तुर्की नागरिक बनी भारतीय मूल की महिला दोहा एयरपोर्ट पर फंसी
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दोहा/ नई दिल्ली
कभी भारतीय नागरिक रहीं महाराष्ट्र की रहने वाली नजनीन मोहम्मद इन दिनों एक ऐसे संकट से गुजर रही हैं जिसने नागरिकता, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और विदेशी निवेश से जुड़ी कई अहम बहसों को फिर से सामने ला दिया है। लगभग पचास वर्षीय नजनीन पिछले करीब पंद्रह दिनों से कतर की राजधानी दोहा के हमद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फंसी हुई हैं। उनके पास कतर का वैध रेजिडेंस परमिट यानी कतर आईडी है, लेकिन पासपोर्ट नहीं होने के कारण कतर के अधिकारी उन्हें एयरपोर्ट से बाहर जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि नजनीन अब भारत की नागरिक नहीं हैं। उन्होंने कुछ वर्ष पहले स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता छोड़कर तुर्की की नागरिकता अपना ली थी। इसके बावजूद संकट की इस घड़ी में भारत सरकार और दोहा स्थित भारतीय दूतावास मानवीय आधार पर उनकी मदद के लिए आगे आए हैं।
नजनीन मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली हैं। उनका भारतीय पासपोर्ट भी था, लेकिन बाद में उन्होंने तुर्की की नागरिकता स्वीकार कर ली। उनके पति इम्तियाज मलिक ने भी भारतीय नागरिकता छोड़कर तुर्की की नागरिकता ले ली थी। इम्तियाज लंबे समय से कतर एयरवेज में कार्यरत हैं। वर्ष 2002 से यह परिवार दोहा में रह रहा है।
दंपति के तीन बेटे हैं। इनमें दो तुर्की के नागरिक हैं जबकि एक बेटा अब भी भारतीय नागरिक है। परिवार का अधिकांश जीवन कतर में बीता है और वहीं उनका स्थायी निवास भी है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में दंपति ने तुर्की में एक संपत्ति में निवेश किया था। उनका दावा है कि निवेश पूरी तरह कानूनी बैंकिंग माध्यमों से किया गया था। बाद में पता चला कि जिस परियोजना में उन्होंने निवेश किया, वह कथित धोखाधड़ी का हिस्सा थी। संबंधित बिल्डर के खिलाफ जांच शुरू हुई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद तुर्की सरकार ने उस संपत्ति को भी जब्त कर लिया।
इस विवाद को सुलझाने के लिए नजनीन और उनके पति 16 जून को तुर्की पहुंचे। उनका कहना है कि उन्होंने एक वकील की सेवाएं भी ली थीं ताकि सभी दस्तावेज पेश कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें। लेकिन इस्तांबुल पहुंचने के बाद घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया।
दंपति के अनुसार, तुर्की अधिकारियों ने बिना किसी स्पष्ट कारण के दोनों के पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद पति और पत्नी को अलग अलग हिरासत केंद्रों में भेज दिया गया। इम्तियाज मलिक अब भी तुर्की में हिरासत में हैं। वहीं नजनीन को अगले ही दिन 17 जून को दोहा भेज दिया गया। हालांकि उन्हें पासपोर्ट वापस नहीं दिया गया।
तुर्की से दोहा पहुंचने के बाद नई मुश्किल सामने आ गई। नजनीन के पास कतर का वैध रेजिडेंस परमिट मौजूद है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज नहीं होने के कारण कतर के आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि वह पिछले करीब पंद्रह दिनों से हमद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ट्रांजिट क्षेत्र में ही फंसी हुई हैं।
यह स्थिति केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय संकट भी बन चुकी है। नजनीन ने भारतीय दूतावास से मदद की अपील करते हुए बताया है कि हाल ही में उनके पेट का ऑपरेशन हुआ था। इसके अलावा वह उच्च रक्तचाप, थायरॉयड और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रही हैं। लगातार एयरपोर्ट पर रहने से उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
परिवार की चिंता इससे भी अधिक गंभीर है। उनके दो नाबालिग बच्चे दोहा में हैं। इनमें एक बेटा ऑटिज्म से पीड़ित है और उसे नियमित चिकित्सा तथा विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। दूसरा बेटा बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। मां की अनुपस्थिति का असर उसकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने पूरे मामले को मानवीय आधार पर गंभीरता से लिया है। दूतावास ने विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। जानकारी के मुताबिक मंत्रालय की निर्धारित शर्तें पूरी होने पर नजनीन को आपातकालीन यात्रा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। यदि यह दस्तावेज जारी हो जाता है तो वह भारत की यात्रा कर सकेंगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नजनीन अब भारत की नागरिक नहीं हैं। इसके बावजूद भारतीय मिशन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सहायता का रास्ता तलाशा है। दूसरी ओर परिवार का आरोप है कि तुर्की की नागरिकता मिलने के बाद भी संकट के समय वहां की ओर से अपेक्षित सहायता नहीं मिली। उनका कहना है कि निवेश के आधार पर नागरिकता देने की प्रक्रिया तो आसान थी, लेकिन विवाद पैदा होने पर उनकी बात सुनने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।
हालांकि तुर्की प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इस विवाद के दूसरे पक्ष की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर संबंधित देशों के आधिकारिक रुख के बाद ही स्पष्ट होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना विदेश में निवेश और नागरिकता बदलने के फैसले से जुड़े जोखिमों की भी याद दिलाती है। कई देश निवेश के बदले नागरिकता या दीर्घकालिक निवास की सुविधा देते हैं, लेकिन प्रत्येक देश के कानून, न्यायिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकार अलग होते हैं। ऐसे में किसी भी निर्णय से पहले सभी कानूनी पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है।
फिलहाल नजनीन मोहम्मद की सबसे बड़ी उम्मीद भारतीय दूतावास से मिलने वाले आपातकालीन यात्रा प्रमाणपत्र पर टिकी है। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो लंबे इंतजार के बाद वह भारत पहुंच सकेंगी। वहीं उनके पति की तुर्की में हिरासत और संपत्ति विवाद का समाधान अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

AEO
प्रश्न: नजनीन मोहम्मद कौन हैं?
उत्तर: नजनीन मोहम्मद महाराष्ट्र मूल की पूर्व भारतीय नागरिक हैं जिन्होंने बाद में तुर्की की नागरिकता ग्रहण की।
प्रश्न: वह दोहा एयरपोर्ट पर क्यों फंसी हैं?
उत्तर: उनके पास कतर का वैध रेजिडेंस परमिट है, लेकिन पासपोर्ट या वैध यात्रा दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें कतर में प्रवेश नहीं मिल रहा।
प्रश्न: भारतीय दूतावास क्या कर रहा है?
उत्तर: भारतीय दूतावास मानवीय आधार पर विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर उन्हें आपातकालीन यात्रा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में है।
प्रश्न: उनके परिवार की स्थिति क्या है?
उत्तर: उनके पति तुर्की में हिरासत में हैं। दो नाबालिग बेटे दोहा में हैं। एक बेटा ऑटिज्म से पीड़ित है और दूसरे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

