हिजबुल्लाह ने फिर सक्रिय किए ‘सुसाइड स्क्वॉड’, भड़का भीषण युद्ध
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बेरूत/यरूशलेम:
पश्चिम एशिया का युद्ध साल 2026 में एक ऐसे खौफनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने दुनिया को 40 साल पुराने काले इतिहास की याद दिला दी है। इजरायल के साथ जारी भीषण जंग के बीच, लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह ने अपनी सबसे घातक और पुरानी रणनीति पर लौटने का ऐलान किया है। हिजबुल्लाह ने आधिकारिक तौर पर अपने ‘आत्मघाती दस्तों’ (Suicide Squads) को सक्रिय कर दिया है, जिसका उद्देश्य दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना के बढ़ते कदमों को रोकना है।
1980 के दशक की रणनीति: आत्मघाती हमलावरों का जाल
अल जज़ीरा की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, हिजबुल्लाह के एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने पुष्टि की है कि समूह अब 1980 के दशक की अपनी उन रणनीतियों का उपयोग करेगा, जिन्होंने उस समय इजरायली और पश्चिमी सेनाओं के लिए भारी चुनौतियां पैदा की थीं।
हिजबुल्लाह के सूत्र ने बताया, “हमारी पूर्व नियोजित योजना के तहत दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आत्मघाती हमलावरों (fidayeen) को तैनात कर दिया गया है। इनका एकमात्र लक्ष्य लेबनानी गांवों में मौजूद दुश्मन (इजरायली) अधिकारियों और सैनिकों को निशाना बनाना है।” रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में स्थापित किए जा रहे सैन्य ठिकानों को ध्वस्त करने की एक हताश और बेहद हिंसक कोशिश है।
लेबनान सरकार बनाम हिजबुल्लाह: आंतरिक युद्ध का खतरा
इस घोषणा ने लेबनान के भीतर ही एक नया मोर्चा खोल दिया है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने हिजबुल्लाह की इस रणनीति और इजरायल के साथ सीधी बातचीत के विरोध को कड़ी चुनौती दी है। राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि देश की आधिकारिक नीति केवल शांति और कूटनीति के पक्ष में है।
राष्ट्रपति जोसेफ औन ने सोशल मीडिया पर एक कड़ा संदेश जारी करते हुए कहा:
“हमने अमेरिकी मध्यस्थों को साफ कर दिया है कि किसी भी बातचीत के लिए युद्धविराम (Ceasefire) पहली शर्त है। इजरायल को लेबनानी क्षेत्र पर अपने हवाई, जमीनी और समुद्री हमले तुरंत बंद करने होंगे। यह लेबनान का आधिकारिक रुख है, इसके विपरीत किसी भी समूह (हिजबुल्लाह) का बयान अवैध और अमान्य है।”
‘देशद्रोह’ के आरोप और विदेशी हस्तक्षेप का साया
राष्ट्रपति औन ने हिजबुल्लाह पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें विदेशी ताकतों (ईरान) का एजेंट बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जो लोग लेबनान को विदेशी हितों की खातिर युद्ध की आग में झोंक रहे हैं, वे ही असली देशद्रोही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इजरायल के साथ युद्ध को खत्म करना चाहते हैं, जबकि हिजबुल्लाह का एजेंडा लेबनान को विनाश की ओर ले जा रहा है।
दूसरी ओर, हिजबुल्लाह के नेताओं ने राष्ट्रपति के बयान को खारिज करते हुए इसे ‘समर्पण’ करार दिया है। हिजबुल्लाह का कहना है कि जब तक इजरायली सेना लेबनान की जमीन पर है, तब तक वे अपनी आक्रामकता कम नहीं करेंगे।
2026: एक लंबा और थका देने वाला संघर्ष
इजरायली सैन्य नेतृत्व (IDF) ने भी अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है। आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ ईयाल ज़मीर ने संकेत दिया है कि 2026 का पूरा साल युद्ध के नाम रहने वाला है। इजरायल का तर्क है कि जब तक हिजबुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमले बंद नहीं होते और सीमा से उसकी पकड़ खत्म नहीं होती, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर असर
इस युद्ध का असर केवल सीमा तक सीमित नहीं है। हिजबुल्लाह द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान का समर्थन करने और खुद लेबनान में आत्मघाती दस्ते सक्रिय करने से तेल की वैश्विक कीमतों में आग लग गई है। लेबनान और इजरायल दोनों देशों के आम नागरिक इस समय भारी आर्थिक मंदी और विस्थापन का सामना कर रहे हैं।
तेहरान और मास्को के बीच बढ़ती नजदीकी और वाशिंगटन में ट्रंप प्रशासन की ‘कठोर नीति’ ने इस संकट को एक वैश्विक ‘प्रॉक्सि वॉर’ (Proxy War) में बदल दिया है।
आगे क्या?
हिजबुल्लाह द्वारा आत्मघाती दस्तों की सक्रियता अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यह न केवल इजरायली सैनिकों के लिए खतरा है, बल्कि लेबनान के आम नागरिकों के लिए भी आत्मघाती साबित हो सकता है। क्या कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद हो चुके हैं? या फिर यह तनाव किसी बड़ी विश्वव्यापी त्रासदी की प्रस्तावना है? आने वाले कुछ हफ्ते पश्चिम एशिया के इतिहास को नया मोड़ देंगे।
स्रोत: अल जज़ीरा।

