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सर सैय्यद नेशनल मूट कोर्ट में जामिया का दबदबा: बेस्ट मेमोरियल अवार्ड जीता

नई दिल्ली

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) के लॉ फैकल्टी के छात्रों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में आयोजित प्रतिष्ठित ‘तीसरी सर सैय्यद नेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026’ में जामिया की टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। इस जीत ने न केवल विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है बल्कि छात्रों की कानूनी समझ और रिसर्च की गहराई को भी साबित किया है।

यह प्रतियोगिता मार्च के आखिरी हफ्ते में आयोजित की गई थी। इसमें देशभर के दिग्गज लॉ स्कूलों और विश्वविद्यालयों की टीमों ने हिस्सा लिया था। कड़े मुकाबले के बीच जामिया के छात्रों ने अपनी दलीलों और तैयारी से जजों को बेहद प्रभावित किया।

शानदार टीम वर्क और बेहतरीन रिसर्च

जामिया की इस विजेता टीम में तीन होनहार छात्र शामिल थे। अरीब सिद्दीकी (द्वितीय वर्ष) ने पहले स्पीकर के तौर पर कमान संभाली। करीना दानू (चतुर्थ वर्ष) दूसरी स्पीकर रहीं और अम्मान खान (द्वितीय वर्ष) ने रिसर्चर की भूमिका निभाई। इन तीनों के तालमेल ने टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुँचाया।

प्रतियोगिता के दौरान सबसे खास पल तब आया जब जामिया की टीम को ‘बेस्ट मेमोरियल अवार्ड’ से नवाजा गया। किसी भी मूट कोर्ट में यह अवार्ड सबसे कठिन माना जाता है। यह अवार्ड छात्रों के ड्राफ्टिंग कौशल, कानूनी बारीकियों के विश्लेषण और उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण है। यह मेमोरियल इस बात का सबूत है कि जामिया के छात्र केवल बोलने में ही नहीं बल्कि कानूनी दस्तावेजों को तैयार करने में भी माहिर हैं।

डीन प्रोफेसर गुलाम यजदानी ने दी बधाई

लॉ फैकल्टी के डीन प्रोफेसर (डॉ.) गुलाम यजदानी ने छात्रों की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों के समर्पण और उनकी लगन का नतीजा है। प्रोफेसर यजदानी के नेतृत्व में जामिया की लॉ फैकल्टी लगातार रिसर्च और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर दे रही है।

डीन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मैं अपने छात्रों को इस शानदार उपलब्धि पर तहे दिल से बधाई देता हूँ। उनका प्रदर्शन न केवल व्यक्तिगत उत्कृष्टता को दर्शाता है बल्कि हमारी फैकल्टी के शैक्षणिक माहौल की भी जीत है। ऐसी उपलब्धियां हमें समाज के प्रति जिम्मेदार और कुशल कानूनी पेशेवर तैयार करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

छात्रों के लिए प्रेरणा बनी यह जीत

मूट कोर्ट कमेटी ने भी टीम को संस्थान का नाम रोशन करने के लिए बधाई दी है। कमेटी के सदस्यों का मानना है कि इस जीत से अन्य छात्रों को भी मूटिंग और लीगल रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। जामिया की लॉ फैकल्टी का इतिहास हमेशा से ही मेधावी छात्रों का रहा है। इस नई जीत ने उस विरासत को और मजबूत किया है।

इस प्रतियोगिता में जीत हासिल करना आसान नहीं था। देश के सबसे नामी लॉ कॉलेजों के सामने अपनी बात रखना और बेस्ट मेमोरियल का खिताब जीतना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन अरीब, करीना और अम्मान की तिकड़ी ने साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।

जामिया मिलिया इस्लामिया का लॉ विभाग अब न केवल दिल्ली बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान बना चुका है। छात्रों की यह कामयाबी इसी शैक्षणिक मजबूती का नतीजा है। अब इस टीम की नजरें भविष्य की अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। फिलहाल पूरे विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है और विजेता छात्रों को हर तरफ से बधाइयां मिल रही हैं।