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मिडिल ईस्ट महायुद्ध: ईरान के साथ गुप्त वार्ता या ‘फेक न्यूज’? ट्रंप का बड़ा दावा

मिडिल ईस्ट की धरती पर बारूद की गंध और आसमान में मिसाइलों की गड़गड़ाहट के बीच कूटनीति की एक समानांतर और रहस्यमयी बिसात बिछी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हुए दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध विराम और शांति के लिए “पर्दे के पीछे” बातचीत चल रही है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें ‘फेक न्यूज’ करार दिया है। युद्ध के चौथे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ ही यह सवाल गहरा गया है कि क्या वाकई शांति की कोई गुंजाइश है या यह केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है?

ट्रंप का दावा: ‘पर्दे के पीछे हो रही है बात’

व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि अमेरिका इस युद्ध को जीत रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को लगभग ध्वस्त कर दिया है। ट्रंप का सबसे चौंकाने वाला बयान यह था कि अमेरिका ईरान में “सत्ता परिवर्तन” (Regime Change) कर चुका है। उन्होंने कहा, “हमने उनके नेतृत्व को खत्म कर दिया है और अब हम वहां ‘सही लोगों’ से बात कर रहे हैं।”

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान ने तेल और गैस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण “रियायत” दी है, जिसे उन्होंने अमेरिका के लिए एक “बड़ा तोहफा” बताया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह ईरान में किससे बात कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।


मैदान-ए-जंग: तेहरान से तेल अवीव तक तबाही

ट्रंप के शांति के दावों के उलट जमीन पर हकीकत बेहद खौफनाक है। पिछले 24 घंटों में युद्ध ने और भी हिंसक रूप ले लिया है:

  • दक्षिणी तेहरान पर हमला: इजरायली और अमेरिकी हवाई हमलों में दक्षिणी तेहरान में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 28 अन्य घायल हो गए। रिहाइशी इलाकों में मलबे के ढेर और चीख-पुकार युद्ध की विभीषिका बयां कर रहे हैं।
  • इजरायल पर मिसाइल वर्षा: ईरान और हिजबुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तेल अवीव और उत्तरी इजरायल पर मिसाइलों की एक नई लहर छोड़ी है। इसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है।
  • लेबनान में घुसती इजरायली सेना: इजरायली रक्षा बल (IDF) दक्षिणी लेबनान के भीतर तक घुस गए हैं। इजरायल की योजना इस क्षेत्र पर पूर्ण कब्जा करने की है। पिछले एक दिन में लेबनान में मरने वालों का आंकड़ा 33 तक पहुँच गया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट

युद्ध का सबसे घातक असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है। ईरान ने इस जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से बंद कर रखा है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के नोट के अनुसार, वे ‘गैर-आक्रामक जहाजों’ को ईरानी अधिकारियों के समन्वय के बाद गुजरने की अनुमति दे सकते हैं। ट्रंप ने इसी को एक “बड़ी जीत” के रूप में पेश किया है, लेकिन ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने पूरी दुनिया की कमर तोड़ दी है।


15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव: क्या है अमेरिका का प्लान?

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, वाशिंगटन ने ईरान को एक 15-सूत्रीय समझौता प्रस्ताव भेजा है। इस योजना की मुख्य शर्तें निम्नलिखित बताई जा रही हैं:

  1. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना।
  2. क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (हिजबुल्लाह, हमास आदि) को समर्थन बंद करना।
  3. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोलना।
  4. एक महीने का युद्धविराम ताकि विस्तृत चर्चा की जा सके।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इजरायल इस पर कड़ी नजर रख रहा है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश

इस भीषण संघर्ष के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शांति दूत बनने की इच्छा जताई है। उन्होंने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच निर्णायक बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है। पाकिस्तान के ईरान के साथ पुराने ऐतिहासिक संबंध हैं और ट्रंप प्रशासन के साथ भी उसके संबंध पटरी पर लौट रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अगर सब कुछ ठीक रहा, तो अगले एक हफ्ते के भीतर इस्लामाबाद में कोई बड़ी बैठक हो सकती है।


सैन्य जमावड़ा: युद्ध के लंबे खिंचने के आसार

एक तरफ शांति की बातें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य ताकत बढ़ाई जा रही है। पेंटागन के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी विशिष्ट 82nd एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को भेजने की तैयारी कर रहा है। क्षेत्र में पहले से ही 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। सैनिकों की यह अतिरिक्त तैनाती इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन किसी भी स्थिति के लिए तैयार है, चाहे वह बातचीत विफल होने पर पूर्ण युद्ध ही क्यों न हो।

वरिष्ठ पत्रकार का नजरिया: कूटनीति या केवल दिखावा?

एक अनुभवी पत्रकार के तौर पर, ट्रंप के बयानों को सावधानी से देखने की जरूरत है। ट्रंप की शैली अक्सर “अधिकतम दबाव” (Maximum Pressure) की रही है, जहाँ वे एक तरफ युद्ध की धमकी देते हैं और दूसरी तरफ खुद को एक ‘डील मेकर’ के रूप में पेश करते हैं।

ईरान का बातचीत से इनकार करना स्वाभाविक है क्योंकि वे अपनी घरेलू जनता और सहयोगियों के सामने कमजोर नहीं दिखना चाहते। लेकिन ओमान और अब पाकिस्तान जैसे देशों की सक्रियता बताती है कि परदे के पीछे कुछ तो पक रहा है। असली चुनौती यह है कि क्या इजरायल और ईरान के कट्टरपंथी तत्व किसी भी तरह के समझौते को स्वीकार करेंगे?

निष्कर्ष: मिडिल ईस्ट इस वक्त एक ऐसे दोराहे पर है जहाँ एक तरफ विनाशकारी महायुद्ध का विस्तार है और दूसरी तरफ एक कठिन शांति समझौता। अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि