ईरान-अमेरिका वार्ता: हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के बीच पाकिस्तान में ‘पीस प्लान’ पर रार
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इस्लामाबाद/वॉशिंगटन
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी सैन्य गतिरोध और हजारों लोगों की जान लेने वाली जंग को रोकने की वैश्विक कोशिशें एक बार फिर नाजुक मोड़ पर खड़ी हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लाबाद में शनिवार को ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष शांति वार्ता का केंद्र बनी, लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते कूटनीतिक गलियारों में तनाव की लकीरें गहरी हो गईं।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान की मेजबानी में अपनी ‘सैद्धांतिक शर्तों’ को सामने रखा, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह “अपर्याप्त” है। हालांकि, कुछ ही मिनटों बाद ट्रंप ने एक और बेहतर प्रस्ताव मिलने का दावा कर भविष्य की संभावनाओं को खुला रखा है।

ट्रंप का सख्त रुख: “सारे पत्ते हमारे पास हैं”
शनिवार देर रात एयर फोर्स वन पर सवार होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि वह कूटनीतिक शिष्टाचार के नाम पर समय बर्बाद नहीं करेंगे। उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल (जिसमें स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल थे) को पाकिस्तान जाने से रोक दिया।
ट्रंप ने कहा:
“मैंने अपने लोगों से कहा कि आपको 18 घंटे की लंबी उड़ान भरकर वहां (इस्लामाबाद) जाने की जरूरत नहीं है। हमारे पास सारे पत्ते मौजूद हैं। वे जब चाहें हमें फोन कर सकते हैं, लेकिन हम वहां बैठकर ‘कुछ नहीं’ पर बात करने के लिए समय बर्बाद नहीं करेंगे।”
ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान ने एक संशोधित शांति योजना भेजी थी, जो उन्हें पसंद नहीं आई। लेकिन उनके रद्द करने के 10 मिनट के भीतर ही एक और नया पेपर आया, जो पहले से काफी बेहतर था। ट्रंप की सबसे बड़ी शर्त स्पष्ट है: ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।

अब्बास अराघची का मिशन और पाकिस्तान की भूमिका
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। ईरान का रुख सख्त है; उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिका की “अत्यधिक मांगों” (Maximalist Demands) को स्वीकार नहीं करेंगे।
अराघची ने पाकिस्तान यात्रा को ‘सफल’ बताया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी और “समुद्री डकैती” बंद नहीं करता, तब तक तनाव कम होना मुश्किल है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण उनकी ‘निश्चित रणनीति’ है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा: तेल की कीमतों में उछाल
इस युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है। आंकड़ों के अनुसार:
- शिपिंग डेटा: युद्ध से पहले रोजाना लगभग 130 जहाज हॉर्मुज पार करते थे, जो अब घटकर केवल 5 रह गए हैं।
- तेल की कीमतें: शांति वार्ता की अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड वायदा में इस सप्ताह 16% का उछाल आया है।
- आपूर्ति श्रृंखला: दुनिया का 20% तेल इसी मार्ग से गुजरता है। ईरान की नाकाबंदी और अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात को रोकने की कोशिशों ने महंगाई को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

युद्ध का घटनाक्रम: 28 फरवरी से अब तक
यह संघर्ष 28 फरवरी, 2026 को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के साथ शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, खाड़ी देशों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। वर्तमान में एक अस्थायी युद्धविराम लागू है, जिसे ट्रंप ने हाल ही में बढ़ाया है ताकि बातचीत को समय मिल सके।
हालांकि, दक्षिण लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है, जो इस शांति वार्ता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में पूर्ण युद्धविराम बातचीत के लिए अनिवार्य शर्त है।
प्रमुख घटनाक्रम: एक नजर में
| समय (25 अप्रैल 2026) | घटनाक्रम |
| 11:53 PM | ईरान ने नया शांति प्रस्ताव भेजा, ट्रंप ने ‘अपर्याप्त’ बताकर बेहतर की मांग की। |
| 09:41 PM | रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ‘पूर्ण नियंत्रण’ का दावा किया। |
| 08:59 PM | अराघची ने पाकिस्तान यात्रा को फलदायी बताया, लेकिन अमेरिका से सीधे मिलने से इनकार किया। |
| 04:30 PM | तेहरान हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर से शुरू हुईं। |
क्या युद्ध रुकेगा?
वर्तमान स्थिति ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) की है। एक तरफ अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का कहना है कि ईरान के पास “समझदारी से चुनने का एक मौका” है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी सैन्य क्षमता और हॉर्मुज पर नियंत्रण का प्रदर्शन कर रहा है।
पाकिस्तान एक “ईमानदार सूत्रधार” (Honest Facilitator) की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ट्रंप का यह बयान कि “हम फोन पर बात करेंगे” यह दर्शाता है कि अब गेंद पूरी तरह से तेहरान के पाले में है। यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर ठोस आश्वासन देता है, तो ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को इस युद्ध की आग से राहत मिल पाएगी।
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