NEET 2026 Bhiwandi Mosque News: नीट परीक्षा के दौरान मस्जिद ने पेश की मानवता की मिसाल
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, भिवंडी महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के भिवंडी से सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। नीट 2026 परीक्षा के दौरान भिवंडी की स्थानीय दीनियत मस्जिद ने जाति और धर्म की दीवारों को पूरी तरह से गिरा दिया। परीक्षा केंद्र के बाहर भीषण गर्मी और उमस में परेशान हो रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के लिए मस्जिद प्रशासन ने अपने दरवाजे खोल दिए। मस्जिद के इस कदम की सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच जमकर तारीफ हो रही है। लोग इसे सच्चे भारत की जीती-जागती तस्वीर बता रहे हैं।
दूर-दराज के इलाकों से आए माता-पिता अपने बच्चों को परीक्षा दिलाने पहुंचे थे। परीक्षा केंद्र के बाहर न तो बैठने की कोई जगह थी और न ही धूप से बचने का कोई साधन था। ऐसे मुश्किल वक्त में स्थानीय दीनियत मस्जिद ट्रस्ट ने आगे आकर कमान संभाली। मस्जिद के लोगों ने बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सभी गैर-मुस्लिम अभिभावकों को अंदर बुलाया। उनके आराम करने और खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया।
NEET Exam Centre Care in Bhiwandi: डर और झिझक के बाद मिला अपनापन
परीक्षा देने आए कई परिवारों के मन में शुरुआत में भिवंडी इलाके को लेकर एक डर और झिझक थी। ठाणे से अपनी बेटी को परीक्षा दिलाने आई कल्पना शर्मा ने बताया कि जब उन्होंने एडमिट कार्ड पर सलाहुद्दीन कॉलेज का नाम देखा तो वे काफी घबरा गई थीं। भिवंडी उनके लिए एक अनजान जगह थी। वे पूरी रात सो भी नहीं पाई थीं। लेकिन जब वे परीक्षा केंद्र पहुंचीं तो वहां का माहौल देखकर उनकी सारी गलतफहमियां दूर हो गईं।
मस्जिद के स्वयंसेवकों ने सभी का स्वागत बहुत प्यार से किया। मस्जिद प्रशासन की तरफ से अभिभावकों के लिए ठंडा पानी, ताजा जूस, चाय और हल्का नाश्ता उपलब्ध कराया गया था। इतना ही नहीं, जो माता-पिता पूरी रात जागने के कारण थके हुए थे, उनके लिए मस्जिद की पहली मंजिल पर साफ-सुथरे कमरों और बिस्तरों का इंतजाम किया गया था। पंखों की ठंडी हवा में बैठकर लोगों ने चैन की सांस ली।
मस्जिद में मौजूद शमा नाम की एक महिला स्वयंसेवक और अन्य लड़कियों ने दिनभर लोगों की मदद की। इस निस्वार्थ सेवाभाव को देखकर कई गैर-मुस्लिम माता-पिता अपने आंसू नहीं रोक पाए। परीक्षा खत्म होने के बाद कई अभिभावकों ने मस्जिद के बुजुर्गों के पैर छूकर उनका आभार जताया।
Bhiwandi Diniyat Mosque Welfare Initiative: पिछली दिक्कतों के मुकाबले अनोखा अनुभव
अंबरनाथ से आई एक महिला उद्यमी प्रिया कंवर ने अपना पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछली बार उनकी बेटी का परीक्षा केंद्र उल्हासनगर में था। वह उनके घर के पास तो था लेकिन वहां अभिभावकों के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं थी। बाजार का इलाका होने की वजह से दुकानदारों ने भी उन्हें कहीं रुकने नहीं दिया। उस दौरान माता-पिता को सड़क पर खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ा था।
इसके विपरीत भिवंडी की दीनियत मस्जिद में मिला अनुभव पूरी तरह से अलग और यादगार था। ज्योति शर्मा नाम की एक अन्य महिला ने बताया कि वे अपने परिवार के चार लोगों के साथ यहां आई थीं। बारिश और भीषण गर्मी के कारण वे लोग परेशान थे कि शाम 5 बजे तक का समय कहां बिताएंगे। लेकिन मस्जिद के सेवादारों ने उनकी सारी चिंताएं पल भर में दूर कर दीं। उन्हें ऐसा लगा ही नहीं कि वे किसी अनजान जगह पर हैं। उन्हें लगा कि वे अपने ही परिवार के लोगों के बीच बैठे हैं।
एक पिता ने इस पूरी व्यवस्था को देखने के बाद कहा कि कुछ लोग हमेशा जाति और धर्म की राजनीति करते हैं। लेकिन भिवंडी की इस मस्जिद में उन्हें सिर्फ और सिर्फ इंसानियत देखने को मिली। लोग बिना किसी स्वार्थ के एक-दूसरे का हाथ बंटा रहे थे।
Interreligious Harmony in Maharashtra: धर्म की आत्मा है मानवता की सेवा
जब इस पूरी व्यवस्था को लेकर दीनियत मस्जिद के एक जिम्मेदार पदाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि अल्लाह और उनके रसूल ने हमेशा यही सिखाया है कि खुदा की बनाई हुई रचना यानी इंसानों को फायदा पहुंचाया जाए। मानवता की सेवा करना ही हर सच्चे धर्म की आत्मा है।
मस्जिद प्रशासन ने बताया कि इस नेक काम में उनके स्थानीय नगर सेवक (पार्षद) ने भी पूरा सहयोग दिया। मस्जिद के पदाधिकारियों का कहना है कि जब लोग खुश होकर उन्हें दुआएं दे रहे थे, तो उनकी पूरी टीम की थकान दूर हो गई। वे चाहते हैं कि देश में हमेशा ऐसा ही प्यार और भाईचारे का माहौल बना रहे।
Diniyat Mosque Charitable Work: सिर्फ परीक्षा ही नहीं, सालभर चलती है सेवा
भिवंडी की यह दीनियत मस्जिद सिर्फ परीक्षा के दिनों में ही सक्रिय नहीं रहती है। मस्जिद ट्रस्ट सालों से सामाजिक कल्याण के कई काम कर रहा है। मस्जिद परिसर के भीतर महिलाओं के लिए एक विशेष क्लिनिक चलाया जाता है। इस क्लिनिक में हर धर्म और जाति के लोग आते हैं। यहां बहुत ही कम फीस पर मरीजों का इलाज किया जाता है और दवाइयां दी जाती हैं। जो लोग पैसे देने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं, उनका इलाज मुफ्त में किया जाता है।
इसके अलावा मस्जिद में एक कानूनी परामर्श केंद्र और न्यायिक कार्यालय भी संचालित होता है। इसके जरिए स्थानीय लोगों के आपसी विवाद सुलझाए जाते हैं और उन्हें सही सलाह दी जाती है। किसी भी आपदा या संकट के समय इस मस्जिद से गरीबों के लिए मुफ्त भोजन के पैकेट बांटे जाते हैं।
भिवंडी की इस घटना ने पूरे देश को एक बड़ा सकारात्मक संदेश दिया है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि जब भी समाज को बांटने की कोशिश की जाती है, तब भिवंडी जैसी घटनाएं नफरत फैलाने वालों की बोलती बंद कर देती हैं। मानवता, करुणा और अंतरधार्मिक सम्मान का यह उदाहरण लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।
प्रमुख तथ्य
घटना कहां हुई?
भिवंडी, महाराष्ट्र में।
मौका क्या था?
NEET 2026 परीक्षा।
व्यवस्था किसने की?
दीनियत मस्जिद ट्रस्ट और स्थानीय स्वयंसेवकों ने।
क्या सुविधाएं दी गईं?
पानी, जूस, चाय, नाश्ता, बैठने की व्यवस्था और आराम के लिए कमरे।
किसे लाभ मिला?
परीक्षार्थियों के साथ आए अभिभावकों को।
यह खबर क्यों चर्चा में है?
क्योंकि इसने सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और मानवता का सकारात्मक उदाहरण पेश किया।

