ओमान में बंधक हैदराबाद की महिला की वतन वापसी: 3 महीने का दर्दनाक सफर और कूटनीतिक जीत
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हैदराबाद/मस्कट
सपनों की तलाश में सात समंदर पार गई एक बेबस भारतीय महिला के लिए आखिरकार उम्मीद की किरण जागी है। ओमान की राजधानी मस्कट में पिछले तीन महीनों से ‘बंधक’ जैसी परिस्थितियों में फंसी हैदराबाद की रुखिया बेगम जल्द ही अपने घर लौटेंगी। यह कामयाबी तेलंगाना एनआरआई (NRI) एडवाइजरी सेल और ओमान में भारतीय दूतावास के साझा प्रयासों और कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद मिली है।
रोजगार की तलाश और धोखे का जाल
हैदराबाद के डुंडीगल स्थित राजीव गांधी नगर की निवासी रुखिया बेगम इस साल फरवरी में बेहतर भविष्य और आजीविका की तलाश में ओमान गई थीं। उन्हें एक ट्रैवल एजेंट ने सुनहरे भविष्य का सपना दिखाया था। वह 9 फरवरी को टूरिस्ट वीजा पर मस्कट पहुंची थीं, जिसकी वैधता 9 मई तक थी।
हालांकि, मस्कट पहुंचते ही रुखिया को अहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। एजेंट ने उन्हें मझधार में छोड़ दिया। अजनबी देश में खुद को बचाने और जीवित रहने के लिए उन्होंने मजबूरन घरेलू सहायिका (डोमेस्टिक हेल्प) के रूप में काम करना शुरू किया।
बीमारी और शोषण की दोहरी मार
काम के दौरान रुखिया की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें बार-बार बेहोशी के दौरे पड़ने लगे। जब उनकी शारीरिक स्थिति काम करने लायक नहीं रही, तो उन्होंने अपने नियोक्ता (Employer) से भारत वापस भेजने की गुहार लगाई। लेकिन मदद करने के बजाय, नियोक्ता ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया।
आरोप है कि नियोक्ता ने रुखिया का पासपोर्ट जब्त कर लिया और उनकी रिहाई के बदले 1.5 लाख रुपये की फिरौती जैसी मांग रख दी। एक विदेशी धरती पर बीमार और असहाय रुखिया के पास इस शोषण को सहने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
परिवार की लाचारी और ‘सिस्टम’ से गुहार
हैदराबाद में रह रहे रुखिया के परिवार ने अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी। उनकी बहन नसरीन बेगम के अनुसार, परिवार ने नियोक्ता के दबाव में आकर 23 और 25 फरवरी को दो किश्तों में 50,000-50,000 रुपये (कुल 1 लाख रुपये) भेजे थे। इसके बावजूद नियोक्ता का दिल नहीं पसीजा और उसने रुखिया को वापस भेजने से इनकार कर दिया।
अंततः थक-हारकर परिवार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं से मदद मांगी। मामला तेलंगाना एनआरआई एडवाइजरी सेल तक पहुंचा, जिसके बाद कूटनीतिक स्तर पर हलचल शुरू हुई।
भारतीय दूतावास का हस्तक्षेप और सुरक्षित बचाव
तेलंगाना एनआरआई सेल द्वारा ओमान स्थित भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क साधने और मामले की गंभीरता बताने के बाद रविवार, 10 मई को सुखद खबर आई। दूतावास के हस्तक्षेप के बाद रुखिया बेगम को सफलतापूर्वक नियोक्ता के चंगुल से छुड़ा लिया गया है।
ताजा स्थिति:
- सुरक्षित स्थान: रुखिया को फिलहाल मस्कट में भारतीय दूतावास की सुरक्षा में रखा गया है।
- दस्तावेजी प्रक्रिया: उनके यात्रा दस्तावेजों (Travel Documents) की प्रोसेसिंग शुरू कर दी गई है।
- वापसी: कागजी कार्रवाई पूरी होते ही दूतावास उनकी भारत वापसी के लिए फ्लाइट का प्रबंध करेगा।
- रिकवरी: एनआरआई सेल ने आश्वासन दिया है कि वे परिवार द्वारा नियोक्ता को दिए गए 1 लाख रुपये वापस दिलाने का भी प्रयास करेंगे।
विशेषज्ञ की राय: एजेंटों के मकड़जाल से बचें
यह मामला उन हजारों प्रवासी श्रमिकों के लिए एक चेतावनी है जो अवैध एजेंटों के झांसे में आकर टूरिस्ट वीजा पर काम करने खाड़ी देशों में जाते हैं।
“टूरिस्ट वीजा पर जाकर रोजगार ढूंढना न केवल कानूनी रूप से जोखिम भरा है, बल्कि यह प्रवासियों को शोषण के प्रति संवेदनशील बना देता है क्योंकि उनके पास वहां के श्रम कानूनों का संरक्षण नहीं होता।”
रुखिया बेगम की वतन वापसी न केवल उनके परिवार के लिए राहत की बात है, बल्कि यह भारतीय विदेश मंत्रालय की ‘सिटिजन फर्स्ट’ नीति की एक और सफलता को भी दर्शाती है। हैदराबाद में उनका परिवार अब बस उस घड़ी का इंतजार कर रहा है जब रुखिया सही-सलामत घर की दहलीज पर कदम रखेंगी।

