ईरान ने बंद किया होर्मुज जलडमरूमध्य: अमेरिका को दी सीधी चुनौती, दुनिया पर ऊर्जा संकट
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तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ा तनाव, भारत ने जहाजों पर फायरिंग को लेकर जताई सख्त चिंता
वाशिंगटन/इस्लामाबाद | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
खाड़ी देशों में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। ईरान ने शनिवार को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति का यह प्रमुख रास्ता अब बंद रहेगा। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म नहीं करता, वह जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका ऐसी ‘ब्लैकमेलिंग’ के आगे नहीं झुकेगा।

ब्लैकमेलिंग की कोशिश बर्दाश्त नहीं: डोनाल्ड ट्रंप
वाशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान इस अहम जलमार्ग को बंद करके अमेरिका को डराने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने माना कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन ईरान का यह अड़ियल रुख स्वीकार्य नहीं है। ट्रंप ने दोहराया कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी शर्तों पर पीछे नहीं हटेगा।
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा ने वाशिंगटन पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी ‘अतिवादी’ मांगों को छोड़ने को तैयार नहीं है। खतीबजादा के मुताबिक, अमेरिका के साथ आमने-सामने की बातचीत के लिए फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की गई है।
समुद्र में बढ़ी हलचल: भारतीय जहाजों पर फायरिंग से हड़कंप
ईरान की इस घोषणा के साथ ही समुद्र में तनाव हिंसक रूप ले चुका है। समुद्री सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, कम से कम दो व्यापारिक जहाजों ने उन पर फायरिंग की रिपोर्ट दी है। ये जहाज जलमार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना का असर भारत पर भी पड़ा है।
मुंबई में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली को तलब किया गया। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी राजदूत के साथ बैठक की। मिस्री ने जहाजों पर हुई फायरिंग की घटना पर भारत की गहरी चिंता जताई। उन्होंने राजदूत से कहा कि भारत की ओर आने वाले जहाजों को बिना किसी रुकावट के रास्ता दिया जाए। भारत ने ईरान से इस मामले में जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की अपील की है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपनी नौसेना को तैयार रहने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ईरानी नौसेना अपने दुश्मनों को ‘कड़वी शिकस्त’ देने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान का दावा है कि अमेरिका का बंदरगाहों को ब्लॉक करना संघर्ष विराम का उल्लंघन है।
#WATCH | हैदराबाद | होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय झंडे वाले दो जहाजों पर हुई गोलीबारी की घटना पर, भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, "ईरान और भारत के बीच रिश्ते बहुत मजबूत हैं और मुझे इस घटना के बारे में कुछ नहीं पता जिसका आपने जिक्र किया… pic.twitter.com/KPvdJHJfTT
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 18, 2026
लेबनान और फ्रांस के बीच बढ़ा विवाद
इधर खाड़ी के दूसरे मोर्चे पर भी तनाव कम नहीं हो रहा है। इजरायल ने संघर्ष विराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान पर हमले तेज कर दिए हैं। इजरायल का कहना है कि उसने वहां एक ‘येलो लाइन’ (पीली रेखा) स्थापित कर दी है। यह ठीक उसी तरह की पाबंदी है जैसी गाजा में लगाई गई थी।
इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लेबनान में एक फ्रांसीसी शांति रक्षक सैनिक की मौत के लिए हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया है। हिजबुल्लाह ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। इन घटनाओं ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ा दी है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान की शर्तें
शनिवार को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक बड़ा खुलासा किया। ईरान ने बताया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया था। उन्होंने मध्यस्थ के रूप में अमेरिका के कुछ नए प्रस्ताव ईरान के सामने रखे हैं।
ईरान फिलहाल इन प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। हालांकि तेहरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका अपनी बेजा मांगें छोड़ेगा। ईरान का कहना है कि जब तक क्षेत्र में स्थायी शांति नहीं होती, होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूर्ण नियंत्रण रहेगा। ईरान ने अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने और ट्रांजिट सर्टिफिकेट जारी करने की योजना भी बना ली है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वह रास्ता है जहां से वैश्विक तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
फिलहाल वाशिंगटन ने पाकिस्तान के जरिए भेजे गए किसी भी नए प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ट्रंप प्रशासन का पूरा जोर अभी ईरान पर दबाव बनाए रखने पर है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह संकट कूटनीति से सुलझेगा या समुद्र में एक नया युद्ध शुरू होगा।

