चुनावी मौसम में PM से ग्रैंड मुफ्ती कांतापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार की मुलाकात, क्या है सियासी संदेश?
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
नई दिल्ली में देश के प्रमुख इस्लामिक धर्मगुरु और भारतीय ग्रैंड मुफ्ती कांतापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक में वक्फ कानून, मुस्लिम शैक्षणिक व्यवस्था, अल्पसंख्यक कल्याण, सामाजिक समरसता और अंतरराष्ट्रीय हालात जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब देश में वक्फ संपत्तियों को लेकर नई कानूनी बहस चल रही है और विभिन्न राज्यों में मुसलमानों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। ऐसे में इस बैठक को केवल शिष्टाचार भेंट के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक संवाद प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

‘इंसानियत के साथ जुड़ाव का सफर’
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ग्रैंड मुफ्ती ने इसे “इंसानियत के साथ जुड़ाव का एक सफर” बताया। उन्होंने कहा कि केरल में “मनुष्यता के साथ” विषय पर की गई अपनी हालिया यात्रा के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से जो सुझाव और चिंताएं सामने आईं, उन्हें प्रधानमंत्री के समक्ष रखा गया।
मुसलियार ने बताया कि उन्होंने केरल के जमीनी हालात, शैक्षणिक संस्थानों की चुनौतियां, सामाजिक सामंजस्य की जरूरत और अल्पसंख्यक समुदाय की अपेक्षाओं को विस्तार से साझा किया। प्रधानमंत्री ने इन बातों को गंभीरता से सुना और कई सवाल पूछे।
उनके शब्दों में, “प्रधानमंत्री जो करना है वह करेंगे, मुख्यमंत्री जो करना है वह करेंगे। कुछ मसले विचाराधीन हैं। नियमों के तहत जो संभव होगा, वह किया जाएगा।”
वक्फ कानून पर विशेष चर्चा
बैठक का एक बड़ा हिस्सा वक्फ संपत्तियों और नए प्रस्तावित वक्फ कानून से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा। देश भर में वक्फ बोर्डों की संपत्तियों के प्रबंधन, पारदर्शिता और कानूनी दायित्वों को लेकर समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं।
ग्रैंड मुफ्ती ने बताया कि करीब आधे घंटे तक वक्फ और उससे जुड़े प्रशासनिक एवं कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने वक्फ बोर्डों की वर्तमान स्थिति, जिम्मेदारियों और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी ली।
सूत्रों के अनुसार, बातचीत में यह भी संकेत मिला कि सरकार वक्फ प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नए ढांचे पर विचार कर रही है। हालांकि बैठक के बाद कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन इस मुद्दे पर संवाद का जारी रहना ही अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तालीम और मरकज़ मॉडल की चर्चा
बैठक में शिक्षा को लेकर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ। ग्रैंड मुफ्ती ने केरल में मरकज़ और जमीयतुल उलेमा के माध्यम से संचालित शैक्षणिक पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि केरल में शुरू की गई एक शाखा धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। उनका मानना है कि मुस्लिम समाज में शिक्षा का प्रसार ही दीर्घकालिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की अपील भी की। खासकर आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास को लेकर सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और धार्मिक-सामाजिक संस्थाएं मिलकर काम करें तो शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव संभव है।

सामाजिक सौहार्द और मौजूदा माहौल
बैठक के दौरान सामाजिक सौहार्द और मौजूदा वातावरण पर भी चर्चा हुई। ग्रैंड मुफ्ती ने स्पष्ट कहा कि आपसी झगड़ों से किसी का भला नहीं होता।
उन्होंने कहा, “अगर लोग आपसी मोहब्बत और भाईचारे को बढ़ाएं तो समाज में तरक्की होगी।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं चर्चा में रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय मुलाकातें सामाजिक तनाव को कम करने और संवाद की संस्कृति को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं।
राजनीतिक संदर्भ और आगामी चुनाव
इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आगामी चुनाव होने हैं, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
पिछले एक दशक में केंद्र सरकार और मुस्लिम समाज के बीच संबंधों को लेकर लगातार बहस होती रही है। ऐसे में ग्रैंड मुफ्ती और प्रधानमंत्री के बीच यह सीधा संवाद कई संदेश देता है।
हालांकि ग्रैंड मुफ्ती ने मुलाकात को पूरी तरह सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों तक सीमित बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे व्यापक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है।
मुस्लिम समाज के भीतर भी इस बैठक को लेकर उत्सुकता है कि क्या यह संवाद केवल प्रतीकात्मक रहेगा या ठोस नीतिगत पहल में बदलेगा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक इस्लामी परिदृश्य और मानवीय संकट जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
ग्रैंड मुफ्ती ने प्रधानमंत्री को अपना रमजान संदेश भी सौंपा, जिसमें इंसानियत, करुणा और समावेशी विकास का आह्वान किया गया है।
आगे क्या?
इस मुलाकात का वास्तविक प्रभाव आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। क्या वक्फ कानून में कोई संशोधन होगा? क्या शिक्षा के क्षेत्र में नई योजनाएं सामने आएंगी? क्या सामाजिक सौहार्द को लेकर कोई ठोस पहल होगी?
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि संवाद की प्रक्रिया जारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संवाद संस्थागत रूप लेता है और नियमित बैठकों का सिलसिला शुरू होता है, तो इससे अल्पसंख्यक समुदाय और सरकार के बीच विश्वास का पुल मजबूत हो सकता है।
Met Hon’ble Prime Minister @narendramodi today in New Delhi.
— Sheikh Abubakr Ahmad الشيخ أبوبكر أحمد (@shkaboobacker) February 16, 2026
We had a meaningful discussion on various social, humanitarian, educational and developmental matters, along with issues concerning minority welfare and important international developments. I also brought to his… pic.twitter.com/ioxzST5rlZ
निष्कर्ष
ग्रैंड मुफ्ती कांतापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह मुलाकात केवल एक आधिकारिक बैठक नहीं, बल्कि संवाद और विश्वास निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
वक्फ, शिक्षा, सामाजिक समरसता और अल्पसंख्यक कल्याण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बातचीत होना अपने आप में सकारात्मक संकेत है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह संवाद जमीनी स्तर पर किस प्रकार के ठोस परिणामों में बदलता है।
मुस्लिम समाज और व्यापक भारतीय जनमानस दोनों के लिए यह एक अहम क्षण है—जहां उम्मीद, सतर्कता और राजनीतिक यथार्थ तीनों साथ-साथ चल रहे हैं।

