फीफा 2026 में चमकेंगे मुस्लिम फुटबॉलर
मुस्लिम नाउ विशेष
दुनिया के सबसे बड़े खेल महाकुंभों में शामिल फीफा वर्ल्ड कप अब बस कुछ ही हफ्तों दूर है। अगले महीने 11 जून से फुटबॉल का सबसे बड़ा मंच सजने जा रहा है। इस बार का टूर्नामेंट कई मायनों में खास होगा। पहली बार 48 टीमें मैदान में उतरेंगी। मुकाबले ज्यादा होंगे। नए चेहरे दिखेंगे। और मुस्लिम देशों के साथ मुस्लिम फुटबॉलरों की मौजूदगी भी पहले से कहीं अधिक नजर आएगी।

कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको की मेजबानी में होने वाला फीफा वर्ल्ड कप 2026 पहले से कहीं बड़ा और ज्यादा रोमांचक माना जा रहा है। 104 मुकाबले खेले जाएंगे। 19 जुलाई को फाइनल होगा। टिकटों की बिक्री लगभग पूरी हो चुकी है। फिक्सचर सामने आ चुका है। अब सिर्फ पहली सीटी बजने का इंतजार है।
हर बार की तरह इस बार भी मुस्लिम देशों पर खास नजर रहेगी। सऊदी अरब, कतर, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मिस्र, जॉर्डन, इराक और ईरान जैसी टीमें मैदान में उतरेंगी। कई टीमें मजबूत विरोधियों के खिलाफ चुनौती पेश करती दिखाई देंगी। खासकर मोरक्को से उम्मीदें ज्यादा हैं। पिछला विश्व कप आज भी फुटबॉल प्रेमियों के जेहन में ताजा है, जब मोरक्को ने दुनिया को चौंकाते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था।
इस बार एक और दिलचस्प सवाल चर्चा में है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर फुटबॉल मैदान तक पहुंचेगा। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संबंध इस समय बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में ईरानी टीम की भागीदारी को लेकर दुनिया की नजर बनी हुई है।

हालांकि ईरान की टीम ने खेलने की तैयारी जारी रखी है। लेकिन कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि ईरानी खिलाड़ियों की ओर से सुरक्षा और यात्रा से जुड़ी कुछ शर्तें रखी गई हैं। इन्हें लेकर चर्चा भी हो रही है। अभी तक आधिकारिक स्तर पर कोई अंतिम विवाद सामने नहीं आया, लेकिन यह मुद्दा टूर्नामेंट शुरू होने तक चर्चा में रह सकता है।
फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं है। कई बार यह राजनीति और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों से भी प्रभावित होता है। ऐसे में ईरान की मौजूदगी टूर्नामेंट की बड़ी कहानी बन सकती है।

लेकिन विश्व कप की असली चमक मैदान में उतरने वाले सितारे होंगे। इस बार फीफा वर्ल्ड कप में 100 से अधिक मुस्लिम खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाते नजर आ सकते हैं। इनमें कई ऐसे नाम हैं जो दुनिया के सबसे बड़े क्लबों के सुपरस्टार माने जाते हैं।
मोरक्को के अशरफ हकीमी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी। पेरिस सेंट जर्मेन के लिए खेलने वाले हकीमी अपनी तेज रफ्तार और आक्रामक खेल के लिए पहचाने जाते हैं। पिछली बार उन्होंने मोरक्को को ऐतिहासिक सफलता दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
मिस्र के मोहम्मद सलाह भी इस टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मुस्लिम चेहरों में होंगे। लिवरपूल के स्टार फॉरवर्ड दुनिया के सबसे लोकप्रिय फुटबॉलरों में गिने जाते हैं। उनकी गति, गोल करने की क्षमता और मैदान पर संयम उन्हें खास बनाता है। फुटबॉल प्रेमियों को उम्मीद है कि वह इस बार मिस्र के लिए यादगार प्रदर्शन कर सकते हैं।
जर्मनी के एंटोनियो रुडिगर भी चर्चा में रहेंगे। रियल मैड्रिड के इस मजबूत डिफेंडर को दुनिया के बेहतरीन रक्षकों में माना जाता है। वहीं फ्रांस की टीम में उस्मान डेम्बेले, इब्राहिमा कोनाते और एन गोलो कांते जैसे मुस्लिम खिलाड़ी अपने खेल से रंग जमाते दिख सकते हैं।
अल्जीरिया के रयान ऐत नूरी भी उभरते सितारे माने जा रहे हैं। उनकी तकनीक और गति ने पहले ही फुटबॉल जानकारों का ध्यान खींचा है। स्विट्जरलैंड के ग्रेनिट झाका और सेनेगल के कालिदू कुलिबाली जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी अपने देशों की उम्मीदों का बड़ा सहारा होंगे।
इस बार मुस्लिम देशों के मुकाबले भी काफी दिलचस्प रहने वाले हैं। 13 जून को ब्राजील और मोरक्को की भिड़ंत फुटबॉल प्रेमियों का ध्यान खींचेगी। उसी दिन कतर का सामना स्विट्जरलैंड से होगा।

15 जून को सऊदी अरब की टक्कर उरुग्वे से होगी। इसी दिन ईरान न्यूजीलैंड के खिलाफ मैदान में उतरेगा। फुटबॉल प्रेमियों की नजर खास तौर पर ईरान के पहले मुकाबले पर रहेगी।
16 जून को फ्रांस और सेनेगल का मैच रोमांच पैदा कर सकता है। वहीं अर्जेंटीना और अल्जीरिया के बीच मुकाबला भी आसान नहीं माना जा रहा। जॉर्डन और ऑस्ट्रिया की भिड़ंत भी कई दर्शकों को आकर्षित करेगी।
आगे के मुकाबलों में बेल्जियम बनाम ईरान, स्पेन बनाम सऊदी अरब, स्कॉटलैंड बनाम मोरक्को और मिस्र बनाम ईरान जैसे मैच भी काफी चर्चा में रहने वाले हैं।
इस बार टूर्नामेंट का विस्तार कई नए देशों को मौका दे रहा है। यही वजह है कि दुनिया के अलग अलग हिस्सों से प्रतिभाएं सामने आएंगी। मुस्लिम खिलाड़ी सिर्फ मुस्लिम देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की टीमों में भी बड़ी संख्या में मुस्लिम खिलाड़ी नजर आएंगे।
फुटबॉल के मैदान में धर्म से ज्यादा अहम खेल होता है। लेकिन खिलाड़ियों की पहचान और उनकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि हमेशा दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाती है। कई मुस्लिम खिलाड़ी मैदान पर नमाज पढ़ते हुए या सज्दा करते हुए दिखते रहे हैं। इससे दुनियाभर के मुस्लिम युवाओं में उनके प्रति खास जुड़ाव भी बनता है।
फिलहाल दुनिया फीफा वर्ल्ड कप 2026 की उलटी गिनती शुरू कर चुकी है। करोड़ों दर्शक अपनी पसंदीदा टीमों का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन मुस्लिम देशों और मुस्लिम फुटबॉलरों के लिए यह विश्व कप सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं होगा। यह हुनर, पहचान और वैश्विक मंच पर अपनी मौजूदगी दिखाने का मौका भी होगा।

अब देखना यह है कि कौन सी टीम इतिहास रचती है और कौन सा खिलाड़ी दुनिया के दिलों पर राज करता है।

