अमेरिका और ईरान में अस्थायी युद्धविराम, कतर में होगी अहम बैठक
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, रियाद
मिडल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रहे सीधे सैन्य हमलों पर फिलहाल के लिए रोक लग गई है। दोनों ही देश अस्थायी रूप से अपने कदम पीछे खींचने पर सहमत हो गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस सहमति का सबसे बड़ा मकसद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित और मुफ्त आवाजाही को सुनिश्चित करना है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में एक आपातकालीन बैठक करने जा रहे हैं। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य इलाके में बढ़े तनाव को कम करना और किसी बड़े युद्ध की आशंका को टालना है। हालांकि इस कूटनीतिक हलचल के बीच भी इलाके में जमीनी हालात अब भी काफी संवेदनशील बने हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी सहमति
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान ने एक दूसरे के ठिकानों पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। इन हमलों के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडराने लगा था। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अब दोनों पक्षों ने इन हमलों को पूरी तरह रोकने का फैसला किया है। अमेरिकी सेना की भाषा में कहें तो दोनों देशों ने सभी तरह की सैन्य गतिविधियों पर फिलहाल ‘स्टैंड डाउन’ यानी विराम लगा दिया है।
इस सहमति के बाद अब कमर्शियल जहाज बिना किसी डर के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर सकेंगे। यह रास्ता पूरी दुनिया के तेल व्यापार के लिए एक लाइफलाइन माना जाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का रास्ता खुला रखने के लिए यह अस्थायी कदम उठाना बेहद जरूरी था।
१७ जून के समझौते को बचाने की आखिरी कोशिश
दोनों देशों के बीच यह ताजा विवाद १७ जून को हुए एक नाजुक समझौते के बाद शुरू हुआ था। उस समझौते के तहत तेहरान इस बात पर राजी हुआ था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा। बदले में वाशिंगटन ने ईरान के बंदरगाहों पर लगी आर्थिक नाकेबंदी को हटाने का वादा किया था। लेकिन पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच फिर से हमले शुरू हो गए जिससे यह समझौता टूटने की कगार पर पहुंच गया था।
रविवार को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि दोनों पक्षों ने बातचीत की मेज पर लौटने से पहले सभी तरह की सैन्य कार्रवाई को रोकने का मन बना लिया है। सीएनएन ने भी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि मंगलवार को दोहा में होने वाली बैठक में इस समझौते को पूरी तरह लागू करने पर चर्चा होगी।
दक्षिण लेबनान में इजराइल की बड़ी कार्रवाई
एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की तैयारी चल रही है वहीं दूसरी तरफ इस पूरे विवाद से जुड़ा एक और मोर्चा सुलग रहा है। इजराइली सेना ने रविवार को दक्षिण लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह संगठन के एक बहुत बड़े और गहरे सुरंग नेटवर्क को धमाका करके उड़ा दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस कार्रवाई की जानकारी दी है।
इजराइली सरकार के अनुसार यह सुरंग २०० मीटर से अधिक लंबी थी और जमीन से करीब २५ मीटर की गहराई पर बनाई गई थी। इस सुरंग के भीतर सैकड़ों की संख्या में आधुनिक हथियार और कई मिसाइल लॉन्च पैड छिपाकर रखे गए थे। इजराइल का दावा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल सीधे इजराइल की मुख्य भूमि को निशाना बनाने के लिए किया जाना था।
हिजबुल्लाह ने दी इजराइल को खुली चेतावनी
इजराइल की इस बड़ी कार्रवाई के बाद लेबनान के सरकारी मीडिया ने इलाके में कई और हवाई हमलों की भी पुष्टि की है। इस पूरे घटनाक्रम पर हिजबुल्लाह की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। हिजबुल्लाह ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि इजराइल ने इस कार्रवाई के जरिए सीजफायर यानी युद्धविराम का सरेआम उल्लंघन किया है।
हिजबुल्लाह ने कहा कि वह अब तक इस युद्धविराम का पूरी तरह पालन कर रहा था लेकिन इजराइल की इस हरकत पर वह चुप नहीं बैठेगा। संगठन ने साफ तौर पर कहा है कि वह इजराइल के इन सभी उल्लंघनों पर पैनी नजर रख रहा है। हिजबुल्लाह के पास अपनी मातृभूमि और अपने लोगों की रक्षा के लिए इजराइल को करारा जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।
स्विट्जरलैंड समिट के बाद भी कूटनीति पर भरोसा
इन तमाम सैन्य हमलों और तनाव के बावजूद दोनों पक्षों के बीच तकनीकी बातचीत का सिलसिला पूरी तरह टूटा नहीं है। अमेरिकी प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि पिछले दिनों स्विट्जरलैंड के लेक लुसर्न में एक बड़ा शिखर सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था।
इस समिट के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव को रोकने वाले कम्युनिकेशन्स चैनल लगातार एक्टिव हैं। अमेरिकी अधिकारी ने साफ किया कि हालिया गोलाबारी के बाद भी किसी भी बैठक को रद्द नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के अधिकारी समझौते की शर्तों को जमीन पर उतारने के लिए तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेंगे।
खाड़ी के अन्य देश भी आए हमलों की जद में
यह पूरा विवाद उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई ड्रोन और मिसाइलें दाग दीं। ईरान ने यह कदम अमेरिका द्वारा उसके ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में उठाया था। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार ईरान के अधिकांश ड्रोन और मिसाइलों को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
कुछ मिसाइलें अपने टारगेट तक पहुंचने से पहले ही तकनीकी खराबी के कारण क्रैश हो गईं। इस हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि इस हमले ने बहरीन और कुवैत जैसे देशों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ा दी हैं जो अमेरिकी सेना के बेस की मेजबानी करते हैं।
अरब लीग ने की ईरान की कड़े शब्दों में निंदा
खाड़ी देशों पर हुए इन हमलों के बाद अरब लीग ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घेइत ने रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर बहरीन और कुवैत पर हुए ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और इन देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है। अरब लीग ने ईरान से मांग की है कि वह क्षेत्रीय शांति को खतरे में डालने वाली अपनी इन आक्रामक गतिविधियों को तुरंत बंद करे। लीग ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित करने के कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचाने के लिए पूरी तरह से ईरान ही जिम्मेदार है।
ईरान की क्षेत्रीय देशों को सख्त हिदायत
इन तमाम आरोपों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पड़ोसी देशों को एक सख्त संदेश भेजा है। ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार अराघची ने कहा कि क्षेत्र के किसी भी देश को अपनी धरती या अपने सैन्य ढांचे का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय सरकारों को याद दिलाया कि इलाके में शांति बनाए रखना उनकी भी जिम्मेदारी है। अगर कोई हमलावर देश ईरान के खिलाफ उनकी जमीन का इस्तेमाल करता है तो इसे एक गैरकानूनी कृत्य माना जाएगा और ईरान इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मंगलवार को कतर में होने वाली इस महाबैठक पर टिकी हुई हैं। कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश दोनों पक्षों को लगातार शांत रखने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना होगा कि दोहा की कूटनीति इस सुलगते हुए मिडल ईस्ट को शांत कर पाती है या नहीं।

