MANUU में शुरू हुआ विजिट उर्दू यूनिवर्सिटी कार्यक्रम का दूसरा चरण
हैदराबाद।
उर्दू माध्यम के छात्रों को उच्च शिक्षा, आधुनिक पाठ्यक्रमों और रोजगार आधारित अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) में विजिट उर्दू यूनिवर्सिटी कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि आधुनिक और व्यावसायिक शिक्षा भी समय की सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसे में उर्दू भाषी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर करियर के अवसर उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम के तहत हैदराबाद के तीन प्रमुख मदरसों दारुल उलूम रहमानिया, अल मोहद अल आली व अरबी और आयशा निस्वान के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण कराया गया। छात्रों को विभिन्न विभागों, शैक्षणिक सुविधाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और उपलब्ध पाठ्यक्रमों की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय का उद्देश्य यह है कि मदरसों के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के विकल्पों को नजदीक से समझें और भविष्य की पढ़ाई के लिए बेहतर निर्णय ले सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मन्नू के कुलपति प्रोफेसर सैयद ऐनुल हसन ने कहा कि हैदराबाद सदियों से गंगा जमुनी तहजीब और साझा सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा है। दक्कनी उर्दू ने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी सांस्कृतिक परंपरा को मजबूत करने के लिए तत्कालीन शासक मीर उस्मान अली खान ने उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
उन्होंने कहा कि समय के साथ उस्मानिया विश्वविद्यालय में शिक्षा का माध्यम बदल गया। इसके बाद आज मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी ही ऐसा प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जो उर्दू माध्यम में पारंपरिक, तकनीकी, व्यावसायिक और प्रोफेशनल शिक्षा उपलब्ध करा रहा है।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में उर्दू के साथ साथ अंग्रेजी भाषा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करें। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी विद्यार्थी की प्रगति में बाधा नहीं बननी चाहिए। आधुनिक शिक्षा और भाषा कौशल दोनों साथ साथ चलना जरूरी है।
मदरसा छात्रों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर ऐनुल हसन ने कहा कि मन्नू ऐसा परिसर है जहां हर छात्र का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि यहां किसी के पहनावे, बुर्का या धार्मिक पहचान को लेकर उपहास नहीं किया जाता। विश्वविद्यालय विविधता और सम्मान की संस्कृति में विश्वास करता है। यही वातावरण छात्रों के आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय छात्रों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई नई योजनाओं पर भी काम कर रहा है। डे स्कॉलर छात्रों को रियायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जा रही है। इसके अलावा शहर के विभिन्न इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष आरटीसी बस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव भी है। इस योजना के तहत बस किराये का आधा खर्च विश्वविद्यालय वहन करेगा ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी बिना किसी परेशानी के नियमित रूप से कक्षाओं में आ सकें।
कार्यक्रम में एलुमनी अफेयर्स के समन्वयक प्रोफेसर सैयद नजमुल हसन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मन्नू में उपलब्ध पाठ्यक्रम केवल डिग्री तक सीमित नहीं हैं। यहां शिक्षा के साथ व्यक्तित्व विकास, कौशल निर्माण और रोजगार की तैयारी पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाएं और अपने भविष्य को मजबूत बनाएं।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मोहम्मद मुस्तफा अली सरवरी ने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मन्नू के अनेक छात्र आज भारत और विदेशों में विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। शिक्षा ने उन्हें नई पहचान और बेहतर जीवन दिया है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाला संस्थान नहीं बल्कि प्रतिभाओं को अवसर देने वाला मंच है।
उन्होंने विशेष रूप से मदरसा छात्रों को सलाह दी कि यदि वे बीए या एमए के अलावा विज्ञान, कानून, प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा या अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं तो पहले तेलंगाना ओपन स्कूल सोसाइटी (TOSS) के माध्यम से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करें। इसके बाद वे विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में आसानी से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ. सरवरी ने कहा कि आज के समय में शिक्षा के विकल्प पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हैं। सही जानकारी और उचित मार्गदर्शन मिलने पर मदरसा पृष्ठभूमि के छात्र भी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, शोधकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पूरा कर सकते हैं।
कार्यक्रम में एडवोकेट एजाज अली कुरैशी, जो मन्नू एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, ने भी छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। विद्यार्थियों को अपनी क्षमता पहचाननी चाहिए और उच्च शिक्षा की ओर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाना चाहिए।
इस अवसर पर विभिन्न मदरसों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों के मन में उच्च शिक्षा को लेकर मौजूद झिझक दूर करते हैं और उन्हें नए अवसरों से परिचित कराते हैं।
कार्यक्रम में डॉ. एम. ए. कुद्दूस, सहायक कुलसचिव, एस्टेट सेक्शन तथा नासिर हुसैन शोएब, महासचिव, मन्नू एलुमनी एसोसिएशन सहित विश्वविद्यालय के कई अधिकारी और शिक्षक भी मौजूद रहे।
AEO Quick Answer
प्रश्न: विजिट उर्दू यूनिवर्सिटी कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह मन्नू की एक जागरूकता पहल है, जिसके तहत मदरसा और अन्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय बुलाकर उपलब्ध पाठ्यक्रमों, करियर अवसरों और उच्च शिक्षा की सुविधाओं से परिचित कराया जाता है।
प्रश्न: मन्नू में कौन कौन से पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं?
उत्तर: मन्नू में उर्दू माध्यम के साथ विज्ञान, कानून, तकनीकी, व्यावसायिक, शिक्षक शिक्षा, शोध और अन्य प्रोफेशनल कोर्स संचालित किए जाते हैं।
प्रश्न: मदरसा छात्र मन्नू में कैसे प्रवेश ले सकते हैं?
उत्तर: यदि छात्र तकनीकी या प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं तो उन्हें पहले TOSS या मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं और बारहवीं उत्तीर्ण करनी होगी। इसके बाद वे पात्रता के अनुसार प्रवेश ले सकते हैं।
इस पहल के माध्यम से मन्नू केवल विद्यार्थियों को अपने परिसर से परिचित नहीं करा रहा, बल्कि उर्दू भाषी समाज के युवाओं को आधुनिक शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर आगे बढ़ने का एक नया रास्ता भी दिखा रहा है।

