भारतीय इतिहास सम्मेलन 2026: क्या मुस्लिम समाज के बिना अधूरा है भारत का इतिहास
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नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के ‘इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर’ (IICC) में 11 और 12 अप्रैल, 2026 को दो दिवसीय ‘नेशनल हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है । ‘इंडियन हिस्ट्री फोरम’ (IHF) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देश के जाने-माने इतिहासकार, राजनेता और पत्रकार इस विषय पर मंथन करेंगे कि भारतीय राष्ट्र के निर्माण में मुस्लिम समाज की क्या भूमिका रही है और वर्तमान में इतिहास को किस तरह से पेश किया जा रहा है ।
इतिहास और सत्ता के संबंधों पर चर्चा
सम्मेलन के पहले दिन ‘उद्घाटन सत्र’ की शुरुआत आईएचएफ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शादाब मूसा के संबोधन से होगी । मुख्य सत्र में लोकसभा सांसद शशि थरूर “इतिहास कौन लिखता है?” विषय पर अपनी बात रखेंगे, जिसमें वे सत्ता और इतिहास लेखन के अंतर्संबंधों पर चर्चा करेंगे । इसी सत्र में वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई और अशोक कुमार पांडे मीडिया द्वारा इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने वाले पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे ।
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद राष्ट्रीय एकीकरण में मुस्लिमों की भूमिका पर व्याख्यान देंगे, जबकि प्रमुख इस्लामिक विद्वान एस. सादतुल्लाह हुसैनी मुख्य भाषण (Keynote Address) प्रस्तुत करेंगे ।
आर्थिक और सांस्कृतिक विरासत का विश्लेषण
दोपहर के सत्रों में जेएनयू के प्रो. नजफ हैदर मुगल काल के लेखांकन (Accounting) और नैतिक मूल्यों पर चर्चा करेंगे । वहीं, प्रसिद्ध मौखिक इतिहासकार सोहेल हाशमी भारतीय व्यंजनों के विकास में मुस्लिम संस्कृति के योगदान पर दिलचस्प जानकारी साझा करेंगे ।
महिला शक्ति और इतिहास का सच
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय इतिहास की ‘विस्मृत रानियों’ जैसे रजिया सुल्ताना और जहांआरा बेगम को समर्पित है, जिस पर एएमयू की प्रो. शादाब बानो अपनी बात रखेंगी । पत्रकार रशीद किदवई लोकसभा में मुस्लिम महिलाओं की घटती संख्या जैसे समसामयिक मुद्दों पर विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे ।
दूसरे दिन की चर्चा मंदिरों के विनाश से जुड़े मिथकों और वास्तविकता पर केंद्रित रहेगी, जिसमें ‘सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेकुलरिस्म’ के अध्यक्ष डॉ. राम पुनियानी अपना शोध प्रस्तुत करेंगे । साथ ही, जेएमआई के प्रो. अज़ीज़ुद्दीन हुसैन मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षण संस्थानों की विरासत पर व्याख्यान देंगे ।

बुक टॉक और अकादमिक सत्र
सम्मेलन में ‘बुक टॉक’ सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें डॉ. मुजीबुर रहमान की किताब “शिकवा-ए-हिंद” और जिया उस सलाम की “बीइंग मुस्लिम इन हिंदू इंडिया” पर गहन चर्चा होगी । अकादमिक सत्रों की अध्यक्षता प्रो. परवेज़ नज़ीर और प्रो. दानिश मोईन जैसे दिग्गज विद्वान करेंगे ।
यह दो दिवसीय समागम न केवल भारत के गौरवशाली अतीत को समझने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में इतिहास के महत्व को भी रेखांकित करेगा । सम्मेलन का समापन 12 अप्रैल की रात को ‘वैलेडिक्टरी सेशन’ और धन्यवाद प्रस्ताव के साथ होगा ।

