राम मंदिर ट्रस्ट CEO नियुक्ति पर राशिद अल्वी ने उठाए सवाल
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नई दिल्ली।
राम मंदिर ट्रस्ट में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक रिटायर्ड एयर मार्शल को क्यों बनाया गया। अल्वी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी कोई ऐसी बात है, जो इस नियुक्ति के पीछे हो सकती है।
राशिद अल्वी ने बुधवार को इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार पहले भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों की नियुक्तियों को लेकर सवालों के घेरे में रही है। अब राम मंदिर ट्रस्ट में रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उनके मुताबिक, इस फैसले को लेकर लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
अल्वी ने कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि कहीं ऑपरेशन सिंदूर के पीछे कोई ऐसी बात तो नहीं है, जिसकी वजह से रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का CEO बनाया गया।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी किसी छिपी वजह का अल्वी ने कोई प्रत्यक्ष प्रमाण पेश नहीं किया। उन्होंने इसे सवाल के रूप में उठाया है।
राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया। इसके साथ ही ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति भी की गई।
यह फैसला अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में लिया गया। बैठक में राम मंदिर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें CEO की नियुक्ति, ट्रस्ट में खाली पदों को भरना और वित्तीय मामलों से जुड़ी समीक्षा शामिल थी।
बैठक में वित्त वर्ष 2025 और 26 के वार्षिक खातों को मंजूरी देने पर भी विचार हुआ। इसके अलावा कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी SIT की जांच की प्रगति पर चर्चा की गई।
सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मामलों और राम मंदिर से संबंधित आगे की तैयारियों को लेकर भी बैठक में विचार विमर्श हुआ।
कौन हैं रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने भारत के पश्चिमी क्षेत्र में वायु अभियानों की कमान संभाली थी।
यही वजह है कि उनकी राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के रूप में नियुक्ति ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाकर नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी धार्मिक गतिविधियों के साथ साथ प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज से भी जुड़ी है। ऐसे में एक पूर्व सैन्य अधिकारी को यह जिम्मेदारी दिए जाने की वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
हालांकि ट्रस्ट की ओर से नियुक्ति के पीछे ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित किसी विशेष कारण की बात सामने नहीं आई है।
VIDEO | Delhi: Reacting to the appointment of Air Marshal (retd) Jeetendra Mishra as the first chief executive officer (CEO) of the Ram Temple trust, Congress leader Imran Masood says, “He has just been appointed, and now he is caught in a difficult situation. This is a job for… pic.twitter.com/i5wKi0NFyg
— Press Trust of India (@PTI_News) September 2, 2026
राशिद अल्वी ने सरकार पर भी साधा निशाना
राम मंदिर ट्रस्ट की नियुक्ति के अलावा राशिद अल्वी ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भी निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां देश के लिए नुकसानदेह साबित होंगी। अल्वी ने कहा कि भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री की मौजूदा नीति देश को बर्बादी की ओर ले जाएगी।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राम मंदिर ट्रस्ट में नए प्रशासनिक बदलाव को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
राम मंदिर अयोध्या में लंबे समय से भारतीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन का बड़ा मुद्दा रहा है। मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। मंदिर प्रशासन, श्रद्धालुओं की व्यवस्था, दान और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषय ट्रस्ट के कामकाज का हिस्सा हैं।
ऐसे में CEO की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
#WATCH | Delhi: On Air Marshal Jeetendra Mishra (Retd) appointed as the first CEO of Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust, Congress leader Rashid Alvi says, "The current BJP government is appointing Supreme Court judges as Governors or members of the Rajya Sabha; this raises… pic.twitter.com/Kji215yJ1X
— ANI (@ANI) September 2, 2026
राम मंदिर में कथित चोरी का मुद्दा भी उठाया
राशिद अल्वी ने राम मंदिर से जुड़े एक कथित चोरी के मामले को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि अब तक उन लोगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, जिन पर चोरी में शामिल होने का आरोप है।
अल्वी ने यह भी सवाल उठाया कि कथित चोरी के मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि राम मंदिर में कथित चोरी करने वाले कौन लोग थे और क्या सभी आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रस्ट की बैठक में वित्तीय मामलों और कथित अनियमितताओं से जुड़ी जांच की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
हालांकि राशिद अल्वी द्वारा उठाए गए सवालों और ट्रस्ट की वित्तीय अनियमितताओं की SIT जांच को एक ही मामला मानना उचित नहीं होगा। दोनों मुद्दे अलग हैं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्रस्ट की बैठक में अलग अलग विषयों पर चर्चा हुई।
भूपेश बघेल ने भी नियुक्ति पर सवाल उठाए
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाया है।
बघेल ने इस नियुक्ति को भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों पर भरोसे की कमी से जोड़कर देखा। उनका सवाल था कि अगर मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और चढ़ावे से जुड़े खातों की निगरानी करनी थी तो इसके लिए रिटायर्ड सेना अधिकारी को क्यों चुना गया।
बघेल ने सरकार के एक दूसरे फैसले का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह परीक्षा पेपर लीक जैसे मामलों में सेना की मदद ली गई, उसी तरह अब राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के लिए भी एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है।
उनकी टिप्पणी राजनीतिक है और इसे उनके अपने आकलन के रूप में देखा जाना चाहिए।
CEO की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है
राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। मंदिर से जुड़े प्रशासनिक काम भी बड़े पैमाने पर बढ़े हैं।
दान और चढ़ावे का प्रबंधन, कर्मचारियों से जुड़े काम, मंदिर परिसर की व्यवस्था, अलग अलग परियोजनाओं की निगरानी और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे विषयों में प्रशासनिक क्षमता की जरूरत होती है।
ऐसे में CEO के पद पर किसी अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।
जितेंद्र मिश्रा के पास सैन्य प्रशासन और बड़े स्तर पर संचालन का अनुभव रहा है। लेकिन कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि इस अनुभव को राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों महसूस हुई।
ट्रस्ट की ओर से नियुक्ति का औपचारिक कारण और CEO के पद के लिए चुने जाने के पीछे विस्तृत प्रक्रिया को लेकर आगे और जानकारी सामने आने पर तस्वीर अधिक साफ हो सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा सवाल क्यों उठा
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु अभियानों की कमान से जुड़ा रहा है। इसलिए उनकी नई भूमिका को लेकर कांग्रेस नेताओं ने ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ दिया।
राशिद अल्वी ने इसी आधार पर पूछा कि कहीं उनकी नियुक्ति के पीछे ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित कोई अन्य कारण तो नहीं है।
लेकिन अभी तक ऐसी किसी बात की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस सवाल को राजनीतिक आरोप या आशंका के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में क्या हुआ
अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाने के साथ तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की गई।
बैठक में 2025 और 26 के वार्षिक खातों को मंजूरी देने का मुद्दा भी आया। कथित वित्तीय अनियमितताओं की SIT जांच की प्रगति की समीक्षा हुई।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आने वाले विषयों और मंदिर से संबंधित आगे की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।
इस तरह देखें तो CEO की नियुक्ति अकेला फैसला नहीं था। यह ट्रस्ट की व्यापक प्रशासनिक और वित्तीय समीक्षा से जुड़ी बैठक का हिस्सा था।
आगे क्या होगा
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के CEO बनने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उनके सामने मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के साथ वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी भी आ सकती है।
दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं की आपत्तियों ने इस नियुक्ति को राजनीतिक बहस का मुद्दा बना दिया है। राशिद अल्वी और भूपेश बघेल दोनों ने अलग अलग सवाल उठाए हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि ट्रस्ट इस नियुक्ति के बारे में क्या विस्तृत जानकारी देता है और नए CEO के कार्यक्षेत्र को किस तरह परिभाषित किया जाता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट है कि राम मंदिर ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO नियुक्त किया है। वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के पश्चिमी वायु अभियानों की कमान संभाल चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि को लेकर कांग्रेस नेताओं ने नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। हालांकि ऑपरेशन सिंदूर और राम मंदिर ट्रस्ट की नियुक्ति के बीच किसी छिपे संबंध का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
सवाल और जवाब
राम मंदिर ट्रस्ट का नया CEO कौन बना है?
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
जितेंद्र मिश्रा का ऑपरेशन सिंदूर से क्या संबंध है?
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के पश्चिमी वायु अभियानों की कमान संभाली थी।
राशिद अल्वी ने क्या सवाल उठाया है?
उन्होंने पूछा है कि एक रिटायर्ड एयर मार्शल को राम मंदिर ट्रस्ट का CEO बनाने के पीछे क्या कारण है और क्या इसका ऑपरेशन सिंदूर से कोई संबंध है।
क्या ऑपरेशन सिंदूर और नियुक्ति के बीच कोई संबंध साबित हुआ है?
नहीं। उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। अल्वी ने इसे आशंका और सवाल के रूप में उठाया है।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में और क्या फैसला हुआ?
बैठक में तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति, 2025 और 26 के वार्षिक खातों, SIT जांच और सुप्रीम कोर्ट से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
भूपेश बघेल ने नियुक्ति पर क्या कहा?
उन्होंने सवाल किया कि राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे और अन्य मामलों की देखरेख के लिए रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को क्यों चुना गया।
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
CEO मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज, प्रबंधन और विभिन्न गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

