ईरान के मिसाइल हमलों से दहला इजरायल: खंडहर बनी इमारतें, बंकरों में कैद हुए नागरिक
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तेल अवीव/यरूशलेम:
गाजा में महीनों तक तबाही मचाने वाले इजरायल के अपने शहर अब युद्ध की विभीषिका झेल रहे हैं। ईरान और हिजबुल्ला के चौतरफा हमलों ने इजरायल के रक्षा कवच ‘आयरन डोम’ की सीमाओं को चुनौती दी है, जिससे देश के कई हिस्से खंडहर में तब्दील होते दिख रहे हैं। स्थिति यह है कि इजरायल के प्रमुख शहरों में दिन-रात सायरन गूंज रहे हैं और लोग अपनी जान बचाने के लिए बंकरों की तलाश में भटक रहे हैं, जो अब कम पड़ने लगे हैं।

उत्तरी सीमा पर हिजबुल्ला का कहर: एक किसान की मौत
इजरायल के उत्तरी क्षेत्र ‘किबुत्ज मिसगव आम’ में रविवार सुबह हिजबुल्ला द्वारा दागे गए रॉकेट की चपेट में आने से 60 वर्षीय इजरायली किसान ओफर मोस्कोविट्ज़ की मौत हो गई। मोस्कोविट्ज़, जो किबुत्ज के प्रवक्ता भी थे, अपनी एवोकैडो की खेती की देखभाल कर रहे थे, तभी रॉकेट हमले ने उनके वाहन को आग के हवाले कर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से हिजबुल्ला के हमले में मारे जाने वाले वह पहले इजरायली नागरिक हैं। मोस्कोविट्ज़ ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही सीमा पर जीवन की तुलना ‘रशियन रूलेट’ से की थी, जहाँ हर पल मौत का साया मंडराता रहता है।
ईरान के क्लस्टर बमों से मध्य इजरायल में हाहाकार
ईरानी सेना ने इजरायल के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाते हुए घातक बैलिस्टिक मिसाइलों और क्लस्टर बमों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। रविवार को तेल अवीव और पेटाह टिकवा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ईरानी मिसाइलों ने ‘बोम्बलेट्स’ (छोटे बम) बरसाए, जिससे 15 लोग घायल हो गए। जाफा में एक मिसाइल सीधे रिहायशी इमारत पर गिरी, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
इजरायली वायु सेना (IAF) की जांच में सामने आया है कि ईरान ‘गदर’ (Ghadr) परिवार की मिसाइलों का उपयोग कर रहा है। शनिवार रात डिमोना और अराद शहरों में हुए हमलों में लगभग 100 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें कई बच्चे शामिल हैं। मलबे के कारण सड़कें और इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे राहत कार्य में बाधा आ रही है।
शिक्षा व्यवस्था ठप: स्कूल और कैंप बंद
युद्ध की भयावहता को देखते हुए शिक्षा मंत्री योव किश ने पूरे देश में स्कूलों को बंद करने और ‘रिमोट लर्निंग’ (ऑनलाइन शिक्षा) शुरू करने का आदेश दिया है। आगामी ‘पासोवर’ (Passover) की छुट्टियों के दौरान आयोजित होने वाले सभी कैंप रद्द कर दिए गए हैं। ऋषोन लेज़ियन में एक डे-केयर सेंटर पर हुए क्लस्टर बम हमले के बाद यह कड़ा फैसला लिया गया। यरूशलेम, तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों में बच्चे पिछले एक महीने से स्कूलों से दूर हैं।
नेतन्याहु के खिलाफ बढ़ता जनाक्रोश
जहाँ एक ओर इजरायली सेना लेबनान के भीतर घुसकर हिजबुल्ला के कमांडरों (जैसे राडवान फोर्स के अबू खलील बरजी) को मारने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहु को अपने ही देश में कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
अराद के प्रभावित इलाकों का दौरा करते हुए नेतन्याहु ने नागरिकों से बंकरों में रहने की अपील की, लेकिन जनता में इस बात को लेकर गुस्सा है कि सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। इजरायली मीडिया आउटलेट ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ के अनुसार, लोग अब सड़कों पर उतरकर नेतन्याहु की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
| युद्ध के ताजा आंकड़े (22 मार्च, 2026 तक) | संख्या/विवरण |
| ईरानी हमलों में मारे गए नागरिक | 15 (इजरायली व विदेशी) |
| अस्पताल में भर्ती कुल घायल | 4,564 |
| विस्थापित लेबनानी नागरिक | 10 लाख से अधिक |
| नष्ट किए गए बुनियादी ढांचे | लिटानी नदी के पुल और सीमावर्ती गांव |
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लेबनान में इजरायल की ‘विनाशकारी’ रणनीति
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने सेना को निर्देश दिया है कि लेबनान के सीमावर्ती गांवों में घरों को उसी तरह जमींदोज कर दिया जाए जैसे गाजा के बीट हनौन और रफ़ाह में किया गया था। इजरायली वायु सेना ने लेबनान की लिटानी नदी पर स्थित ‘कास्मिया पुल’ को नष्ट कर दिया है ताकि हिजबुल्ला की रसद रोकी जा सके। दूसरी ओर, फ्रांस और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन शांति वार्ता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इजरायल ने फिलहाल किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है।
ईरान के इस आक्रामक रुख ने न केवल इजरायल बल्कि अंतरराष्ट्रीय सैन्य ठिकानों (जैसे डिएगो गार्सिया) को भी असुरक्षित बना दिया है। फिलहाल, मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है, जिसका अंत निकट भविष्य में दिखाई नहीं दे रहा।

