कैसे अमीराती महिला इंजीनियर Waad Ali Hassan Saeed Alhmoudi ने परमाणु ऊर्जा में बनाई पहचान
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यूएई की परमाणु ऊर्जा यात्रा में वाद अलहमूदी ने बनाई खास पहचान
नौशाद अख्तर/ मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की शुरुआत को ज्यादा समय नहीं हुआ है। लेकिन इसी अपेक्षाकृत नए क्षेत्र में कुछ युवा इंजीनियरों ने ऐसी पहचान बनाई है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन रही है। इनमें वाद अली हसन सईद अलहमूदी का नाम प्रमुखता से सामने आता है।
अलहमूदी आज एमिरेट्स न्यूक्लियर एनर्जी कंपनी यानी ENEC में मैकेनिकल एंड सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख हैं। उनकी पेशेवर यात्रा उस दौर में शुरू हुई थी, जब यूएई का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम अभी शुरुआती चरण में था। उन्होंने एक डिजाइन इंजीनियर के रूप में शुरुआत की और धीरे धीरे विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी संभाली।
उनकी कहानी केवल एक इंजीनियर के करियर की कहानी नहीं है। यह यूएई के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, स्थानीय प्रतिभाओं को तैयार करने और तकनीकी क्षेत्रों में अमीराती महिलाओं की बढ़ती भूमिका की कहानी भी है।
बचपन से तकनीक को समझने की रुचि
अलहमूदी के लिए इंजीनियरिंग का चुनाव अचानक लिया गया फैसला नहीं था। उन्हें यह समझने में हमेशा दिलचस्पी रही कि चीजें कैसे काम करती हैं और तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल वास्तविक समस्याओं को हल करने में किस तरह किया जा सकता है।
जब उन्होंने परमाणु ऊर्जा को अपने करियर के रूप में चुना, तब यूएई में यह क्षेत्र तेजी से आकार ले रहा था। उनके लिए यह एक ऐसा अवसर था, जिसमें वह केवल नौकरी नहीं कर रही थीं, बल्कि देश में एक नए औद्योगिक क्षेत्र के विकास का हिस्सा भी बन सकती थीं।
अलहमूदी के अनुसार, यूएई में परमाणु ऊर्जा उस समय एक उभरता हुआ क्षेत्र था। उन्हें ऐसे क्षेत्र में काम करने का अवसर रोमांचक लगा, जहां देश के साथ साथ विशेषज्ञता भी विकसित की जा रही थी।
Ahead of #EmiratiWomensDay 2026, we reflect on what inclusion looks like in action. At @TIIuae, 157 Emirati women are among 355+ scientists building AI, robotics & quantum tech. "When women rise in AI, the nation rises with them," says CEO Dr. Najwa Aaraj. https://t.co/IfPb6JH8hl
— UAE Embassy US (@UAEEmbassyUS) August 25, 2026
Energy Pioneers Program से शुरू हुआ सफर
अलहमूदी ने ENEC के Energy Pioneers Program के जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश किया। यह कार्यक्रम वर्ष 2009 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य युवा अमीराती नागरिकों को यूएई के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए तैयार करना था।
उन्होंने खलीफा यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की। उनकी पढ़ाई में परमाणु इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान था। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शारजाह से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की।
शिक्षा और प्रशिक्षण के इस संयोजन ने उनके करियर को तकनीकी ज्ञान के साथ प्रबंधन की समझ भी दी। यही अनुभव आगे चलकर उनके नेतृत्व की भूमिका में उपयोगी साबित हुआ।
शुरुआती डिजाइन इंजीनियरों में शामिल
ENEC में अलहमूदी शुरुआती अमीराती डिजाइन इंजीनियरों में शामिल थीं। उनके काम का संबंध बाराकाह न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट से जुड़े इंजीनियरिंग समाधानों और प्लांट में किए जाने वाले बदलावों से रहा।
परमाणु ऊर्जा संयंत्र में किसी भी तकनीकी बदलाव की जिम्मेदारी सामान्य औद्योगिक परियोजनाओं जैसी नहीं होती। यहां डिजाइन, सुरक्षा, गुणवत्ता और सटीकता का विशेष महत्व होता है। छोटी तकनीकी गलती भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है। इसलिए परमाणु ऊर्जा इंजीनियरिंग में अनुशासन और प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी माना जाता है।
अलहमूदी ने भी अपने अनुभव से यही सीखा। उनके अनुसार, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम करने से उन्हें सटीकता, अनुशासन और परमाणु सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने की जिम्मेदारी का महत्व समझ में आया।
बाराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र यूएई के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां काम करने का अनुभव अलहमूदी के तकनीकी करियर के लिए महत्वपूर्ण रहा।
इंजीनियर से टीम लीडर तक
समय के साथ अलहमूदी की जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। तकनीकी काम से आगे बढ़कर उन्होंने मैकेनिकल एंड सिविल इंजीनियरिंग टीम का नेतृत्व संभाला।
नेतृत्व की भूमिका ने उनके काम का स्वरूप भी बदल दिया। पहले उनका मुख्य ध्यान अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर था। बाद में उन्हें दूसरे इंजीनियरों के विकास, मार्गदर्शन और अनुभव साझा करने पर अधिक ध्यान देना पड़ा।
उनके लिए नेतृत्व का अर्थ केवल किसी टीम को दिशा देना नहीं है। यह अपने अनुभव को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी है।
यही कारण है कि वह युवा इंजीनियरों को सवाल पूछने और लगातार सीखते रहने की सलाह देती हैं। उनके मुताबिक तकनीकी विशेषज्ञता एक दिन में तैयार नहीं होती। इसके लिए समय, धैर्य और लगातार मेहनत की जरूरत होती है।
कोरोना महामारी ने बढ़ाई जिम्मेदारी की समझ
अलहमूदी के करियर में कोरोना महामारी का दौर भी महत्वपूर्ण रहा। महामारी के दौरान दुनिया भर में कामकाज प्रभावित हुआ। परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में काम करने वाली टीमों के सामने भी कई चुनौतियां थीं।
इसके बावजूद इंजीनियरिंग से जुड़े काम जारी रखने पड़े। इस दौर ने अलहमूदी को अपने काम की व्यापक जिम्मेदारी को समझने का अवसर दिया।
उनके अनुसार, हर इंजीनियरिंग कार्य और तकनीकी निर्णय के पीछे देश और समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। यह सोच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियरों की भूमिका को केवल तकनीकी काम से आगे ले जाती है।
अमीराती महिलाओं के लिए बढ़ते अवसर
अलहमूदी की कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू अमीराती महिलाओं की तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी है।
यूएई में उच्च शिक्षा और विशेषज्ञ तकनीकी प्रशिक्षण के अवसरों ने महिलाओं के लिए इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का रास्ता खोला है। अलहमूदी के अपने करियर में उच्च शिक्षा, ENEC का Energy Pioneers Program और लगातार पेशेवर प्रशिक्षण अहम रहे हैं।
वह मानती हैं कि आज अमीराती महिलाओं के पास इंजीनियरिंग और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के पहले से ज्यादा अवसर हैं। खासकर परमाणु इंजीनियरिंग जैसे विशेषज्ञ क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी धीरे धीरे बढ़ रही है।
उनके लिए यह बदलाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। वह इसे अगली पीढ़ी के लिए रास्ता तैयार करने के अवसर के रूप में देखती हैं।
युवा महिलाओं को क्या सलाह देती हैं अलहमूदी
इंजीनियरिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाली युवा अमीराती महिलाओं के लिए अलहमूदी की सलाह सीधी है। उनका कहना है कि जिज्ञासा बनाए रखें, सवाल पूछें और सीखने का कोई अवसर न छोड़ें।
उनका मानना है कि तकनीकी क्षेत्र मुश्किल लग सकता है। खासकर तब, जब कोई युवा ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर रहा हो, जहां विशेषज्ञता हासिल करने में वर्षों लगते हैं। लेकिन कठिनाई को देखकर पीछे हटने के बजाय लगातार सीखते रहना जरूरी है।
उनकी सलाह में धैर्य भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। तकनीकी विशेषज्ञता समय के साथ विकसित होती है। इसलिए जल्द परिणाम की उम्मीद करने के बजाय निरंतर प्रयास पर ध्यान देना चाहिए।
यूएई के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नई पीढ़ी
वाद अलहमूदी का करियर यह दिखाता है कि किसी देश का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम केवल बड़े संयंत्रों और अत्याधुनिक तकनीक से नहीं बनता। इसके पीछे प्रशिक्षित इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और नेतृत्व क्षमता वाली स्थानीय प्रतिभाओं की भी बड़ी भूमिका होती है।
यूएई ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में स्थानीय मानव संसाधन तैयार करने पर भी ध्यान दिया है। ENEC का Energy Pioneers Program इसी दिशा में एक उदाहरण है। अलहमूदी जैसे इंजीनियर इस प्रयास के परिणाम को सामने लाते हैं।
एक शुरुआती अमीराती डिजाइन इंजीनियर से लेकर मैकेनिकल एंड सिविल इंजीनियरिंग टीम की प्रमुख बनने तक उनका सफर बताता है कि विशेषज्ञता और नेतृत्व साथ साथ विकसित हो सकते हैं।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जो परमाणु इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग या ऊर्जा क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि नए क्षेत्र में शुरुआत करना आसान नहीं होता। लेकिन जिज्ञासा, अनुशासन, तकनीकी शिक्षा और लगातार सीखने की आदत किसी भी करियर को नई दिशा दे सकती है।
यूएई के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अलहमूदी की यात्रा इसी बदलाव की एक जीवंत मिसाल है। वह उस पीढ़ी का हिस्सा हैं जिसने देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आकार लेते देखा और उसी प्रक्रिया में अपने लिए एक मजबूत तकनीकी और नेतृत्व पहचान बनाई।

