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ईरान के पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराज़ी का निधन: अमेरिकी-इजरायली हमले के बाद तनाव, युद्धविराम पर संक

मुख्य विशेषताएं:

  • रणनीतिक नुकसान: कमाल खराज़ी का निधन ईरान के लिए कूटनीतिक शून्यता पैदा करेगा।
  • संधि पर संकट: अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद वार्ता विफल होने की कगार पर।
  • इजरायल का संकल्प: हिज़्बुल्लाह के अंत तक युद्ध जारी रखने की घोषणा।
  • वैश्विक प्रभाव: कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा पर इस अस्थिरता का सीधा असर।

तेहरान/यरूशलेम:

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के कद्दावर नेता और पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराज़ी ने इस सप्ताह की शुरुआत में हुए हमले में घायल होने के बाद दम तोड़ दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया और ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, खराज़ी ने गुरुवार रात अंतिम सांस ली। यह हमला उनके तेहरान स्थित आवास को निशाना बनाकर किया गया था, जिसमें उनकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी थी।

ईरानी राजनीति का एक मजबूत स्तंभ ढहा

कमाल खराज़ी केवल एक नेता नहीं, बल्कि इस्लामी क्रांति के बाद ईरानी विदेश नीति के शिल्पकार माने जाते थे। वे 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री रहे और वर्तमान में सामरिक विदेश संबंध परिषद (Strategic Council on Foreign Relations) के प्रमुख थे। यह संस्था सीधे सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करती है और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। उनकी मृत्यु ईरान के राजनीतिक और कूटनीतिक तंत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।


युद्धविराम की धज्जियां उड़ाता जमीनी संघर्ष

भले ही 28 फरवरी से शुरू हुए इस विनाशकारी संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत के लिए एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन खराज़ी की मौत और इजरायल के कड़े रुख ने इस समझौते को अधर में लटका दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य कमांडर मारे जा चुके हैं। एक तरफ जहां दुनिया शांति की उम्मीद कर रही थी, वहीं दूसरी ओर इजरायल और अमेरिका का यह तर्क कि “युद्धविराम हिज़्बुल्लाह पर लागू नहीं होता”, ने आग में घी डालने का काम किया है।


इजरायल का सख्त रुख: “लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं”

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनके सैन्य अभियान रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा:

“मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ: लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है। हम पूरी ताकत के साथ हिज़्बुल्लाह पर हमले जारी रखेंगे और तब तक नहीं रुकेंगे जब तक सुरक्षा बहाल नहीं हो जाती।”

नेतन्याहू के इस बयान ने उन दावों की हवा निकाल दी है जिसमें ईरान यह मानकर चल रहा था कि युद्धविराम का दायरा पूरे क्षेत्र (लेबनान सहित) में होगा। इजरायली पीएम ने अपनी कैबिनेट को लेबनान सरकार के साथ सीधे बातचीत शुरू करने का निर्देश भी दिया है, जिसके दो मुख्य लक्ष्य हैं:

  1. हिज़्बुल्लाह का निशस्त्रीकरण
  2. इजरायल और लेबनान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता

बेरूत में तबाही का मंजर

जमीनी हकीकत यह है कि युद्धविराम के दावों के बीच भी दक्षिणी लेबनान और बेरूत में इजरायली वायुसेना ने कहर बरपाया है। महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए गए, जिससे बेरूत की सड़कें एम्बुलेंसों के सायरन से गूंज उठीं। संयुक्त राष्ट्र के राहत समन्वयक इमरान रज़ा और उप प्रवक्ता फरहान हक ने चेतावनी दी है कि यदि वार्ता के जरिए समाधान नहीं निकला, तो मानवीय त्रासदी और भयानक रूप ले लेगी।

निष्कर्ष: कूटनीति बनाम युद्ध

कमाल खराज़ी की मृत्यु ने ईरान के भीतर प्रतिशोध की भावना को और तीव्र कर दिया है। इस्लामाबाद में होने वाली आगामी वार्ताओं का भविष्य अब संकट में है। यदि अमेरिका और इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई और ‘चयनित युद्धविराम’ की नीति पर अड़े रहते हैं, तो पश्चिम एशिया में एक पूर्णकालिक और अधिक विनाशकारी महायुद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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