुरक्षा बल की कमी का डर है, तो केंद्र से आवश्यक अर्धसैनिक बल मंगवाया जा सकता है।”
पूर्व आईएएस ने यह भी बताया कि सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। “वाहनों और मतदान केंद्रों का प्रबंध पहले ही किया जा चुका है। पुलिस बल पर्याप्त है और जरूरत पड़ने पर अन्य सुरक्षा एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है। इससे न केवल मतदान प्रक्रिया पारदर्शी होगी, बल्कि छात्रों और अन्य नागरिकों की पढ़ाई और जीवन पर भी कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।”
अफजल अमानुल्लाह ने अपने वीडियो में यह भी चेतावनी दी कि कई राजनीतिक दल चरणवार चुनाव का लाभ उठाकर ग़लत तरीकों से वोटों में हेरफेर कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “यदि चुनाव सात-आठ चरणों में होते हैं, तो कुछ गुट बोगस वोटिंग कर सकते हैं। इसलिए एक ही दिन में मतदान कराना ही लोकतंत्र की रक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का तरीका है।”
पूर्व आईएएस ने अपने 40 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि अब स्थिति बिल्कुल बदल गई है। “पहले हालात थोड़े खतरनाक होते थे और हिंसा की घटनाएँ होती थीं, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है। अब डर और हिंसा का बहाना बनाकर बहु-चरण चुनाव कराना न्यायसंगत नहीं है।”
अफजल अमानुल्लाह का यह वीडियो बिहार की जनता के बीच तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहा है। उन्होंने बार-बार चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे बिहार में एक ही दिन मतदान कराने के लिए कदम उठाएं। उनका मानना है कि इस तरह चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी होगी, सरकारी धन और बल का दुरुपयोग रोका जा सकेगा और लोकतंत्र की मूल भावना मजबूत होगी।
पूर्व आईएएस का यह संदेश केवल प्रशासनिक सुझाव नहीं है, बल्कि यह जनता को सक्रिय रूप से लोकतंत्र की रक्षा करने और चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का भी प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अपील किसी पार्टी विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि बिहार में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रयास है।
अफजल अमानुल्लाह का यह कदम राजनीति और प्रशासन में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा और बिहार वासियों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश बन गया है। उन्होंने बिहार की जनता से कहा कि वे मिलकर सभी राजनीतिक दलों और प्रशासन पर दबाव डालें ताकि बिहार में लोकतंत्र की रक्षा हो सके और सभी मतदाता निष्पक्ष रूप से अपने अधिकार का प्रयोग कर सकें।

