Culture

मोहम्मद अल-कुथमीः उन्होंने वायलिन के धुन से सऊदी लोगों को दिवाना बना दिया है

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,जेद्दाह

मोहम्मद अल-कुथमी अपने सोलो यानी वायलिन को पकड़ अपनी छाती के करीब रखकर जब झुकते हैं, तो वह महसूस करते हंै कि उनमें कुछ अलग है. उन्हांेने कहा, ‘‘इसकी यानी वायलिन की आवाज आपका ध्यान खींचती है. इसमें एक गहराई है. आप इसकी जैसी आवाज किसी अन्य यंत्र से सुन और महसूस नहीं कर सकते हैं.‘‘

बता दें कि अल-कुथमी, 42, उन मुट्ठी भर सऊदी सेलिस्टों वायी वायलिन वादकों में से एक हैं और सउदी किंगडम के उभरते शास्त्रीय संगीत दृश्य का हिस्सा हैं.उन्होंने 2019 की शुरुआत में वाद्ययंत्र बजाना शुरू किया था. उन्हें 2020 के लॉकडाउन के दौरान अधिक अभ्यास करने का मौका मिला.

अल-कुथमी ने अरब न्यूज को बताया, ‘‘सेलो सिर्फ एक लकड़ी का वाद्य यंत्र नहीं है, यह कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान मेरा प्रिय साथी था. उस समय से हमारा रिश्ता और मजबूत हुआ है.‘‘संगीत के साथ उनका सफर कॉलेज के दिनों से शुरू हो गया था. वह बैंड जिप्सी किंग्स को सुनते थे. इससे वह गिटार बजाना सीखने के लिए प्रेरित हुए.

गिटार बजाना सीखने के बाद, उन्होंने पियानो और ऊद सीखी, जिसमें उनका आखिरी पड़ाव सेलो है.उपकरण खरीदन के लिए अमेरिकी सेलिस्ट एडम हर्स्ट ने उन्हें प्रेरित किया. उन्होंने बताया,‘‘वह वहीं है जिन्हांेने एक बार वायलिन से सुरू कर उन्हें उनका दिवाना बना दिया था. उन्हांेने बताया, उस समय, मैं दुबई में था. वायलिन की आवाज सुनने के बाद वह सीधे एक संगीत की दुकान पर गए और मुझे अपना पहला सेलो मिल गया.‘‘

उन्होंने कहा कि संगीत हमेशा सऊदी संस्कृति का हिस्सा रहा है, लेकिन सऊदी विजन 2030 के सामाजिक सुधारों से पहले इसे गंभीर से नहीं लिया जाता था.वह कहते हैं,“अब तक उन्हांेने जो सीखा है उसकी तुलना में सार्वजनिक रूप से बजाना थोड़ा मुश्किल है. हमारे प्रिंस के लिए धन्यवाद, चीजें 360 डिग्री बदल रहीं हैं. मुझे अपना पसंदीदा संगीत जनता के साथ साझा करने को मिल रहा है.‘‘

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अल-कुथमी ने कहा कि पेशेवर संगीतकारों को दिन में तीन से चार घंटे अभ्यास करना चाहिए, लेकिन एक शौकिया सेलिस्ट वायलिनवादक के रूप में, वह आमतौर पर दिन में एक से दो घंटे बजाते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैं वही बजाता हूं जो मुझे अच्छा लगता है और जो मेरे दिल को छूता है.‘‘उन्होंने कहा, ‘‘मुझे शास्त्रीय और अमेरिकी पॉप गाने बजाने में मजा आता है. मैं ज्यादातर अपनी शैली में सुधार का आनंद लेता हूं. मैं कुछ अरबी गाने बजाता हूं लेकिन अभी भी इसमें महारत हासिल करने के लिए और समय चाहिए. अरबी संगीत के तराजू ‘मकम‘ को सेलो पर बजाना आसान नहीं है.‘‘

अल-कुथमी ने कई निजी संगीत समारोहों में भाग लिया है. हाल ही में रियाद में सिरप संगीत लाउंज में जहां उन्होंने पियानो और सेलो बजाया. वह बताते हैं, ‘‘यह एक अद्भुत रात थी. उम्मीद है कि मुझे जल्द ही ऐसा कुछ फिर से करने को मिलेगा. ”
बता दें कि किंगडम ने हाल ही में कई संगीत संस्थान और पहल शुरू की हैं. पिछले नवंबर में, यामाहा म्यूजिक स्कूल रियाद किंगडम में पहली आधिकारिक रूप से अधिकृत संगीत शिक्षा सुविधा के रूप में खोला गया.संस्कृति मंत्रालय के संगीत आयोग ने जनवरी में बैत अल-ऊद (हाउस ऑफ ऊद) लॉन्च किया और यह 2023 में खुलने वाला है.