ईरान-ट्रंप तनाव: एयर डिफेंस सक्रिय, युद्ध पर बढ़ता वैश्विक संकट
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर मध्य पूर्व को वैश्विक चिंता के केंद्र में ला खड़ा किया है। ताज़ा घटनाक्रम में ईरान ने अपने हवाई रक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया, जिससे क्षेत्र में संभावित टकराव के संकेत और गहरे हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी कांग्रेस की समयसीमा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वॉशिंगटन में राजनीतिक खींचतान भी तेज हो गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान में गुरुवार देर रात एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया गया, जिसने करीब 20 मिनट तक छोटे विमानों और ड्रोन जैसी संदिग्ध गतिविधियों का मुकाबला किया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब सामान्य हो गई है, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में सुरक्षा खतरे लगातार बने हुए हैं।
अमेरिका की ओर से स्थिति और जटिल होती नजर आ रही है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान के साथ हालिया संघर्षविराम के चलते कांग्रेस से सैन्य अनुमति लेने की 60 दिन की समयसीमा प्रभावी रूप से रुक गई है। हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं, जो अमेरिका की आंतरिक राजनीति में भी तनाव पैदा कर रहे हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान इस संकट में मजबूत स्थिति में है और वह अपनी परमाणु एवं मिसाइल क्षमताओं की रक्षा करता रहेगा। साथ ही, अमेरिका द्वारा समुद्री नाकेबंदी की चेतावनी को भी सिरे से खारिज कर दिया गया है।
इस टकराव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची है, जिससे ऊर्जा संकट की आशंका और गहरा गई है।
अमेरिका अब अपने सहयोगी देशों और शिपिंग कंपनियों के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि फारस की खाड़ी और खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने अपने कुछ नाटो सहयोगियों—जैसे इटली और स्पेन—को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई का समर्थन नहीं किया, तो वहां से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर विचार किया जा सकता है। इससे पश्चिमी गठबंधन में भी दरार के संकेत मिल रहे हैं।
इजरायल की ओर से भी सख्त रुख देखने को मिल रहा है। इजरायली रक्षा अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने किसी भी हमले का “कड़ा और लंबा जवाब” देने की चेतावनी दी है।
इन सबके बीच, ईरान की आम जनता इस संकट का सबसे बड़ा बोझ झेल रही है। आर्थिक हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। वार्ता प्रक्रिया ठप पड़ने से लोगों में निराशा बढ़ रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बताया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि वह हस्तक्षेप कर शांति बहाली के प्रयासों को तेज करे, ताकि इस बढ़ते संकट को वैश्विक युद्ध में बदलने से रोका जा सके।

