‘सेवा’ ने नागपुर की छात्रा को UPSC रणनीति से कराया रूबरू
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मुस्लिम बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समर्पित गैर-सरकारी संस्था ‘सेवा’ इन दिनों नागपुर की एक प्रतिभाशाली बेटी के सपनों को पंख देने में जुटी है। यह छात्रा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी कर रही है और संस्था उसके मार्गदर्शन, संसाधन और मनोवैज्ञानिक सहयोग की हर संभव व्यवस्था कर रही है।
किसी समाज की प्रगति केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और अनुभवी लोगों की सक्रिय भागीदारी से होती है। ‘सेवा’ ने इसी विचार को आधार बनाकर एक सुनियोजित पहल शुरू की है, जिसके तहत छात्रों को न केवल आर्थिक सहायता दी जाती है, बल्कि उन्हें ऐसे अनुभवी व्यक्तियों से भी मिलवाया जाता है, जिनके अनुभव से उनकी तैयारी को दिशा मिल सके।
सही दिशा में मेहनत का संदेश
संस्था के व्हाट्सएप समूह में साझा संदेश में कहा गया कि “हर बच्चा आसमान की बुलंदी को छूना चाहता है, लेकिन हर कोई वहां तक नहीं पहुंच पाता। वजह अक्सर मेहनत की कमी नहीं, बल्कि सही रहनुमाई की कमी होती है।” संदेश में इस बात पर जोर दिया गया कि मेहनत तभी फल देती है जब वह सही दिशा में की जाए, और सही दिशा देने का काम अनुभवी मार्गदर्शक करते हैं।
इसी सोच के तहत 13 फरवरी 2026 को ‘सेवा’ नागपुर टीम ने यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा की मुलाकात उच्च शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय (ओल्ड मॉरिस कॉलेज, नागपुर) में कार्यरत एक ऐसे अधिकारी से कराई, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा का गहरा अनुभव है। इस मुलाकात के दौरान अधिकारी ने परीक्षा की बारीकियों, सिलेबस की संरचना, अध्ययन की रणनीति और समय प्रबंधन पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने यह भी साझा किया कि किस प्रकार छोटी-छोटी रणनीतिक गलतियां बड़े परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। अपनी व्यक्तिगत तैयारी के अनुभवों और चुनौतियों को साझा करते हुए उन्होंने छात्रा को समझाया कि पढ़ाई की ‘तरतीब’ क्या होनी चाहिए और विषयों का चयन व पुनरावृत्ति किस क्रम में की जाए। यह संवाद छात्रा के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मुस्लिम बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समर्पित गैर-सरकारी संस्था ‘सेवा’ इन दिनों नागपुर की एक प्रतिभाशाली बेटी के सपनों को पंख देने में जुटी है। यह छात्रा यूपीएससी की तैयारी कर रही है और संस्था मार्गदर्शन। pic.twitter.com/98UB5h806r
— muslimnow (@muslimnow3) February 15, 2026
अनुभव का अमल ही असली ताकत
संस्था का मानना है कि “तालीम के साथ तबीयत जरूरी है।” यहां ‘तबीयत’ से आशय ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग से है—यानि सीखी हुई बातों को व्यवस्थित ढंग से अमल में लाना। ‘सेवा’ का प्रयास है कि विद्यार्थियों को केवल किताबें ही न मिलें, बल्कि वे यह भी जानें कि पढ़ाई को किस रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जाए।
14 फरवरी 2026 को संस्था के कार्यकर्ताओं और डब्ल्यूसीएल (वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) से सेवानिवृत्त एक चीफ इंजीनियर गुलाम कादिर ने बीए प्रथम वर्ष की एक अन्य छात्रा से भेंट की, जो भविष्य में यूपीएससी परीक्षा देने का लक्ष्य रखती है। उन्होंने उसे एनसीईआरटी की आवश्यक पुस्तकों का पूरा सेट प्रदान किया और प्रारंभिक स्तर से ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कैसे शुरू की जाए, इस पर विस्तार से चर्चा की।
सेवानिवृत्त इंजीनियर ने छात्रा को यह भी बताया कि शुरुआती वर्षों में मजबूत बुनियाद तैयार करना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने विषयों की समझ विकसित करने, अखबार पढ़ने की आदत डालने और समसामयिक घटनाओं पर दृष्टिकोण विकसित करने की सलाह दी।
घर-घर पहुंच रही है ‘सेवा’
‘सेवा’ केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है। संस्था के कार्यकर्ता विद्यार्थियों के घर जाकर उनसे संवाद करते हैं, उनकी पारिवारिक स्थिति को समझते हैं और उन्हें मानसिक तथा मनोवैज्ञानिक सहयोग भी प्रदान करते हैं। कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों में आत्मविश्वास की कमी या दिशा भ्रम की समस्या होती है। संस्था इस कमी को दूर करने का प्रयास करती है।
समाज के बुजुर्गों और अनुभवी लोगों को आगे लाकर संस्था एक सामुदायिक मॉडल विकसित कर रही है, जिसमें अनुभव और ऊर्जा का संगम हो। यह मॉडल इस विश्वास पर आधारित है कि यदि समाज का वरिष्ठ वर्ग सजग और सक्रिय हो जाए, तो युवा पीढ़ी निरंतर आगे बढ़ सकती है।
बेटियों के सपनों को उड़ान
विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देना संस्था की प्राथमिकता में शामिल है। संस्था का मानना है कि जब किसी समुदाय की बेटियां शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती हैं, तो पूरा समाज सशक्त होता है।
‘सेवा’ के कार्यकर्ताओं ने विश्वास जताया कि यह मार्गदर्शन और संसाधन आने वाले समय में छात्राओं के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। संस्था ने दुआ की कि “अल्लाह रब्बुल इज्ज़त कौम की बेटियों को कामयाबी अता करे।”
नागपुर की इन छात्राओं की कहानी केवल व्यक्तिगत संघर्ष की नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और सामाजिक जिम्मेदारी की भी है। यह पहल दिखाती है कि यदि समाज मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प ले, तो संसाधनों की कमी भी सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती।

