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मुस्लिम संस्था ने थामा हाथ, यशस्वी बने भारत के स्टार

देश में इन दिनों नफरत और धार्मिक तनाव की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसी बहसें खूब दिखाई देती हैं। मगर इसी भारत में कुछ ऐसी कहानियां भी हैं जो यह बताती हैं कि इंसानियत अब भी जिंदा है। मजहब से ऊपर उठकर लोग एक दूसरे का हाथ थामते हैं। मुंबई की मशहूर मुस्लिम शिक्षण संस्था अंजुमन ए इस्लाम और भारतीय क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल की कहानी भी ऐसी ही मिसाल है।

आज जब राजस्थान रॉयल्स के विस्फोटक ओपनर यशस्वी जायसवाल आईपीएल में चौके और छक्कों की बारिश कर रहे हैं, तब बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी आया था जब उनका क्रिकेट करियर लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया था। उसी मुश्किल दौर में एक मुस्लिम संस्था ने उनका साथ दिया और उन्हें नई पहचान दी।

हाल ही में आईपीएल 2026 में यशस्वी जायसवाल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान रॉयल्स को जीत दिलाई। मुंबई इंडियंस के खिलाफ गुवाहाटी में खेले गए बारिश से प्रभावित मुकाबले में उन्होंने नाबाद 77 रन बनाए। इस पारी में 10 चौके और 4 छक्के शामिल थे। इसी के साथ उन्होंने आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए 100 छक्के पूरे करने का बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।

संजू सैमसन, जोस बटलर और शेन वॉटसन के बाद वह राजस्थान रॉयल्स के लिए 100 से ज्यादा छक्के लगाने वाले चौथे बल्लेबाज बन गए हैं। क्रिकेट विशेषज्ञ अब उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद युवा बल्लेबाजों में गिनने लगे हैं।

लेकिन इस चमक के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी छिपी है।

उत्तर प्रदेश के भदोही से मुंबई पहुंचे यशस्वी जायसवाल का बचपन बेहद कठिन हालात में गुजरा। क्रिकेट खेलने का सपना लेकर वह मायानगरी पहुंचे जरूर, लेकिन यहां जिंदगी आसान नहीं थी। कभी टेंट में रात गुजरी तो कभी भूखे पेट सोना पड़ा। आजाद मैदान में दिनभर अभ्यास और छोटे मोटे काम करके उन्होंने खुद को जिंदा रखा।

इसी दौरान उन पर गलत जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर उम्र छिपाकर खेलने का आरोप लगा। मामला इतना बढ़ गया कि उनके क्रिकेट करियर पर संकट खड़ा हो गया। कई जगहों से रास्ते बंद होने लगे। ऐसे समय में मुंबई की मशहूर मुस्लिम शिक्षण संस्था अंजुमन ए इस्लाम ने आगे बढ़कर उनका साथ दिया।

अंजुमन ए इस्लाम ने यशस्वी को अपने उर्दू विभाग में दाखिला दिया। उन्हें क्रिकेट टीम में जगह मिली। पढ़ाई और खेल दोनों का सहारा मिला। यही वह मोड़ था जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम संस्था होने के बावजूद अंजुमन ए इस्लाम की क्रिकेट टीम में ज्यादातर खिलाड़ी गैर मुस्लिम हैं। संस्था का मकसद केवल शिक्षा और प्रतिभा को बढ़ावा देना है। यही वजह है कि दशकों से यह संस्था मुंबई क्रिकेट को बड़े खिलाड़ी देती रही है।

यशस्वी जायसवाल की सफलता अब उसी भरोसे का परिणाम मानी जाती है।

अंडर 19 विश्व कप 2020 में उन्होंने भारत के लिए 400 रन बनाए और पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें आईपीएल में 2.40 करोड़ रुपये में खरीदा। फ्रेंचाइजी ने शुरुआत से ही उन्हें लंबी रेस का खिलाड़ी माना।

साल 2023 उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। उन्होंने आईपीएल में 625 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 163 से ज्यादा रहा। उसी साल उन्हें भारत की टेस्ट और टी20 टीम में मौका मिला। वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू में उन्होंने 171 रन ठोक दिए।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

2024 में वह टेस्ट क्रिकेट में भारत के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। उन्होंने वनडे टीम में भी जगह बनाई। अब तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए शतक लगाने वाले युवा खिलाड़ियों में उनका नाम शामिल हो चुका है।

यशस्वी की बल्लेबाजी की खासियत उनका निडर अंदाज है। आईपीएल 2026 में भी उन्होंने यही दिखाया। मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में उन्होंने शुरुआत से आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने कहा कि छोटे पावरप्ले का पूरा फायदा उठाने की योजना पहले से बनाई थी।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की भी उन्होंने खुलकर तारीफ की। 15 साल के इस खिलाड़ी ने जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाज के खिलाफ छक्के लगाए। जायसवाल ने कहा कि वह वैभव को खुलकर खेलने की सलाह देते हैं।

यशस्वी की यह यात्रा केवल क्रिकेट की कहानी नहीं है। यह उस भारत की तस्वीर भी है जहां धर्म नहीं बल्कि प्रतिभा और मेहनत की कीमत होती है।

अब बात उस संस्था की जिसने यशस्वी को संभाला।

अंजुमन ए इस्लाम की स्थापना 19वीं सदी में हुई थी। यह देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित मुस्लिम शैक्षणिक संस्थाओं में गिनी जाती है। संस्था ने शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल कीं। 1880 में ही इसने ब्रिटिश सरकार के सामने व्यावसायिक शिक्षा, कृषि शिक्षा, महिला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा की जरूरत पर जोर दिया था।

आज मुंबई का सबू सिद्दीक कैंपस तकनीकी शिक्षा का बड़ा केंद्र बन चुका है। इंजीनियरिंग, फार्मेसी, आर्किटेक्चर और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई यहां होती है। संस्था ने लड़कियों की शिक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी। 1939 में लड़कियों के लिए अलग स्कूल शुरू किया गया जो आज बड़े शिक्षा परिसर में बदल चुका है।

अंजुमन ए इस्लाम केवल मुस्लिम छात्रों तक सीमित नहीं है। यहां हर धर्म और समुदाय के छात्र पढ़ते हैं। संस्था का दावा है कि उसका उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना है।

यह संस्था मिड डे मील, गरीब छात्रों की फीस सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे काम भी लंबे समय से करती रही है। यही वजह है कि मुंबई और महाराष्ट्र में इसका सामाजिक प्रभाव काफी बड़ा माना जाता है।

आज जब समाज में धार्मिक विभाजन की बातें तेज होती हैं, तब यशस्वी जायसवाल और अंजुमन ए इस्लाम की कहानी उम्मीद जगाती है। यह बताती है कि भारत की असली ताकत उसकी साझी विरासत और इंसानियत में छिपी है।

क्रिकेट मैदान पर जब यशस्वी जायसवाल बल्ला घुमाते हैं तो शायद बहुत लोगों को यह याद नहीं रहता कि उनकी इस उड़ान के पीछे एक मुस्लिम संस्था का भरोसा भी शामिल है। यही भारत की खूबसूरती है। यही वह तस्वीर है जिसे देखने और दिखाने की सबसे ज्यादा जरूरत है।

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