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महाराष्ट्र चुनाव : बटोगे तो कटोगे और वोट जिहाद पर मौलाना सज्जाद नोमानी का बीजेपी को करारा जवाब

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

महाराष्ट्र चुनावों में सत्ता के खिसकने का अंदेशा होते ही सत्तारूढ़ भाजपा और उनके सहयोगी दलों ने हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का सहारा लेना शुरू कर दिया है. चुनावी माहौल में विवादित नारे जैसे “बटोगे तो कटोगे” उछाले जा रहे हैं. लेकिन इस राजनीति के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने भाईचारा और लोकतांत्रिक अधिकारों की दुहाई देकर इसे करारा जवाब दिया है.

मौलाना नोमानी की अपील और बीजेपी की बौखलाहट

मौलाना नोमानी ने सेक्युलर वोटर्स से अपील की कि वे किसान, दलित, छात्रों और बेरोजगारों के हक में खड़े होने वाले पौने तीन सौ सेक्युलर उम्मीदवारों को एकजुट होकर वोट दें. उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि वोट बंटने न पाए. मौलाना की इस अपील के बाद भाजपा नेताओं में खलबली मच गई और इसे “वोट जिहाद” का नाम दिया जाने लगा.

इस विवाद को हवा देने में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं. लेकिन मौलाना नोमानी ने पीछे हटने के बजाय फडणवीस को तीखा जवाब दिया.

फडणवीस से मौलाना का सवाल

मौलाना ने अपने बयान में फडणवीस से पूछा:”पौने तीन सौ उम्मीदवारों में से केवल 23 मुस्लिम हैं, बाकी सभी गैर-मुस्लिम। फिर इसे ‘वोट जिहाद’ कैसे कहा जा सकता है?”मौलाना ने किसानों के मुद्दे पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा:
“किसान आंदोलन में साढ़े सात सौ किसान शहीद हो गए थे. उनके हक की बात करना क्या ‘वोट जिहाद’ है?”उन्होंने दलित, पिछड़ों, छात्रों और बेरोजगारों की बात उठाने पर भी भाजपा को घेरा और पूछा:”क्या यह सब ‘वोट जिहाद’ है?”

विपक्ष में खलबली और भाजपा की रणनीति पर सवाल

मौलाना के बयान ने विपक्ष में नई ऊर्जा ला दी है. लेकिन भाजपा ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की. मौलाना की अपील को लेकर पत्रकार से नेता बने दिलीप मंडल ने इसे पाकिस्तान से जोड़ दिया, जो कि एक चिंताजनक पहलू है.

चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल

इस पूरे विवाद के बीच, मौलाना ने चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ऐसी बयानबाजी और नफरत फैलाने वाली राजनीति पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को कड़ा कदम उठाना चाहिए, ताकि यह भविष्य के लिए एक मिसाल बने.

मौलाना सज्जाद नोमानी के बयान ने भाजपा की विभाजनकारी राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने किसानों, दलितों, पिछड़ों और बेरोजगारों के अधिकारों की बात उठाकर सेक्युलर ताकतों को एकजुट करने की अपील की है. यह चुनाव केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि देश की बुनियादी लोकतांत्रिक और सामाजिक एकता का सवाल बन गया है.