मेजबान खामोश, मेहमान का कत्ल: क्या भारत की नाक के नीचे अमेरिकी हमले ने ‘विश्वगुरु’ की कूटनीति को डुबो दिया?
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, कोलंबो/नई दिल्ली
हिंद महासागर की लहरें इस समय सिर्फ पानी नहीं बल्कि बारूद और खून की गवाह बन रही हैं। श्रीलंका के तट के पास जो कुछ हुआ उसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के आधुनिक जंगी जहाज ‘IRIS डेना’ को टॉरपीडो से उड़ाकर समुद्र की गहराइयों में दफन कर दिया। इस हमले में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई। कई अभी भी लापता हैं। लेकिन इस भीषण सैन्य कार्रवाई ने युद्ध के मैदान से दूर भारत की राजधानी दिल्ली में एक बड़ा सियासी और कूटनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

सवाल यह नहीं है कि अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया। सवाल यह है कि जो ईरानी नौसैनिक दो हफ्ते पहले भारत के मेहमान थे, उनका कत्ल भारत के प्रभाव वाले समुद्री क्षेत्र में कैसे हो गया? क्या भारत की कूटनीति इस कदर विफल हो गई है कि वह अपने बुलावे पर आए मेहमानों को सुरक्षा तक नहीं दे सका?
‘साइलेंट डेथ’: दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले को ‘शांत मौत’ (Silent Death) का नाम दिया है। पेंटागन की प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने सीना ठोककर इस हमले की पुष्टि की। हेगसेथ ने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने टॉरपीडो चलाकर किसी दुश्मन देश के जहाज को डुबोया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एडमिरल ब्रैड कूपर ने तो यहाँ तक कह दिया कि वे पूरी ईरानी नेवी को खत्म करने के मिशन पर हैं। उन्होंने दावा किया कि अब तक ईरान के 17 जहाज डुबोए जा चुके हैं। अमेरिकी सबमरीन ने ‘IRIS डेना’ को तब निशाना बनाया जब उसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में सुरक्षित है। लेकिन अमेरिका ने उसे संभलने का मौका तक नहीं दिया।
https://t.co/J4grAgoqxc pic.twitter.com/szOofLkh9W
— Department of War 🇺🇸 (@DeptofWar) March 4, 2026
विशाखापट्टनम की परेड और वो मेहमान नवाजी
इस पूरी कहानी का सबसे दुखद और शर्मनाक पहलू भारत से जुड़ा है। अभी महज दो सप्ताह पहले की बात है। यही ‘IRIS डेना’ और इसमें सवार ईरानी नौसैनिक भारत के विशाखापट्टनम में थे। वे भारत सरकार के विशेष निमंत्रण पर नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ (MILAN) में हिस्सा लेने आए थे। भारत की राष्ट्रपति के सामने इन नौसैनिकों ने मार्च पास्ट किया था।
.@SECWAR “In the Indian Ocean—an American submarine sunk an Iranian warship, that thought it was safe in international waters.
— DOW Rapid Response (@DOWResponse) March 4, 2026
Instead, it was sunk by a torpedo—Quiet Death.
The first sinking of an enemy ship by a torpedo since World War 2. Like in that war—back when we were… pic.twitter.com/Y97YQBxQza
वे भारत के मेहमान थे। भारत ने उन्हें कूटनीतिक और सैन्य अभ्यास के लिए खुद बुलाया था। लेकिन जब ये नौसैनिक अपना अभ्यास पूरा कर वापस लौट रहे थे, तो भारत के प्रभाव क्षेत्र वाले हिंद महासागर में उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। सोशल मीडिया पर अब यह सवाल गूँज रहा है कि क्या भारत ने अपने मेहमानों को अमेरिका की बलि चढ़ा दिया?
Situation so bad even Arnab Goswami who is on the payroll of BJP is condemning US attack on IRIS Dena but Vishwaguru couldn’t gather the courage to criticise Trump for this heinous act.
— Jitesh (@Chaotic_mind99) March 4, 2026
What did we do to deserve him as the PM ? pic.twitter.com/tj3s96oJnl
भारत की चुप्पी: कूटनीति या डर?
श्रीलंका के तट के पास हुए इस हमले के बाद भारत सरकार ने एक अजीब सी चुप्पी साध रखी है। विदेश मंत्रालय की ओर से अब तक कोई ठोस बयान नहीं आया है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या भारत इस कदर अमेरिका और इजरायल के दबाव में है कि वह अपने पुराने दोस्त ईरान की मौत पर शोक तक नहीं जता सकता?
आलोचकों का कहना है कि भारत ने पहली बार इतनी ‘डरपोक’ कूटनीति दिखाई है। ईरान भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद साथी रहा है। लेकिन जैसे ही इजरायल-अमेरिका का युद्ध ईरान तक पहुँचा, भारत ने पाला बदल लिया या फिर चुपचाप किनारे खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या ‘विश्वगुरु’ कहलाने वाला देश अब इतना लाचार हो गया है कि उसकी समुद्री सीमा के पास मित्र देशों के जहाज डुबोए जा रहे हैं और वह कुछ नहीं कर पा रहा?
Arnab : How can we ignore what happened with Iranian ship, what message will be sent to our allies?
— Amock_ (@Amockx2022) March 4, 2026
MG GD Bakshi 🤯: We can't ignore this thing, there are people who are cheerleaders of Trump supporting his idiot actions against Iran
Even these two are asking questions 🔥 pic.twitter.com/yBzTendMoL
घरेलू मोर्चे पर घिरी सरकार: एप्सटीन फाइल का जिन्न
यह गुस्सा सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। टीवी डिबेट्स में भी अब सरकार को घेरा जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञ जी.डी. बख्शी जैसे लोग भी इस घटना पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। अर्नब गोस्वामी जैसे एंकर, जो आमतौर पर सरकार का बचाव करते हैं, वे भी पूछ रहे हैं कि अगर हम अपने सहयोगियों के साथ ऐसा करेंगे तो दुनिया में क्या संदेश जाएगा?
विपक्षी दलों और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स ने तो सरकार पर और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। चर्चा गर्म है कि क्या मौजूदा हुकूमत किसी दबाव में है? कुछ लोग ‘एप्सटीन फाइल’ में भारतीय नामों के होने की चर्चा कर रहे हैं, तो कुछ इसे कूटनीतिक धोखाधड़ी बता रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि भारत ने अपने दोस्त मुल्कों का भरोसा खो दिया है।
ये ईरान के IRIS Dena के नौसैनिक हैं। दो सप्ताह पहले भारत के विशाखापट्टनम में परेड कर रहे थे। ये भारत के बुलावे पर भारत में युद्ध अभ्यास करने आए थे। या यूं कहिए कि भारत के मेहमान थे। भारत से लौटते वक्त भारत के प्रभाव क्षेत्र वाले हिंद महासागर में अमेरिका ने डुबोकर शहीद कर दिया।… pic.twitter.com/sZSUGQP1Ra
— Wasim Akram Tyagi (@WasimAkramTyagi) March 4, 2026
श्रीलंका की बहादुरी और बचाव अभियान
जहाँ भारत चुप है, वहीं श्रीलंका ने अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने बताया कि जैसे ही उन्हें ‘IRIS डेना’ के डूबने की खबर मिली, उन्होंने अपनी नेवी और एयरफोर्स को बचाव कार्य में लगा दिया।
श्रीलंकाई नौसेना ने 32 ईरानी नाविकों को समुद्र से जिंदा निकाला। इनमें से कई बुरी तरह घायल हैं और गाले के अस्पताल में भर्ती हैं। नौसेना के प्रवक्ता कमांडर बुद्धिका संपत ने बताया कि जब उनकी टीम मौके पर पहुँची, तो जहाज का नामोनिशान नहीं था। सिर्फ तेल के धब्बे और लाइफ राफ्ट तैर रहे थे। अब तक 87 लाशें बरामद की जा चुकी हैं, जबकि 100 से ज्यादा नाविक अभी भी लापता हैं।
IRIS डेना: ईरान का गौरव जो समंदर में सो गया
‘IRIS डेना’ ईरान का सबसे नया और आधुनिक युद्धपोत था। यह स्वदेशी तकनीक से बना मौज-क्लास फ्रिगेट था। यह जहाज एंटी-शिप मिसाइलों, टॉरपीडो और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस था। साल 2023 में इसने पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में इसका भव्य स्वागत हुआ था। लेकिन अमेरिका ने इसे बैन कर रखा था क्योंकि आरोप था कि इसके जरिए रूस को हथियार सप्लाई किए जा रहे थे।

क्या भारत अब युद्ध का हिस्सा बनेगा?
ईरान ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह दुनिया के सभी इजरायली दूतावासों को निशाना बना सकता है। अमेरिका की आक्रामकता अब हिंद महासागर तक पहुँच गई है। ऐसे में भारत के लिए तटस्थ रहना अब मुमकिन नहीं लग रहा। एक तरफ अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ती नजदीकी है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ पुरानी दोस्ती और सुरक्षा की जिम्मेदारी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह ‘चुप्पी’ उसे भारी पड़ सकती है। अगर भारत ने अपने समुद्री क्षेत्र में हो रहे इन हमलों पर कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो भविष्य में कोई भी देश भारत के बुलावे पर सैन्य अभ्यास के लिए आने से डरेगा। यह भारत की साख पर एक गहरा धक्का है।
निष्कर्ष: साख का सवाल
ईरानी नौसैनिकों की मौत ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या भारत वाकई एक स्वतंत्र विदेश नीति पर चल रहा है? या फिर वह केवल उन देशों का साथ दे रहा है जो शक्तिशाली हैं? विशाखापट्टनम में जिन नाविकों ने तिरंगे को सलामी दी थी, उनकी लाशें आज हिंद महासागर में तैर रही हैं। भारत के लिए यह वक्त अपनी कूटनीति पर दोबारा गौर करने का है। अगर आज हमने अपने मेहमानों की मौत पर चुप्पी नहीं तोड़ी, तो इतिहास हमें एक ‘डरपोक और भरोसेहीन’ साथी के रूप में याद रखेगा।
यह युद्ध अब सिर्फ ईरान और इजरायल के बीच नहीं रह गया है। यह अब भारत की प्रतिष्ठा और ‘विश्वगुरु’ होने के दावे की परीक्षा बन चुका है।

