मदरसा इस्लाहुल बनात, दरभंगा : ‘सरकार का सौतेला बच्चा’ या ज्ञान की सच्ची पहचान?
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, पटना:
बिहार में मुसलमानों के एक वर्ग के बीच यह भ्रम फैला हुआ है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में मदरसों को खूब बढ़ावा मिल रहा है और वे फल-फूल रहे हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। यदि बिहार में मदरसों की वास्तविक स्थिति को देखना और समझना है, तो राज्य के पाँच मुस्लिम बहुल ज़िलों में से एक, दरभंगा के मदरसा इस्लाहुल बनात का जायज़ा लेना काफ़ी होगा।
इस मदरसे के संचालक मोहम्मद एजाज अहमद से जब बिहार सरकार द्वारा मदरसा शिक्षा को दिए जाने वाले कथित महत्व के बारे में पूछा गया, तो उनका कटाक्ष से भरा जवाब था: “यह मदरसा सरकार का सौतेला बच्चा है।”

हाल ही में, दिल्ली के न्यूज़ आउटलेट ‘लल्लनटॉप’ ने चुनावी माहौल के मद्देनज़र बिहार में मुसलमानों और मदरसों की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में बिहार के मदरसों की बदहाली की परतें खुल गईं और यह भी स्पष्ट हुआ कि मदरसों के संचालक कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित हैं। ऐसे ही विद्वान संचालकों में से एक हैं मोहम्मद एजाज अहमद।
‘लल्लनटॉप’ ने अपनी रिपोर्ट में एजाज अहमद का परिचय देते हुए कहा, “हम बिहार के लोग में मिलिए दरभंगा के मदरसा शिक्षक मोहम्मद एजाज़ से। वह बिहार में मदरसा बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं। उनसे मदरसों की शिक्षा, वहाँ के माहौल, सरकार से मिलने वाली मदद और मदरसों पर लगने वाले आरोपों पर बात हुई।”
दरभंगा के मदरसा इस्लाहुल बनात की वास्तविक स्थिति (Schools.org.in के अनुसार):
- स्थापना और प्रबंधन: मदरसा इस्लाहुल बनात सोभन लाल शाहपुर की स्थापना 1987 में हुई थी और इसका प्रबंधन वक्फ बोर्ड/मदरसा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त है।
- भौगोलिक स्थिति: यह ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है, जो बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड के अंतर्गत आता है।
- शैक्षणिक प्रोफाइल:
- कक्षाएँ: कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा दी जाती है।
- माध्यम: शिक्षा का माध्यम उर्दू है।
- प्रकार: यह सह-शिक्षा विद्यालय है।
- शिक्षक: यहाँ 10 पुरुष शिक्षक और केवल 1 महिला शिक्षक हैं।
- बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ:
- भवन: स्कूल का निजी भवन है जिसमें शिक्षण के लिए 7 अच्छी स्थिति वाली कक्षाएँ और गैर-शिक्षण गतिविधियों के लिए 2 अन्य कमरे हैं।
- शौचालय: लड़कों और लड़कियों, दोनों के लिए दो-दो कार्यरत शौचालय उपलब्ध हैं।
- अन्य सुविधाएँ: स्कूल में बिजली का कनेक्शन है, पीने के पानी का स्रोत (हैंडपंप) कार्यरत है, और स्कूल की चारदीवारी पक्की है।
- पुस्तकालय: स्कूल में एक पुस्तकालय है जिसमें 10,000 पुस्तकें हैं, जो इसकी शैक्षणिक गंभीरता को दर्शाती है।
- कमियाँ: स्कूल में कोई खेल का मैदान नहीं है। शिक्षण के लिए कोई कंप्यूटर उपलब्ध नहीं है, हालांकि एक कंप्यूटर सहायता प्राप्त शिक्षण प्रयोगशाला मौजूद है। विकलांग बच्चों के लिए रैंप की आवश्यकता नहीं बताई गई है।
- अन्य: स्कूल परिसर में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है और तैयार किया जाता है।
यह मदरसा अपनी सीमित संसाधनों के बावजूद, विशेषकर 10,000 पुस्तकों वाले पुस्तकालय के साथ, उच्च शैक्षणिक आकांक्षाओं को दर्शाता है। हालाँकि, एक पूर्व मदरसा बोर्ड चेयरमैन द्वारा इसे “सरकार का सौतेला बच्चा” बताया जाना बिहार में मदरसा शिक्षा के प्रति सरकारी उपेक्षा की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। यह रिपोर्ट उस भ्रम को तोड़ती है कि राज्य में मदरसे फल-फूल रहे हैं, और सरकारी दावों की पोल खोलती है।

