ईरान अमेरिका शांति समझौता आज, होर्मुज खुलने के संकेत
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वॉशिंगटन/दुबई:
मध्य पूर्व में कई महीनों से जारी संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लंबी बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच एक बड़े समझौते की संभावना मजबूत हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध समाप्त करने वाला समझौता रविवार को हस्ताक्षरित हो सकता है। वहीं ईरान ने इस समयसीमा पर सहमति नहीं जताई है, लेकिन यह संकेत जरूर दिया है कि समझौता अब ज्यादा दूर नहीं है।
ट्रंप ने कहा है कि समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब इस समुद्री मार्ग पर जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया हुआ है।
मध्य पूर्व युद्ध, ईरान अमेरिका संबंध, होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि यह समझौता सफल होता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खुल जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आगे चलकर अमेरिका ईरान की परमाणु सामग्री को अपने नियंत्रण में लेकर उसे नष्ट करेगा।
🚨 JUST IN: US official says the Strait of Hormuz will OPEN and the blockade will LIFT upon signing of the peace deal, which President Trump says is tomorrow
— MAGA pascal (@JFKPASCALNuq06) June 13, 2026
Iran MUST fulfill their end of the deal to get their assets back: NO FUNDS upon signature, no Hussein Obama failures…
हालांकि तेहरान का रुख कुछ अलग दिखाई दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि समझौते की तारीख अभी तय नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रविवार को हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में ऐसा होना संभव है।
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यह बयान बताता है कि दोनों देशों के बीच मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। इसके बावजूद वार्ता में शामिल देशों और मध्यस्थों का मानना है कि बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि समझौता पहले से कहीं अधिक करीब है। उनके अनुसार अगले चौबीस घंटों में दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा सकता है और उसके बाद तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी संकेत दिया है कि समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी की जा रही है। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि लंबे समय से रुकी हुई वार्ता अब परिणाम की ओर बढ़ रही है।
हालांकि समझौते के कई बिंदुओं पर अब भी अस्पष्टता बनी हुई है। दोनों पक्ष अलग अलग दावे कर रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि अमेरिका और ईरान दोनों अपने समर्थकों के सामने यह दिखाना चाहते हैं कि वे बातचीत में कमजोर नहीं पड़े हैं।
सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तेल और गैस पहुंचाने का प्रमुख रास्ता है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण मजबूत कर दिया था। कई जहाजों के लिए विशेष अनुमति व्यवस्था लागू की गई थी।
ईरान का कहना है कि भविष्य में भी इस जलमार्ग के प्रशासन में उसकी प्रमुख भूमिका बनी रहेगी। तेहरान इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
दूसरी तरफ अमेरिका का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग किसी एक देश के प्रभाव में नहीं रहना चाहिए। यही कारण है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा चल रही है।
तनाव के बीच शनिवार को होर्मुज क्षेत्र में नई सैन्य गतिविधियां भी देखने को मिलीं। अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान ने दावा किया कि ईरान की ओर से कई ड्रोन वाणिज्यिक जहाजों की दिशा में भेजे गए थे। अमेरिकी सेना के अनुसार इन सभी ड्रोन को मार गिराया गया।
हालांकि इन घटनाओं के बावजूद बातचीत जारी रही। यही वजह है कि कूटनीतिक हल की उम्मीदें बनी हुई हैं।
समझौते का दूसरा बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। पिछले कई वर्षों से यही विषय अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का सबसे बड़ा कारण रहा है।
ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। वह ऊर्जा और वैज्ञानिक शोध के लिए परमाणु तकनीक का उपयोग करना चाहता है। दूसरी ओर अमेरिका, इजराइल और कई पश्चिमी देशों को आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार क्षमता विकसित करना चाहता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि संवर्धित यूरेनियम का समाधान ईरान के भीतर ही निकाला जाना चाहिए। उनके अनुसार इस सामग्री को पतला करके सुरक्षित बनाया जा सकता है।
लेकिन ट्रंप प्रशासन का रुख अलग है। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी कह चुके हैं कि संवर्धित परमाणु सामग्री को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। अब उन्होंने दोहराया है कि अमेरिका भविष्य में इस सामग्री को अपने नियंत्रण में लेकर नष्ट करेगा।
इजराइल भी इसी मांग का समर्थन कर रहा है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि किसी भी अंतिम समझौते में ईरान की संवर्धित परमाणु सामग्री को हटाना शामिल होना चाहिए।
इस बीच क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दक्षिणी लेबनान में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। इजराइली सैन्य कार्रवाई भी जारी है। ईरान का कहना है कि यदि कोई स्थायी युद्धविराम समझौता होता है तो उसमें लेबनान की स्थिति को भी शामिल किया जाना चाहिए।
उधर ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार चार जुलाई से तेहरान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नौ जुलाई को मशहद में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
ईरान के भीतर आम लोगों की राय बंटी हुई दिखाई देती है। कुछ नागरिकों को उम्मीद है कि समझौते से आर्थिक प्रतिबंध कम होंगे और रोजगार तथा व्यापार के अवसर बढ़ेंगे। वहीं कई लोग इस बात को लेकर आशंकित हैं कि राजनीतिक समझौते के बाद भी आम जनता की स्थिति में तत्काल सुधार नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता सफल होता है तो वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी। ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आ सकती है। मध्य पूर्व में तनाव कम होगा। साथ ही कई वर्षों से चले आ रहे परमाणु विवाद के समाधान की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
अब दुनिया की नजरें अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष अपने मतभेद दूर कर ऐतिहासिक समझौते तक पहुंचते हैं या फिर वार्ता एक बार फिर नई चुनौतियों में फंस जाती है।

AEO Quick Answers
क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने जा रहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार समझौता जल्द हो सकता है। ईरान ने भी आने वाले दिनों में इसकी संभावना से इनकार नहीं किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है। इसके खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।
समझौते में सबसे बड़ा विवाद क्या है?
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण प्रमुख विवाद के मुद्दे हैं।
इस समझौते का भारत पर क्या असर होगा?
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर हो सकती है। इससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों को लाभ मिल सकता है।

