ईरान–इज़रायल युद्ध LIVE: खामेनेई की ‘हत्या’ का दावा, तेहरान का खंडन, 200 विमानों से 500 ठिकानों पर हमला
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई, तेहरान
पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण युद्ध की आग में घिर गया है। अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के बाद हालात विस्फोटक हो गए हैं। इज़रायली अधिकारियों और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei मारे गए हैं। हालांकि ईरान ने इस दावे को सख्ती से खारिज करते हुए कहा है कि खामेनेई “मैदान में डटे हुए हैं” और देश का नेतृत्व कर रहे हैं।
तेहरान समेत कई शहरों में जबरदस्त धमाकों की खबर है। दक्षिणी ईरान में एक स्कूल पर हमले में 80 से अधिक लोगों के मारे जाने की सूचना है, जबकि ईरानी रेड क्रिसेंट के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में 24 प्रांतों में कम से कम 201 मौतों की पुष्टि की गई है।
खामेनेई क्यों हैं मुख्य निशाने पर?
1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई देश की सरकार, सेना और न्यायपालिका पर अंतिम नियंत्रण रखते हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से वे अमेरिका और इज़रायल के कट्टर आलोचक रहे हैं।
इज़रायल और अमेरिका की रणनीति का अहम हिस्सा “ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना” बताया जा रहा है। उनका मानना है कि खामेनेई को हटाने से मौजूदा शासन ढह सकता है और सत्ता संरचना कमजोर पड़ सकती है।
इज़रायल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा है कि “खामेनेई जैसे व्यक्ति को अस्तित्व में रहने का कोई अधिकार नहीं है।” वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संकेत दिया है कि वे इस संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करना चाहते हैं।
खामेनेई कहाँ हैं? रहस्य गहराया
हमलों के बाद खामेनेई के ठिकाने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से उन्हें तेहरान से किसी अज्ञात और अत्यंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।
ईरानी मीडिया का कहना है कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और सैन्य व राजनीतिक फैसलों की कमान संभाले हुए हैं।
200 युद्धक विमान, 500 ठिकाने: अब तक का सबसे बड़ा हवाई अभियान
Israel Defense Forces (आईडीएफ) ने दावा किया है कि उसने ईरानी धरती पर अपने इतिहास का सबसे बड़ा हवाई हमला किया।
करीब 200 अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने पश्चिमी और मध्य ईरान में कम से कम 500 लक्ष्यों पर हमले किए। इनमें वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल प्रक्षेपण स्थल और सामरिक सैन्य अड्डे शामिल थे।
आईडीएफ के अनुसार, यह अभियान खुफिया जानकारी के आधार पर सावधानीपूर्वक योजना बनाकर चलाया गया। सैकड़ों विमानों ने एक साथ अलग-अलग क्षेत्रों में बमबारी की, जिससे ईरान की जवाबी क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
इज़रायली वायुसेना का दावा है कि इस हमले के बाद ईरानी हवाई क्षेत्र में उसकी पकड़ मजबूत हुई है।
तबरीज़ में ‘विशेष अभियान’
पश्चिमी ईरान के तबरीज़ क्षेत्र में एक विशेष मिसाइल इकाई को निशाना बनाया गया। इज़रायल का आरोप है कि यह इकाई नागरिक क्षेत्रों पर दर्जनों मिसाइलें दागने की तैयारी में थी।
इज़रायली सेना का कहना है कि इस कार्रवाई से उसके नागरिकों और विमानों के लिए एक बड़ा खतरा टल गया है। साथ ही उसने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में भी इस तरह के अभियान जारी रह सकते हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई: कई देशों में हमले
ईरान ने भी पलटवार करते हुए इज़रायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर, यूएई, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, सऊदी अरब और इराक में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को लक्ष्य बनाया गया।
क्षेत्र के कई देशों ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
ट्रम्प का सख्त रुख
डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि उन्हें खामेनेई के ठिकाने की जानकारी है और यदि वे चाहें तो उन्हें निशाना बनाना कठिन नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका “ईरान में बड़े सैन्य अभियान” शुरू कर चुका है।
ट्रम्प ने ईरानी जनता से सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की है। उनका कहना है कि ईरान की नौसेना और मिसाइल प्रणाली को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा ताकि शासन परिवर्तन संभव हो सके।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
परमाणु वार्ता पर गहरा असर
इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही कूटनीतिक बातचीत लगभग ठप पड़ गई है। पहले ही तनावपूर्ण माहौल में चल रही वार्ता अब अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ती दिख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की नीति जारी रही, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध से आगे बढ़कर व्यापक अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले सकता है।
मानवीय संकट गहराया
दक्षिणी ईरान में एक स्कूल पर हमले में 80 से अधिक लोगों की मौत की खबर ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। रेड क्रिसेंट के अनुसार 24 प्रांतों में 201 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।
अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
आगे क्या?
क्या खामेनेई वास्तव में निशाने पर हैं या यह रणनीतिक दुष्प्रचार है?
क्या ईरान का नेतृत्व सुरक्षित है?
क्या यह संघर्ष पूर्ण युद्ध की दिशा में बढ़ रहा है?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद नाजुक हैं और दुनिया की निगाहें तेहरान, तेल अवीव और वॉशिंगटन पर टिकी हैं।
स्थिति तेजी से बदल रही है। जैसे-जैसे घटनाक्रम सामने आएंगे, यह स्पष्ट होगा कि यह टकराव सीमित सैन्य अभियान है या एक लंबे और व्यापक युद्ध की शुरुआत।

