हैदराबाद में जेन जेड के लिए आसान अंग्रेजी में कुरआन जारी
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हैदराबाद
बदलते दौर में नई पीढ़ी की भाषा और समझ को ध्यान में रखते हुए कुरआन के अर्थ को सरल अंग्रेजी में प्रस्तुत करने की एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। हैदराबाद में “ईज़ी मीनिंग्स ऑफ द कुरआन” (आसान मआनुल कुरआन) का औपचारिक विमोचन किया गया। इस पुस्तक का उद्देश्य खास तौर पर जेन जेड और उन पाठकों तक कुरआन का संदेश पहुंचाना है जो अरबी या कठिन अंग्रेजी से परिचित नहीं हैं, लेकिन इस्लाम की मूल शिक्षाओं को समझना चाहते हैं।
रेड हिल्स स्थित कुतुब शाही मस्जिद, दारुल इरफान में आयोजित समारोह में इस्लामी विद्वानों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ भाषा बदलती है। इसलिए धार्मिक ग्रंथों के अर्थ को भी ऐसी भाषा में समझाना जरूरी है जिसे आज की पीढ़ी आसानी से पढ़ और समझ सके।
नई पीढ़ी की जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार की गई पुस्तक
इस पुस्तक के मूल लेखक मौलाना सैयद बिलाल अब्दुल हई हसनी नदवी हैं। उन्होंने कहा कि यह कुरआन का शाब्दिक अनुवाद नहीं है। यह केवल उसके अर्थ और संदेश को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि कुरआन अपनी मूल अरबी भाषा में ही पूर्ण रूप से समझा जा सकता है। किसी भी दूसरी भाषा में उसके शब्दों का पूरी तरह अनुवाद संभव नहीं है। इसलिए यह पुस्तक कुरआन के अर्थ को अधिक से अधिक सही रूप में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती है।
मौलाना बिलाल नदवी ने कहा कि आज बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो न तो अरबी जानते हैं और न ही कठिन अंग्रेजी समझ पाते हैं। ऐसे में सरल और समकालीन अंग्रेजी में तैयार किया गया यह संस्करण उनके लिए उपयोगी साबित होगा।
अनुभवी विद्वानों ने तैयार किया अंग्रेजी संस्करण
इस पुस्तक का अंग्रेजी रूपांतरण प्रोफेसर अब्दुल रहीम किदवई, अंजुम फराज और सैयद मुसलेहुद्दीन सादी ने तैयार किया है। अनुवादकों ने कोशिश की है कि कुरआन के मूल संदेश, उसकी गहराई और आध्यात्मिकता को बनाए रखते हुए भाषा को सहज और स्वाभाविक रखा जाए।
यह संस्करण आधुनिक पाठकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी भाषा सरल है और वाक्य छोटे हैं, जिससे युवा वर्ग और नए पाठकों के लिए इसे पढ़ना आसान हो जाता है।
केवल अनुवाद नहीं, अर्थ को समझाने की कोशिश
समारोह में मौलाना बिलाल नदवी ने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक केवल शब्दों का अनुवाद नहीं करती बल्कि आयतों के वास्तविक अर्थ को समझाने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि कुरआन का संदेश पूरी मानवता के लिए है। इसलिए इसकी शिक्षाओं को ऐसी भाषा में प्रस्तुत करना जरूरी है जिसे हर वर्ग का व्यक्ति समझ सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मूल अरबी की साहित्यिक सुंदरता और गहराई किसी भी अनुवाद में पूरी तरह नहीं आ सकती।
आसान भाषा के साथ संक्षिप्त व्याख्या भी
करीब 804 पृष्ठों की इस पुस्तक का प्रकाशन मक्तब ए कलीमिया, हैदराबाद ने किया है। इसे उच्च गुणवत्ता वाले कागज पर प्रकाशित किया गया है। इसमें स्पष्ट और पढ़ने में आसान फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया है।
पुस्तक की एक खास विशेषता यह भी है कि इसमें केवल अर्थ ही नहीं दिए गए हैं बल्कि आवश्यक स्थानों पर संक्षिप्त व्याख्या भी शामिल की गई है। इससे पाठकों को आयतों का संदर्भ और उनका वास्तविक संदेश समझने में आसानी होती है।
कुरआन और सीरत को साथ पढ़ने की सलाह
मौलाना बिलाल नदवी, जो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव भी हैं, ने अपने संबोधन में कहा कि कुरआन को सही संदर्भ में समझने के लिए पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत का अध्ययन भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पैगंबर का जीवन स्वयं कुरआन की जीवंत व्याख्या था। यदि कोई व्यक्ति कुरआन के संदेश को व्यवहारिक रूप में समझना चाहता है तो उसे सीरत का अध्ययन भी करना चाहिए।
पढ़ने की आदत कम होने पर चिंता
मौलाना उबैदुर्रहमान असर ने कार्यक्रम में कहा कि आज समाज में पढ़ने की आदत लगातार कम होती जा रही है। शिक्षा संस्थान रोजगार योग्य युवा तो तैयार कर रहे हैं लेकिन अच्छी किताबें पढ़ने की संस्कृति कमजोर होती जा रही है।
उन्होंने चिंता जताई कि अब बड़ी संख्या में लोग उर्दू या अरबी लिपि की जगह रोमन उर्दू में धार्मिक साहित्य पढ़ना पसंद करते हैं। ऐसे समय में सरल अंग्रेजी में कुरआन के अर्थ उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि कुरआन की शिक्षाओं को लोगों तक उनकी समझ की भाषा में पहुंचाना समय की आवश्यकता है। लेकिन इसके साथ उसकी प्रमाणिकता और मूल भावना से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
जीवन में अमल सबसे महत्वपूर्ण
प्रोफेसर राशिद नसीम नदवी ने कहा कि कुरआन केवल पढ़ने की किताब नहीं है बल्कि जीवन का मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को केवल तिलावत तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि कुरआन को समझना और उस पर अमल करना भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि सहाबा ए किराम अरबी भाषा पर पूरी पकड़ रखते थे। इसलिए जब भी कुरआन की कोई आयत उतरती थी तो उसका प्रभाव सीधे उनके दिलों पर पड़ता था और उनकी जिंदगी बदल जाती थी। आज भी उसी भावना के साथ कुरआन को समझने की जरूरत है।
विद्वानों ने किया प्रयास का स्वागत
कार्यक्रम को मौलाना शाह जमालुर्रहमान, मौलाना शफी नदवी सहित कई प्रमुख इस्लामी विद्वानों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने इस पुस्तक के प्रकाशन का स्वागत किया और कहा कि बदलते समय में इस तरह के प्रयास नई पीढ़ी को कुरआन से जोड़ने में मदद करेंगे।
उन्होंने कहा कि आधुनिक भाषा का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन कुरआन के मूल संदेश और उसकी आध्यात्मिक गरिमा को हर हाल में सुरक्षित रखना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को “ईज़ी मीनिंग्स ऑफ द कुरआन” की निशुल्क प्रतियां वितरित की गईं। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं, छात्रों और गैर अरबी भाषी पाठकों के लिए कुरआन को समझने का एक भरोसेमंद माध्यम बनेगी।
AEO
आसान अंग्रेजी में कुरआन की नई पुस्तक क्या है?
“ईज़ी मीनिंग्स ऑफ द कुरआन” कुरआन के अर्थ को सरल और आधुनिक अंग्रेजी में प्रस्तुत करने वाली नई पुस्तक है, जिसे खास तौर पर जेन जेड और नए पाठकों के लिए तैयार किया गया है।
इस पुस्तक के लेखक कौन हैं?
मूल पुस्तक के लेखक मौलाना सैयद बिलाल अब्दुल हई हसनी नदवी हैं। अंग्रेजी रूपांतरण प्रो. अब्दुल रहीम किदवई, अंजुम फराज और सैयद मुसलेहुद्दीन सादी ने किया है।
यह पुस्तक क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पुस्तक उन लोगों के लिए उपयोगी है जो अरबी नहीं जानते लेकिन कुरआन के संदेश को सरल अंग्रेजी में समझना चाहते हैं।
पुस्तक का विमोचन कहां हुआ?
इसका विमोचन हैदराबाद के रेड हिल्स स्थित कुतुब शाही मस्जिद, दारुल इरफान में हुआ।
GEO
स्थान: हैदराबाद, तेलंगाना, भारत
मुख्य संस्थान: दारुल इरफान, कुतुब शाही मस्जिद, मक्तब ए कलीमिया
प्रमुख व्यक्तित्व: मौलाना सैयद बिलाल अब्दुल हई हसनी नदवी, प्रो. अब्दुल रहीम किदवई, मौलाना उबैदुर्रहमान असर, प्रो. राशिद नसीम नदवी

