सड़क पर नमाज गलत, तो सभी धार्मिक जुलूसों पर लगे रोक: ओवैसी
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हैदराबाद:
देश में त्योहारों, नमाज और अज़ान को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला है। हैदराबाद में एक ‘ईद मिलाप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (Article 25) का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी देश में बकरीद या रमजान जैसे मुस्लिम त्योहार नजदीक आते हैं, तो जानबूझकर ध्रुवीकरण करने और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए अज़ान और नमाज जैसे मुद्दों को तूल दिया जाने लगता है।
“अज़ान और नमाज से इतनी तकलीफ क्यों?”
ओवैसी ने जनसभा को संबोधित करते हुए भावुक और आक्रामक अंदाज में पूछा, “आखिर आप लोगों को अज़ान और सड़क पर नमाज से इतनी दिक्कत क्यों है? जब भी हमारे त्योहार आते हैं, विवाद खड़े कर दिए जाते हैं।” उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि देश की आजादी में मुस्लिम विद्वानों (इस्लामिक उलेमा) का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा, “अल्लामा फजल-ए-हक खैराबादी और अल्लामा कैफी जैसे सैकड़ों और हजारों उलेमाओं ने मस्जिदों से अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी, फतवे जारी किए और अपनी जान की बाजी लगा दी। आज वो लोग हमें देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं और नमाज-अज़ान पर राजनीति कर रहे हैं।”
धार्मिक जुलूसों और कांवड़ यात्रा का दिया हवाला
सड़क पर नमाज पढ़े जाने के विवाद पर सफाई देते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि मुस्लिम समाज रोजाना सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ता। यह केवल जुमे (शुक्रवार) की नमाज या ईद के विशेष अवसरों पर होता है, जब मस्जिदों में जगह कम पड़ जाती है। उन्होंने देश के अन्य धार्मिक आयोजनों से इसकी तुलना करते हुए कहा, “भारत में हर धर्म के त्योहार और जुलूस सड़कों पर निकलते हैं। उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक जब यात्राएं निकलती हैं, तो हफ्तों तक रास्ते बंद कर दिए जाते हैं, सड़कों पर टेंट लगा दिए जाते हैं। तब किसी को कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन जैसे ही मुसलमान नमाज पढ़ता है, कुछ लोगों को दिखाई देना बंद हो जाता है। यह दोहरा मापदंड क्यों?”
ओवैसी ने साफ शब्दों में कहा कि चाहे जो भी स्थिति हो, मुसलमान नमाज पढ़ना नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने एक वाकया साझा करते हुए बताया कि हाल ही में उन्हें कुछ किशोर (Teens) मिले, जिन्होंने टीवी चैनलों पर मुस्लिम विरोधी विमर्श और नमाज को लेकर हो रहे विवादों को देखने के बाद अब नियमित रूप से मस्जिद जाकर नमाज पढ़ने का संकल्प लिया है।
अनुच्छेद 25 और मीट की दुकानों पर पाबंदी का मुद्दा
संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का जिक्र करते हुए ओवैसी ने सरकार को एक समान नियम लागू करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, “अगर सड़क पर नमाज पढ़ना सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ है, तो फिर हर धर्म के त्योहारों और जुलूसों पर यही नियम लागू होना चाहिए। अगर किसी अन्य धर्म के त्योहार के बहाने हमारी मीट, मुर्गे और अंडे की दुकानों को बंद कराया जाता है, तो फिर रमजान के पवित्र महीने में पूरे 30 दिनों के लिए देश भर में शराब की दुकानें भी बंद की जानी चाहिए। क्या सरकार ऐसा करने की हिम्मत दिखाएगी?”
यह बयान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नमाज को एक तय और मर्यादित तरीके से ही पढ़ा जाना चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो मस्जिदों में शिफ्ट के अनुसार नमाज का आयोजन हो। यूपी सरकार ने स्पष्ट किया था कि प्रशासन पहले बातचीत और समझाइश से इसे लागू करवाएगा, और यदि जरूरत पड़ी तो सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य कानूनी तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
NEET-UG पेपर लीक और मीडिया पर निशाना
अपने संबोधन में ओवैसी ने मुख्यधारा के मीडिया (Mainstream Media) पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने देश के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीट (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले के कारण देश के लगभग 22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है, लेकिन टीवी चैनलों को युवाओं के इस दर्द से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा, “मीडिया को छात्रों के संघर्ष को दिखाने के बजाय केवल मुसलमानों, अज़ान और मीट की दुकानों पर डिबेट करने में मजा आता है।”
उन्होंने सीबीएसई (CBSE) की उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक छात्र का उदाहरण देते हुए कहा कि एक टीवी एंकर ने उस छात्र को ‘पाकिस्तानी’ तक कह दिया। ओवैसी ने सवाल किया, “क्या इस देश में सरकार से सवाल पूछने वाला हर व्यक्ति पाकिस्तानी हो जाता है? क्या अब देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान का दर्जा दे दिया गया है कि उनसे सवाल नहीं पूछा जा सकता?”
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को देश-विदेश के हजारों केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 22 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद 12 मई को इस परीक्षा को रद्द कर दिया था, और अब इसकी पुनरीक्षा (Re-examination) 21 जून को होनी तय हुई है।
बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल के दामों पर घेरा
ओवैसी ने देश की आर्थिक स्थिति और हाल ही में हुई ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “देश में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। लेकिन इन जरूरी मुद्दों पर कोई बात नहीं करना चाहता। महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए सिर्फ अज़ान का हौवा खड़ा किया जाता है।”
उन्होंने वैश्विक बाजार का हवाला देते हुए पूछा कि जब सरकार पश्चिम एशिया में स्ट्रेट ऑफ होरमुज (Strait of Hormuz) के बंद होने को ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह बताती है, तो फिर साल 2022 से रूस से खरीदे जा रहे सस्ते कच्चे तेल का फायदा आम जनता को क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि रूस से सस्ते तेल के आयात से भारतीय तेल कंपनियों ने अरबों डॉलर का मुनाफा कमाया, लेकिन आम नागरिकों को महंगाई से कोई राहत नहीं मिली। देश में पिछले दो हफ्तों के भीतर ही चौथी बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी इजाफा किया गया है।
“सत्ता स्थाई नहीं होती, जुल्म बंद करे भाजपा”
हैदराबाद के इतिहास का उदाहरण देते हुए ओवैसी ने शासकों को याद दिलाया कि इतिहास में किसी की भी सत्ता हमेशा के लिए नहीं रही। उन्होंने किंग कोठी के ‘पर्दा गेट’ का जिक्र करते हुए कहा, “कभी यहाँ निजामों का राज हुआ करता था, लेकिन आज सिर्फ एक पर्दा बचा है, गेट गायब है। आलीशान इमारतें खड़ी हैं, लेकिन वे वीरान हैं। इतिहास के ये वीरान महल आज के शासकों को पुकार-पुकार कर कह रहे हैं कि सत्ता का घमंड न करें।”
उन्होंने भाजपा सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश में राजनीतिक बहसों के दौरान अक्सर ‘घुसपैठियों’ (Infiltrators) का जिक्र करके नफरत फैलाई जाती है, जबकि असलियत में कोई घुसपैठिया नहीं है। ओवैसी ने अंत में कहा, “भारत हमारा देश है, हम यहीं पैदा हुए हैं और यहीं रहेंगे। यहां कोई दूसरा हिजरत (पलायन) नहीं होने वाला। अगर सरकार हमें दबाना चाहती है, तो वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर सकती है, लेकिन हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे। सरकार को याद रखना चाहिए कि जुल्म की उम्र लंबी नहीं होती।”

