Maulana Hassan Ali Rajani के बागी सुर: शिया पर्सनल लॉ बोर्ड और फंडिंग पर उठाए बड़े सवाल
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अहमदाबाद/नई दिल्ली
आजकल जब पूरी दुनिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, तब शिया और सुन्नी समुदाय एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन गुजरात के शिया मौलाना हसन अली रजानी (Maulana Hassan Ali Rajani) ने एकदम अलग रुख अपना लिया है। मौलाना रजानी पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जो आम शिया समुदाय के मिजाज से मेल नहीं खाते। उनके हालिया बयानों ने समुदाय के भीतर एक नई बहस और हलचल पैदा कर दी है।
मौलाना हसन अली रजानी ने इस बार सीधा हमला ‘ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड’ और बड़े मौलानाओं पर बोला है। उन्होंने बोर्ड के सदस्यों पर भ्रष्टाचार, विदेशी दलाली और चंदे की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके इन तीखे तेवरों ने सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इस बगावत के पीछे की असली वजह क्या है।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड को भंग करने की चेतावनी
मौलाना रजानी ने साफ तौर पर कहा कि वे जल्द ही ‘ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड’ को भंग कर देंगे। उनके अनुसार जब से इस बोर्ड में भ्रष्ट लोगों का प्रवेश हुआ है, तब से इसने समुदाय के हित में एक भी काम नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बोर्ड केवल विदेशी संस्थाओं की दलाली कर रहा है और देश में राजद्रोह फैलाने का काम कर रहा है।
मौलाना ने सवाल उठाया कि भारत में करोड़ों शिया रहते हैं। क्या उनके पास इतनी ताकत नहीं है कि वे बोर्ड में ऐसे ईमानदार लोगों को ला सकें जो वाकई काम करना चाहते हों? उनके मुताबिक कुछ लोग ईरान के नाम पर चंदा लेते हैं और उस पैसे से अपने लिए बड़े-बड़े आलीशान महल बना रहे हैं। यह गरीब शिया आबादी के साथ सीधा धोखा है।
विदेशी चंदा और कमीशन का काला खेल
मौलाना हसन अली रजानी ने चंदे के खेल को लेकर बहुत चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान इतना गरीब देश नहीं है कि उसे भारत के गरीबों, विधवाओं और मासूम बच्चों के पैसों की जरूरत पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय शिया मुल्ला 50 प्रतिशत कमीशन के लालच में ईरान के नाम पर वसूली कर रहे हैं।
मौलाना ने समुदाय से अपील की कि वे ईरान के नाम पर किसी भी मुल्ला को एक रुपया भी न दें। उनके अनुसार लोगों की मेहनत की कमाई से ये मौलाना यूरोप और अमेरिका में ऐशो-आराम की जिंदगी बिता रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विधवाओं के अंतिम संस्कार और बेटियों की शादी के लिए जमा किए गए गहने और पैसे तक इन मुल्लों ने हड़प लिए हैं।
याकूब अब्बास और इराकी कनेक्शन पर हमला
मौलाना रजानी के निशाने पर विशेष रूप से मौलाना याकूब अब्बास और उनके भाई एजाज अतहर रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि एजाज अतहर बार-बार अमेरिका जाते हैं। वहीं मौलाना याकूब अब्बास खुद इराक जाकर वहां के मौलाना याकूबी को ‘सुप्रीम लीडर’ बनाने की साजिश रच रहे हैं।
मौलाना ने दावा किया कि मौलाना याकूबी सद्दाम हुसैन के समय से इराक में तेल मंत्री रहे हैं। याकूब अब्बास ने उनसे मोटी रकम ली है ताकि उन्हें भारतीय मंचों से दुनिया का सर्वोच्च नेता घोषित किया जा सके। मौलाना रजानी ने कहा कि वे इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर शिया कौम अपना रहनुमा चुनना चाहती है, तो वे लंदन में रहने वाले मौलाना अकील अल-घरवी का समर्थन करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी और वैश्विक राजनीति पर नजरिया
मौलाना रजानी ने एक अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा कि दुनिया भर की सरकारों को ईरान को मिलने वाली फंडिंग रोक देनी चाहिए। उनका मानना है कि जब फंडिंग रुकेगी, तो ईरान अमेरिका के सामने कमजोर पड़ेगा और युद्ध जल्दी खत्म होगा। इससे गरीब लोगों को सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को भी मजबूती मिलेगी।
समुदाय में उठते सवाल और भविष्य की राह
मौलाना हसन अली रजानी का यह अभियान नया नहीं है। वे पिछले कई सालों से शिया मौलानाओं के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। हालांकि समुदाय का एक बड़ा हिस्सा उन्हें शक की निगाह से देखता है। लोगों का कहना है कि जब मौलाना खुद अक्सर विदेशी दौरों पर रहते हैं, तो वे दूसरों पर सवाल कैसे उठा सकते हैं?
अहमदाबाद और दिल्ली के शिया हल्कों में इस बात की चर्चा तेज है कि मौलाना रजानी किसके इशारे पर काम कर रहे हैं। उनके बयानों से ऐसा लगता है कि वे शिया समुदाय के भीतर मौजूद पुरानी संस्थाओं को पूरी तरह खत्म कर एक नया ढांचा खड़ा करना चाहते हैं।
फिलहाल शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन मौलाना रजानी के इन तीखे हमलों ने समुदाय के नेतृत्व को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। शिया समुदाय के आम लोग अब सच्चाई और इन आरोपों की गहराई को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या वाकई शिया संस्थानों में भ्रष्टाचार जड़ जमा चुका है? या फिर यह किसी बड़े राजनीतिक खेल का हिस्सा है? इन सवालों के जवाब आने वाले वक्त में ही मिल पाएंगे। फिलहाल गुजरात से उठी यह चिंगारी पूरे देश के शिया समुदाय में बहस का मुद्दा बनी हुई है।

