ईरान पहुंचे पाकिस्तान के गृह मंत्री, अमेरिका से तनाव के बीच बातचीत
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इस्लामाबाद/तेहरान।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे। उनकी दो दिवसीय यात्रा के दौरान ईरानी नेतृत्व के साथ क्षेत्रीय हालात और दोनों देशों के रिश्तों पर बातचीत होनी है।
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, मोहसिन नकवी वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ मौजूदा क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करेंगे। इस बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष, रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य, क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने भी नकवी की यात्रा की पुष्टि की है। एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री तेहरान में दोनों देशों के बीच संबंधों के विस्तार और क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे।
ईरानी गृह मंत्री ने किया स्वागत
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय की ओर से मीडिया को साझा किए गए वीडियो में मोहसिन नकवी को तेहरान पहुंचते देखा गया। वहां ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत भी हुई।
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नकवी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करना और दोनों देशों के बीच संपर्क को आगे बढ़ाना है। अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी।
मोहसिन नकवी इससे पहले भी ईरान का दौरा कर चुके हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में पाकिस्तान ने पिछले कुछ महीनों में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी नजर
मोहसिन नकवी का तेहरान दौरा ऐसे समय हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ईरानी संसद के अध्यक्ष और वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने एक दिन पहले कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर ईरान ने अपनी शर्तें मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचा दी हैं।
ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, ग़ालिबाफ ने कहा कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं और अमेरिका अपने वादों को पूरा नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य को पहले जैसी स्थिति में खोलना संभव नहीं होगा।
इस बयान के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री की तेहरान यात्रा को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने यह नहीं कहा है कि नकवी की बातचीत में होर्मुज को लेकर कोई विशेष प्रस्ताव रखा जाएगा।
अमेरिका और ईरान में तनाव जारी
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का असर पूरे मध्य पूर्व पर दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव के दौरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय हितों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था और उसके बंदरगाहों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
इस संघर्ष का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। यमन में ईरान समर्थित हूती संगठन भी संघर्ष में सक्रिय है। इस महीने हूती लड़ाकों की ओर से दक्षिणी सऊदी अरब में ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें आई हैं।
इन हमलों में कई लोगों के घायल होने और ऊर्जा से जुड़ी कुछ सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने की चिंता बढ़ी है।
पाकिस्तान पहले भी कर चुका है मध्यस्थता
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में पाकिस्तान ने पिछले महीनों में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है। इस्लामाबाद ने दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत की मेजबानी भी की थी।
जून में पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के बाद एक अंतरिम शांति समझौते तक पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, यह समझौता ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई।
पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि लंबे समय से चले आ रहे इस संघर्ष का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति से निकाला जा सकता है।
इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान से पहले हुए अंतरिम समझौते की ओर लौटने की अपील भी की है। पाकिस्तान के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान उसका पड़ोसी देश है और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सीधे क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
ईरान की शर्तों पर अमेरिका से बातचीत
ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ के बयान से यह संकेत मिलता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
ईरान ने मध्यस्थों के माध्यम से अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचाने की बात कही है। हालांकि, अमेरिका की ओर से इन शर्तों पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत पर खाड़ी देशों के साथ साथ दुनिया के अन्य देशों की भी नजर है।
यमन में हूती और सरकारी बलों के बीच संघर्ष
इसी बीच यमन में भी संघर्ष जारी है। यमनी सरकारी बलों ने बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य और अल बायदा प्रांत के आसपास हूती लड़ाकों और उनके आपूर्ति मार्गों को निशाना बनाने का दावा किया है।
यमनी अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण पश्चिमी ताइज़ प्रांत में एक हूती ड्रोन को भी मार गिराया गया।
दूसरी तरफ हूती नेता अब्दुल मलिक अल हूती ने कहा है कि अमेरिका के साथ संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक वाशिंगटन की नीति यमनी लोगों पर प्रभुत्व कायम करने की कोशिश के रूप में जारी रहती है।
इन घटनाओं ने लाल सागर और बाब अल मंदेब क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में किए हमले
क्षेत्र में तनाव का एक और केंद्र दक्षिणी लेबनान बना हुआ है। इजरायली विमानों ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। इनमें नबातियेह, बिंत जबैल और मरजायून जिले शामिल हैं।
वाडी अल हुजैर इलाके में भी हमले की जानकारी सामने आई है। लेबनान में जारी तनाव ने पश्चिम एशिया के व्यापक संघर्ष को और जटिल बना दिया है।
इस बीच कतर ने इजरायल की दक्षिणपंथी सरकार पर गाजा में मध्यस्थता के प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। कतर ने मीडिया संस्थानों से भी अपील की कि वे उसके खिलाफ गलत सूचना को बढ़ावा न दें।
ईरानी एयरलाइंस पर अमेरिकी दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक दबाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने ईरान की सभी एयरलाइंस को बुधवार से बंद किए जाने की बात कही।
इसके कुछ घंटे बाद ईरान एयर ने कहा कि वह अपनी उड़ानें जारी रखेगी। एयरलाइन के अनुसार, तेहरान, मशहद और इस्फहान से इराक के नजफ के लिए उड़ानों का संचालन जारी रहेगा।
यह घटनाक्रम बताता है कि अमेरिका और ईरान के बीच विवाद केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका असर विमानन, ऊर्जा, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
तेल की कीमतों में गिरावट
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 11 दिनों के निचले स्तर पर पहुंच गईं। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान कूटनीतिक प्रगति की उम्मीदों को इसका एक कारण बताया जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत तथा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावना का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। हालांकि, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां जारी रहने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
नकवी की यात्रा क्यों महत्वपूर्ण
मोहसिन नकवी की तेहरान यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर तनाव जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, यमन में हूती गतिविधियां, दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमले और गाजा से जुड़ी कूटनीतिक कोशिशें इस समय क्षेत्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे हैं।
पाकिस्तान इन परिस्थितियों में बातचीत और मध्यस्थता के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। तेहरान में नकवी की मुलाकातों से यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश क्षेत्रीय संकट पर किस तरह समन्वय बढ़ाना चाहते हैं।
फिलहाल मोहसिन नकवी की यात्रा के दौरान किसी नए समझौते या युद्धविराम की घोषणा नहीं हुई है। बातचीत के नतीजे और ईरान की ओर से आगे उठाए जाने वाले कदम पर आने वाले दिनों में नजर रहेगी।

