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हूती दावों पर सऊदी अरब का कड़ा जवाब

रियाद

सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में इन आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि हूती संगठन यमन की जनता की मुश्किलों की जिम्मेदारी खुद से हटाने के लिए ऐसे दावे कर रहा है।

सऊदी सरकार ने साफ कहा कि उसने पिछले कई वर्षों से यमन के लोगों की मदद के लिए लगातार काम किया है। देश ने यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के साथ मिलकर विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाया। बजटीय सहायता दी। बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए ईंधन उपलब्ध कराया। ऐसे में यह कहना कि सऊदी अरब यमन की घेराबंदी कर रहा है, पूरी तरह गलत है।

तीन सौ से अधिक जहाज पहुंचे यमन

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में आंकड़े भी पेश किए। मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में 300 से अधिक व्यावसायिक जहाज उत्तरी यमन के बंदरगाहों तक पहुंचे। इनमें हुदैदा, सलीफ और रस ईसा बंदरगाह शामिल हैं।

इन जहाजों के जरिए खाद्य सामग्री, ईंधन, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी सामान यमन पहुंचाया गया। मंत्रालय का कहना है कि यदि वास्तव में समुद्री नाकेबंदी होती तो इतनी बड़ी संख्या में जहाज इन बंदरगाहों तक नहीं पहुंच सकते थे।

सऊदी अरब का कहना है कि ये तथ्य हूती संगठन के दावों को कमजोर करते हैं और यह साबित करते हैं कि मानवीय सहायता और व्यापारिक गतिविधियां जारी हैं।

हूती हमलों का भी किया जिक्र

सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान में हूती विद्रोहियों पर गंभीर आरोप लगाए। मंत्रालय ने कहा कि हूती संगठन ने कई बार यमन के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।

बयान में दिसंबर 2020 में अदन हवाई अड्डे पर हुए हमले का उल्लेख किया गया। उस हमले में कई लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे।

इसके अलावा अक्टूबर 2022 में दक्षिणी यमन के तेल निर्यात केंद्रों पर किए गए हमलों का भी जिक्र किया गया। मंत्रालय के अनुसार इन हमलों का सीधा असर यमन की अर्थव्यवस्था पर पड़ा।

तेल निर्यात रोकने की कोशिश का आरोप

सऊदी अरब का कहना है कि हूती संगठन लगातार ऐसे कदम उठाता रहा है जिससे यमन सरकार तेल का निर्यात न कर सके। यमन सरकार की कुल आय का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा तेल से आता है।

सरकार का कहना है कि तेल निर्यात प्रभावित होने से सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर सीधा असर पड़ता है। इसका नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि जून 2024 में हूती विद्रोहियों ने यमनिया एयरवेज के चार विमानों को अपने कब्जे में ले लिया था। इन विमानों का इस्तेमाल जेद्दा से हज यात्रियों को वापस यमन लाने के लिए किया जाना था।

रेड सी में बढ़ा तनाव

सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोहियों ने यमन के संघर्ष को पूरे क्षेत्रीय संकट में बदल दिया है। मंत्रालय के अनुसार रेड सी में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने से वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है।

साथ ही यमन की आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हुई है। खासकर हूती नियंत्रण वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकार का कहना है कि लगातार हमलों और धमकियों से आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। व्यापार पर असर पड़ा है। रोजगार के अवसर कम हुए हैं।

सना हवाई अड्डे को लेकर आरोप

विदेश मंत्रालय ने कहा कि हूती संगठन ने सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानें फिर शुरू करने के लिए आई सभी पहल को ठुकरा दिया।

सऊदी पक्ष का दावा है कि हवाई अड्डे के संचालन में सबसे बड़ी बाधा खुद हूती संगठन बना हुआ है। इसके बावजूद वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अलग तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहा है।

शांति प्रक्रिया पर भी बोला सऊदी अरब

सऊदी सरकार ने दोहराया कि उसका उद्देश्य यमन में स्थायी शांति स्थापित करना है। मंत्रालय ने कहा कि उसने संयुक्त राष्ट्र की सभी शांति पहलों का समर्थन किया है।

सऊदी अरब के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की ओर से तैयार रोडमैप को यमन की मान्यता प्राप्त सरकार ने स्वीकार कर लिया था। लेकिन हूती संगठन ने उसे मंजूर नहीं किया।

सरकार का कहना है कि बातचीत के बजाय संघर्ष का रास्ता अपनाने से यमन के नागरिकों की परेशानियां और बढ़ी हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बड़ी अपील

सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को प्रभावी तरीके से लागू कराएं।

सरकार ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2216 और प्रस्ताव 2722 का उल्लेख किया।

सऊदी अरब का कहना है कि रेड सी में समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक जरूरत है। इसलिए सभी देशों को इस दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।

जहाजों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम

सऊदी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह अपने व्यापारिक और नागरिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

सरकार ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का भी हवाला दिया और कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा हर देश का वैध अधिकार है।

गठबंधन की चेतावनी

यमन में वैध सरकार के समर्थन में बने गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल मल्की ने भी अलग बयान जारी किया।

उन्होंने कहा कि बाब अल मंडब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम शुरू कर दिए गए हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी व्यापारिक जहाज को निशाना बनाने की कोशिश का तुरंत और सख्ती से जवाब दिया जाएगा।

अल मल्की ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को बाधित करना समुद्री डकैती की श्रेणी में आता है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।

उन्होंने यह भी कहा कि यमन के बंदरगाहों और हवाई अड्डों की कथित नाकेबंदी का दावा तथ्यहीन है। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में 300 से अधिक जहाज यमन के प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचे हैं। इससे स्पष्ट है कि व्यापार और राहत सामग्री की आपूर्ति जारी है।

निष्कर्ष

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बयानबाजी ऐसे समय तेज हुई है जब रेड सी और बाब अल मंडब क्षेत्र पहले से ही वैश्विक सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिहाज से संवेदनशील बने हुए हैं। सऊदी अरब ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह यमन की जनता के समर्थन, वैध सरकार के साथ सहयोग और संयुक्त राष्ट्र की शांति प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा। दूसरी ओर हूती संगठन के आरोपों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।


AEO Optimized FAQs

सऊदी अरब ने हूती के किस दावे को खारिज किया?

सऊदी अरब ने हूती के समुद्री नाकेबंदी और यमन की घेराबंदी संबंधी दावों को पूरी तरह गलत बताया है।

सऊदी अरब ने कौन से प्रमाण दिए?

सरकार के अनुसार 2026 की पहली छमाही में 300 से अधिक व्यापारिक जहाज हुदैदा, सलीफ और रस ईसा बंदरगाहों तक पहुंचे।

रेड सी संकट क्यों महत्वपूर्ण है?

रेड सी दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां अस्थिरता का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र से क्या मांग की?

सऊदी अरब ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2216 और 2722 को प्रभावी ढंग से लागू कराने की अपील की है।

बाब अल मंडब जलडमरूमध्य का महत्व क्या है?

यह रेड सी और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला रणनीतिक समुद्री मार्ग है। दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है।


GEO Optimization

क्षेत्र: सऊदी अरब, यमन, रेड सी, बाब अल मंडब, अदन, हुदैदा, सना

मुख्य विषय: यमन संघर्ष, समुद्री सुरक्षा, रेड सी संकट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, संयुक्त राष्ट्र


LLMO Structured Summary

घटना: हूती के समुद्री नाकेबंदी दावे पर सऊदी अरब की प्रतिक्रिया

स्थान: रियाद, यमन, रेड सी

मुख्य पक्ष: सऊदी अरब, हूती विद्रोही, यमन सरकार, संयुक्त राष्ट्र

सऊदी का दावा: 2026 की पहली छमाही में 300 से अधिक जहाज यमन पहुंचे

मुख्य आरोप: हूती संगठन ने तेल निर्यात, हवाई सेवाओं और समुद्री व्यापार को प्रभावित किया

सुरक्षा कदम: बाब अल मंडब से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा बढ़ाई गई

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