News

राजनीतिक विरोध पर पुलिस कार्रवाई से लोकतंत्र कमजोर: सलीम इंजीनियर

नई दिल्ली।

दिल्ली में हाल के राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर जमाअत ए इस्लामी हिंद ने चिंता जताई है। संगठन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का जरूरी हिस्सा है। विपक्षी नेताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और आम प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे लोकतांत्रिक असहमति की जगह सीमित होती दिखाई दे।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि राजनीतिक दलों के निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें विपक्षी दलों के सांसद और नेता भी शामिल हैं। उनके मुताबिक किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रभावी विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना, जनहित के मुद्दे उठाना और जनता की शिकायतों को सामने रखना विपक्ष की जिम्मेदारियों का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों और राजनीतिक नेताओं के साथ जिस तरह की कार्रवाई की जा रही है, उस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उनके अनुसार शांतिपूर्ण राजनीतिक विरोध को रोकने के बजाय सरकार को उन मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए जिन्हें प्रदर्शनकारी उठा रहे हैं।

विपक्ष की भूमिका को लेकर उठाए सवाल

जमाअत ए इस्लामी हिंद ने कहा है कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है। चुनाव के बाद भी नागरिकों और उनके प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। संसद के भीतर विपक्ष अपनी भूमिका निभाता है। लेकिन जब किसी मुद्दे को लेकर सड़क पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन होता है तो वहां भी संवैधानिक अधिकारों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी है।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों का समाधान केवल प्रदर्शन रोकने या नेताओं को हिरासत में लेने से नहीं हो सकता। यदि सरकार किसी मांग से सहमत नहीं है, तब भी उसे संबंधित पक्षों को सुनने का अवसर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को जगह देना जरूरी है। सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। लेकिन इन मतभेदों का समाधान बातचीत, संसदीय प्रक्रिया और संस्थागत संवाद से होना चाहिए।

जमाअत ए इस्लामी हिंद पहले भी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर प्रशासनिक पाबंदियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जता चुकी है। 3 अक्टूबर को संगठन ने सार्वजनिक मुद्दों पर टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी। उस बयान में भी शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का वैध माध्यम बताया गया था। Clarion India

हिरासत और एफआईआर पर जताई चिंता

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान विपक्षी सांसदों की हिरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी प्रदर्शन में कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।

उन्होंने अनावश्यक हिरासत और बेवजह एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई कानून के आधार पर होनी चाहिए। किसी नागरिक को केवल विरोध की आवाज उठाने के कारण निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

जमाअत ने पुलिस दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। संगठन के अनुसार यदि किसी पुलिस अधिकारी पर अधिकारों के दुरुपयोग या अनुचित बल प्रयोग के आरोप हैं तो उनकी जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

यह मांग जमाअत के हाल के बयानों से भी जुड़ी दिखाई देती है। सितंबर में संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई को लेकर शिकायत करने वाले पत्रकारों से मुलाकात की थी। उस समय भी प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने पुलिस में पेशेवर व्यवहार, संयम और नागरिकों की गरिमा के सम्मान पर जोर दिया था। Radiance News

38 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पर सवाल

जमाअत ए इस्लामी हिंद ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की खबरों पर भी चिंता जताई है। संगठन ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि जंतर मंतर और दिल्ली के आसपास संभावित प्रदर्शनों को देखते हुए करीब 38 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की बात सामने आई है।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में केंद्रीय सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की बड़ी संख्या में तैनाती की जा रही है। रिपोर्ट में करीब 33 हजार केंद्रीय बलों और 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों समेत लगभग 38 हजार सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। ReporterNews

हालांकि इतने बड़े सुरक्षा इंतजामों का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना बताया जा रहा है, लेकिन जमाअत ने इसके लोकतांत्रिक असर को लेकर सवाल उठाया है। संगठन का कहना है कि सुरक्षा बलों का इस्तेमाल नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने के लिए नहीं होना चाहिए।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि सुरक्षा बल भी इसी देश के नागरिक हैं। दूसरी ओर जिन लोगों की निगरानी या रोकथाम के लिए उन्हें तैनात किया जाता है, वे भी देश के नागरिक हैं। इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें सुरक्षा और नागरिक अधिकार दोनों सुरक्षित रहें।

पुलिस की भूमिका पर जोर

जमाअत ने पुलिस से पेशेवर रवैया अपनाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को राजनीतिक दबाव से अलग रहकर कानून के अनुसार काम करना चाहिए।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर के मुताबिक पुलिस की जिम्मेदारी केवल भीड़ को नियंत्रित करना नहीं है। उसकी जिम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्थिति में पुलिस को प्रदर्शनकारियों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए।

जमाअत का यह भी कहना है कि किसी भी प्रदर्शन में यदि कानून का उल्लंघन होता है तो पुलिस को कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन कार्रवाई स्पष्ट कानून और प्रमाण के आधार पर होनी चाहिए। सामूहिक रूप से प्रदर्शनकारियों को अपराधी मान लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं होगा।

जुलाई 2026 में भी जमाअत ए इस्लामी हिंद ने जंतर मंतर के आसपास छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई थी। उस समय संगठन ने बल प्रयोग के बजाय सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की अपील की थी। Clarion India

सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की जरूरत

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाए। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन मुद्दों पर प्रतिक्रिया दे। दोनों पक्षों के बीच मतभेद होने के बावजूद संवाद का रास्ता खुला रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध सरकार के खिलाफ दुश्मनी नहीं है। शांतिपूर्ण असहमति व्यवस्था का हिस्सा है। किसी नीति या फैसले पर सवाल उठाना नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के दायरे में आता है।

इस संदर्भ में उन्होंने सरकार और पुलिस अधिकारियों से अपील की कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के लिए पर्याप्त स्थान और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के साथ आम नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाए।

यह मुद्दा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। देश के अलग अलग हिस्सों में समय समय पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन के सामने चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करने की भी होती है।

लोकतांत्रिक छवि का सवाल

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ होने वाला व्यवहार देश की लोकतांत्रिक छवि से भी जुड़ा है। उनके मुताबिक भारत दुनिया के सामने खुद को एक लोकतांत्रिक देश के रूप में प्रस्तुत करता है। इसलिए देश के भीतर राजनीतिक असहमति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर होने वाली घटनाओं का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती केवल संस्थाओं से नहीं बल्कि नागरिकों के भरोसे से भी तय होती है। यदि नागरिकों को यह महसूस होने लगे कि अपनी बात रखने पर उनके खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई हो सकती है तो संस्थाओं पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।

हालांकि सरकार और पुलिस की ओर से किसी भी सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना होता है। ऐसे में प्रत्येक कार्रवाई को उसके संदर्भ में देखना जरूरी है। विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात, संभावित हिंसा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

शांतिपूर्ण असहमति लोकतंत्र का हिस्सा

जमाअत ए इस्लामी हिंद का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय उसे सुनने की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। सरकार से असहमति रखने वाले लोगों को भी संविधान के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि राजनीतिक विरोध, शांतिपूर्ण असहमति और संवैधानिक स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। सरकार को चाहिए कि वह विरोध के मुद्दों को समझे और जहां संभव हो वहां बातचीत के जरिए समाधान तलाशे।

उन्होंने पुलिस से भी कानून के अनुसार निष्पक्ष और पेशेवर रवैया अपनाने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि पुलिस पर दुर्व्यवहार या अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जमाअत ए इस्लामी हिंद के इस बयान ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, विपक्ष की भूमिका और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर जारी बहस को फिर सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में जंतर मंतर और राजधानी के अन्य हिस्सों में प्रस्तावित प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन की रणनीति और प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

AEO के लिए महत्वपूर्ण सवाल

प्रश्न: प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को लेकर क्या कहा?
उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी नेताओं की हिरासत पर चिंता जताते हुए सरकार से संवाद और पुलिस से पेशेवर रवैया अपनाने की मांग की।

प्रश्न: जमाअत ए इस्लामी हिंद ने पुलिस से क्या मांग की है?
जमाअत ने पुलिस से संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने, अनावश्यक हिरासत से बचने और पुलिस दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रश्न: 38 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती को लेकर क्या कहा गया है?
जमाअत ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बड़े सुरक्षा इंतजाम पर चिंता जताई और कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का भी सम्मान होना चाहिए।

प्रश्न: जमाअत के अनुसार विपक्ष की भूमिका क्या है?
संगठन के अनुसार विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दे उठाने और सरकार से जवाब मांगने की महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक भूमिका निभाता है।

प्रश्न: लोकतांत्रिक विरोध को लेकर जमाअत का मुख्य संदेश क्या है?
संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और राजनीतिक विवादों का समाधान बातचीत तथा संस्थागत संवाद से किया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *