ईरान अमेरिका तनाव बढ़ा, खाड़ी में बढ़ी बेचैनी
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मध्य पूर्व एक बार फिर तनाव के खतरनाक मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है। Iran US conflict, Israel Hezbollah tension, Strait of Hormuz crisis और खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। गुरुवार को हालात तब और गंभीर हो गए जब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने कुवैत पर हुए कथित मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। इसी दौरान अमेरिका और ईरान के बीच भी सैन्य टकराव तेज होता दिखा। उधर इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले और बढ़ा दिए।
घटनाओं की यह कड़ी ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया पहले ही Middle East crisis 2026, Iran Israel war, US Iran latest news और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता में है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का असर अब वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखने लगा है।
कुवैत पर हमले को लेकर UAE का सख्त रुख
गुरुवार सुबह कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। बताया गया कि ये हमले देश के हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। इसके बाद UAE ने आधिकारिक बयान जारी कर इस कार्रवाई की निंदा की।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुवैत की संप्रभुता पर हमला किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। बयान में यह भी कहा गया कि UAE अपने पड़ोसी देश के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है।
हालांकि ईरान की ओर से इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन क्षेत्रीय माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।
होरमुज के पास अमेरिका और ईरान आमने सामने
इस बीच Strait of Hormuz के आसपास हालात और गर्म हो गए। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी बलों ने चार ईरानी ड्रोन को मार गिराया। दावा किया गया कि ये ड्रोन अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे।
अमेरिका का कहना है कि उसने दक्षिणी ईरानी शहर Bandar Abbas में एक कंट्रोल स्टेशन को भी निशाना बनाया, जहां से एक और ड्रोन लॉन्च होने वाला था।
वॉशिंगटन ने इन हमलों को “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया है। लेकिन ईरान ने इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन करार दिया। ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
यह तनाव सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। इसका असर समुद्री व्यापार पर भी दिख रहा है।
होरमुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
Strait of Hormuz news इस समय दुनिया भर में सुर्खियों में है। कारण साफ है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि सुरक्षा बलों ने चार जहाजों को रोका, जो कथित तौर पर बिना अनुमति क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे। चेतावनी देने के बाद फायरिंग की गई और जहाजों को पीछे लौटना पड़ा।
उधर अमेरिका ने ईरान की उस एजेंसी पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है जो होरमुज से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण और शुल्क लगाने की कोशिश कर रही थी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर होरमुज में हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका सीधा असर global oil prices, petrol prices और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
ट्रंप का सख्त संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump Iran policy को लेकर फिर सख्त नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत नाकाम रही तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभी तक ईरान की तरफ से संतोषजनक प्रस्ताव नहीं मिला है।
हालांकि व्हाइट हाउस ने उन रिपोर्ट्स को खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई प्रारंभिक समझौता तैयार हो चुका है।
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ईरान के सर्वोच्च नेता का बयान
तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Mojtaba Khamenei का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान को कमजोर करना चाहते हैं।
ईरानी सरकारी मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक दबाव, प्रचार और राजनीतिक रणनीति के जरिए देश को घुटनों पर लाने की कोशिश की जा रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान पहले से ही आर्थिक दबाव, प्रतिबंधों और सैन्य तनाव का सामना कर रहा है।
लेबनान में फिर भड़की जंग
इसी दौरान Israel Hezbollah conflict ने भी नया मोड़ ले लिया। इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों और लेबनान के शहर टायर में कई हवाई हमले किए।
इजरायली सेना का कहना है कि उसका निशाना हिजबुल्लाह का एक मिसाइल कमांडर था। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक दक्षिणी लेबनान में हुए हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कई लोगों की मौत हुई है।
हिजबुल्लाह की ओर से ड्रोन हमले की खबर भी सामने आई, जिसमें एक इजरायली सैनिक की मौत होने का दावा किया गया।
हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों को “कॉम्बैट जोन” घोषित कर लोगों से इलाका खाली करने को कहा है।
बाजारों पर असर दिखना शुरू
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर दुनिया के शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। Oil prices today में तेजी दर्ज की गई। कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ा, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
यूरोप और एशिया के कई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की चिंता साफ नजर आई।
क्या फिर बड़े युद्ध की आशंका?
सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या मध्य पूर्व फिर किसी बड़े युद्ध की तरफ बढ़ रहा है?
अभी इसका जवाब साफ नहीं है। लेकिन हालात निश्चित तौर पर चिंताजनक हैं। एक तरफ अमेरिका और ईरान आमने सामने हैं। दूसरी तरफ इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच टकराव तेज हो रहा है। खाड़ी देश भी सतर्क हो गए हैं।
कुवैत पर हमले की खबर और UAE की प्रतिक्रिया ने संकेत दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा अब पहले से ज्यादा संवेदनशील हो चुकी है।
फिलहाल दुनिया की नजरें वॉशिंगटन, तेहरान, तेल अवीव और खाड़ी देशों पर टिकी हैं। क्योंकि आने वाले कुछ दिन तय कर सकते हैं कि यह तनाव बातचीत में बदलेगा या फिर एक नए बड़े संकट की शुरुआत करेगा।


