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हज यात्रा 2026: नए भारत की हाईटेक सुविधाओं के साथ मुकद्दर का सफर शुरू

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

आस्था की डगर पर कदम बढ़ाते हुए भारत से हज 2026 का मुबारक सफर शुरू हो चुका है। 18 अप्रैल की सुबह देश की राजधानी नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मंजर कुछ अलग ही था। सफेद एहराम पहने, लबों पर ‘लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक’ की सदाएं लिए जायरीनों का पहला जत्था सऊदी अरब के लिए रवाना हुआ। यह सिर्फ एक यात्रा की शुरुआत नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के सपनों और दुआओं के मुकम्मल होने का पल है।

इस साल भारत से कुल 1,75,000 से अधिक जायरीन इस मुकद्दस सफर पर जा रहे हैं। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नई दिल्ली में पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। इस मौके पर उन्होंने साफ कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल भीड़ भेजना नहीं, बल्कि हर हाजी को सुरक्षित और सम्मानजनक अनुभव देना है।


डिजिटल कवच: अब कोई हाजी नहीं होगा गुमशुदा

अक्सर हज के दौरान सबसे बड़ी चुनौती भीड़ में अपनों से बिछड़ने की होती है। मक्का और मदीना की लाखों की भीड़ में बुजुर्गों का खो जाना एक बड़ी चिंता रही है। लेकिन इस बार तकनीक ने इसका समाधान निकाल लिया है। भारत सरकार ने इस साल हर जायरीन के लिए ‘स्मार्ट रिस्टबैंड’ अनिवार्य किया है।

यह बैंड सिर्फ एक कड़ा नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है। इसमें जायरीन की पहचान और उनके जत्थे की पूरी जानकारी डिजिटल रूप में मौजूद है। अगर कोई रास्ता भटकता है, तो सुरक्षा अधिकारी इस बैंड को स्कैन करके तुरंत उसे उसके ग्रुप तक पहुंचा सकेंगे। साथ ही, ‘हज सुविधा ऐप’ के जरिए जायरीनों को अपनी लोकेशन, ठहरने की जगह और आपातकालीन मदद की जानकारी सीधे फोन पर मिल रही है। यह ‘डिजिटल इंडिया’ का वह चेहरा है जो सरहदों के पार भी भारतीयों की सुरक्षा कर रहा है।


17 शहर और छोटा पैकेज: हर किसी के लिए आसान हुआ सफर

हज यात्रा को लेकर अक्सर यह शिकायत रहती थी कि दूरदराज के इलाकों से आने वाले लोगों को बड़े शहरों तक पहुंचने में दिक्कत होती है। इस बार सरकार ने देश के 17 प्रमुख शहरों को ‘एम्बार्केशन पॉइंट’ बनाया है। दिल्ली, मुंबई, श्रीनगर, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों से सीधी उड़ानें होने की वजह से जायरीनों का सफर अब उनके घर के पास से ही शुरू हो रहा है।

एक और बड़ा बदलाव ‘शॉर्ट हज पैकेज’ के रूप में आया है। पहले हज के लिए 40 से 45 दिन का समय निकालना पड़ता था। लेकिन अब 20 दिनों का छोटा पैकेज पेश किया गया है। यह उन नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जो लंबे समय तक अपने काम से दूर नहीं रह सकते थे। समय की इस बचत ने हज को और भी सुलभ बना दिया है।


बुलेट ट्रेन और आलीशान होटल: सुविधाओं का नया दौर

इस बार जायरीनों को सऊदी अरब में वह पुराना मंजर नहीं दिखेगा, जहां साधारण कमरों में कई-कई लोग ठहरते थे। सऊदी सरकार के साथ बेहतर तालमेल का नतीजा है कि मक्का में इस बार भारतीय हाजियों के लिए होटलों जैसे आरामदायक आवास का इंतजाम किया गया है।

सफर के दौरान सबसे ज्यादा वक्त मक्का से मदीना जाने में लगता था। इस साल करीब 60,000 भारतीय जायरीनों को हाई-स्पीड ट्रेन (बुलेट ट्रेन) का अनुभव मिलेगा। जो सफर घंटों में पूरा होता था, उसे यह ट्रेन मिनटों में तय करेगी। इससे बुजुर्गों को थकान कम होगी और वे अपनी इबादत पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।


बढ़ा हुआ बीमा और मुस्तैद मेडिकल टीम

सफर के दौरान सेहत और सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। सरकार ने इस बार बीमा कवर को बढ़ाकर 6.25 लाख रुपये कर दिया है। यह कदम किसी भी अनहोनी की स्थिति में परिवार को बड़ी आर्थिक राहत देगा। हर जत्थे के साथ अनुभवी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम तैनात की गई है। हवाई अड्डों से लेकर सऊदी के कैंपों तक रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भरोसा दिलाया कि भारतीय मिशन के अधिकारी हर कदम पर जायरीनों की मदद के लिए तैयार हैं। उन्होंने जायरीनों से अपील की कि वे सऊदी सरकार के नियमों का पालन करें ताकि देश की छवि भी बेहतर हो और उनकी इबादत में कोई खलल न पड़े।


24 मई से शुरू होंगी मुख्य रस्में

चांद की तारीखों के हिसाब से इस साल हज की मुख्य रस्में 24 मई से 29 मई के बीच अदा की जाएंगी। मीना की पहाड़ियों से लेकर अराफात के मैदान तक, भारतीय हाजियों का यह कारवां आने वाले दिनों में और बढ़ता जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, अगले कुछ दिनों में देश के बाकी 16 केंद्रों से भी उड़ानें अपनी लय पकड़ लेंगी।

यह यात्रा केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और सरकार की सेवा भावना का एक बड़ा इम्तिहान भी है। जिस तरह की डिजिटल और बुनियादी तैयारियां इस साल दिख रही हैं, उससे उम्मीद है कि हज 2026 अब तक का सबसे व्यवस्थित और सुकून भरा सफर साबित होगा। भारतीय जायरीन जब वापस लौटेंगे, तो उनके पास केवल दुआएं नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और आधुनिक यात्रा की यादें भी होंगी।