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मेस्सी इतिहास रचने से एक कदम दूर, विश्व कप फाइनल रविवार को

नई दिल्ली

फुटबॉल की दुनिया एक बार फिर उस पल का इंतजार कर रही है जब लियोनेल मेस्सी विश्व कप के सबसे बड़े मंच पर उतरेंगे। अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुका है और अब उसकी नजर चौथे विश्व कप खिताब पर है। दूसरी ओर मेस्सी के सामने केवल ट्रॉफी जीतने की चुनौती नहीं है बल्कि कई ऐसे रिकॉर्ड भी हैं जो उन्हें फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों की सूची में और ऊपर ले जा सकते हैं।

रविवार को स्पेन के खिलाफ होने वाला फाइनल केवल दो मजबूत टीमों की टक्कर नहीं होगा। यह मेस्सी के शानदार करियर का एक और ऐतिहासिक अध्याय भी बन सकता है। अगर वे मैदान पर उतरते हैं तो अपने करियर का तीसरा विश्व कप फाइनल खेलेंगे। ऐसा करने वाले वह ब्राजील के महान खिलाड़ी काफू के बाद दुनिया के केवल दूसरे फुटबॉलर बन जाएंगे।

अर्जेंटीना ने पिछले चार विश्व कप में तीसरी बार फाइनल तक पहुंचकर अपनी निरंतरता साबित की है। 2014 में टीम फाइनल में पहुंची थी लेकिन जर्मनी से अतिरिक्त समय में हार गई। इसके बाद 2022 में कतर में मेस्सी ने अपनी टीम को यादगार जीत दिलाई और विश्व कप ट्रॉफी का सपना पूरा किया। अब 2026 में अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फाइनल खेल रहा है और टीम के समर्थकों को उम्मीद है कि इतिहास फिर दोहराया जाएगा।

मेस्सी ने बिना गोल किए भी बदल दिया मैच

सेमीफाइनल में लियोनेल मेस्सी गोल नहीं कर सके लेकिन उन्होंने अपनी रचनात्मक फुटबॉल से मैच की दिशा बदल दी। उनके दो शानदार असिस्ट ने अर्जेंटीना की जीत की नींव रखी। इसी के साथ मौजूदा विश्व कप में उनके कुल असिस्ट की संख्या चार हो गई है।

यही आंकड़ा इस समय गोल्डन बूट की दौड़ में उन्हें सबसे आगे रखता है। मेस्सी और फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन म्बाप्पे दोनों के आठ आठ गोल हैं लेकिन असिस्ट के मामले में मेस्सी आगे हैं। म्बाप्पे ने अब तक तीन असिस्ट किए हैं जबकि मेस्सी के नाम चार असिस्ट दर्ज हैं।

विश्व फुटबॉल में गोल्डन बूट केवल गोलों की संख्या से तय नहीं होता। यदि दो खिलाड़ियों के गोल बराबर हों तो सबसे पहले असिस्ट की संख्या देखी जाती है। इस नियम के कारण फिलहाल मेस्सी सबसे मजबूत दावेदार बने हुए हैं।

गोल्डन बूट कैसे तय होता है

फीफा के नियमों के अनुसार अगर दो खिलाड़ियों के गोल समान हों तो सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी को प्राथमिकता मिलती है। अगर असिस्ट भी बराबर हों तो फिर मैदान पर बिताया गया कुल समय देखा जाता है। जिसने कम मिनट खेलकर उतने ही गोल किए हों उसे बढ़त मिलती है।

यदि इसके बाद भी बराबरी बनी रहती है तो ओपन प्ले में किए गए गोलों की संख्या को देखा जाता है। यानी पेनल्टी को छोड़कर किए गए गोल।

मेस्सी इस मामले में भी अच्छी स्थिति में दिखाई देते हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में दो पेनल्टी मिस की हैं। ऑस्ट्रिया और मिस्र के गोलकीपर उनके प्रयास रोकने में सफल रहे। वहीं म्बाप्पे ने पराग्वे के खिलाफ मिली दो पेनल्टी में से एक को गोल में बदला था। ऐसे में फाइनल का प्रदर्शन गोल्डन बूट का फैसला भी कर सकता है।

तीसरे विश्व कप फाइनल का सपना

मेस्सी का पहला विश्व कप फाइनल 2014 में ब्राजील में हुआ था। उस समय अर्जेंटीना ने शानदार सफर तय किया लेकिन फाइनल में जर्मनी ने अतिरिक्त समय में गोल कर खिताब अपने नाम कर लिया। वह हार मेस्सी के करियर की सबसे दर्दनाक हारों में गिनी जाती है।

आठ साल बाद कतर में उन्होंने उस दर्द को जीत में बदल दिया। शुरुआती मैच में सऊदी अरब से हार के बाद कई लोगों ने अर्जेंटीना को खिताब की दौड़ से बाहर मान लिया था। लेकिन मेस्सी की कप्तानी में टीम लगातार मजबूत होती गई और फाइनल में फ्रांस को रोमांचक मुकाबले में हराकर विश्व चैंपियन बनी।

अब 39 वर्षीय मेस्सी एक और फाइनल खेलने जा रहे हैं। अगर अर्जेंटीना जीतता है तो यह उनके करियर का दूसरा विश्व कप खिताब होगा और अर्जेंटीना का चौथा विश्व कप।

काफू के रिकॉर्ड की बराबरी

ब्राजील के महान फुल बैक काफू विश्व कप इतिहास के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने लगातार तीन विश्व कप फाइनल खेले। उन्होंने 1994 में इटली के खिलाफ पहला फाइनल जीता। इसके बाद 1998 में फ्रांस के खिलाफ फाइनल खेला लेकिन हार का सामना करना पड़ा। फिर 2002 में ब्राजील ने जर्मनी को हराकर एक बार फिर विश्व कप अपने नाम किया।

मेस्सी लगातार तीन फाइनल तो नहीं खेल रहे लेकिन अपने तीसरे विश्व कप फाइनल में उतरकर वह काफू के साथ एक खास रिकॉर्ड साझा करेंगे। यह उपलब्धि विश्व फुटबॉल में बेहद दुर्लभ मानी जाती है।

अर्जेंटीना की उम्मीदें मेस्सी पर टिकीं

पूरे टूर्नामेंट में अर्जेंटीना ने संतुलित खेल दिखाया है। टीम की रक्षा पंक्ति मजबूत रही है जबकि मिडफील्ड ने लगातार मौके बनाए हैं। लेकिन सबसे बड़ी ताकत कप्तान मेस्सी की समझ और अनुभव रहे हैं।

उन्होंने हर अहम मुकाबले में टीम को संभाला है। कभी गोल करके तो कभी साथियों के लिए गोल बनाकर। यही कारण है कि फाइनल से पहले स्पेन की रणनीति का सबसे बड़ा लक्ष्य मेस्सी को रोकना होगा।

गोल्डन बूट की दौड़ में कौन आगे

मौजूदा विश्व कप में गोल्डन बूट की रेस बेहद रोमांचक बनी हुई है। मेस्सी और म्बाप्पे आठ आठ गोल के साथ शीर्ष पर हैं। एर्लिंग हालैंड सात गोल करके तीसरे स्थान पर हैं लेकिन नॉर्वे के बाहर होने के कारण उनका अभियान समाप्त हो चुका है।

इंग्लैंड के हैरी केन और जूड बेलिंघम ने छह छह गोल किए हैं। फ्रांस के उस्मान डेम्बेले और स्पेन के मिकेल वर्जाबल पांच पांच गोल के साथ अभी भी दौड़ में बने हुए हैं क्योंकि उनके पास एक एक मैच बाकी है।

तीसरे स्थान के मुकाबले में फ्रांस और इंग्लैंड आमने सामने होंगे जबकि विश्व कप फाइनल में अर्जेंटीना और स्पेन की भिड़ंत होगी। इन दोनों मुकाबलों के बाद ही गोल्डन बूट का अंतिम फैसला होगा।

विश्व फुटबॉल की निगाहें फाइनल पर

फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह केवल एक फाइनल नहीं है। यह मेस्सी के शानदार करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। अगर अर्जेंटीना जीतता है तो मेस्सी एक बार फिर विश्व फुटबॉल के शिखर पर होंगे। अगर वह गोल्डन बूट भी जीतते हैं तो यह उपलब्धि उनके इस विश्व कप अभियान को और भी यादगार बना देगी।

रविवार की रात दुनिया की नजरें एक बार फिर उस खिलाड़ी पर होंगी जिसने पिछले दो दशकों में फुटबॉल को नई पहचान दी है। अब देखना यह है कि क्या मेस्सी अपने करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ पाते हैं या स्पेन अर्जेंटीना के सपनों को रोक देता है। फाइनल का नतीजा चाहे जो हो, यह मुकाबला विश्व कप इतिहास के सबसे चर्चित मुकाबलों में जरूर दर्ज होगा।